जिस कमरे में सपने सजाए, वहीं मौत ने दी दस्तक… सत्य निकेतन हादसे ने उठाए बड़े सवाल

Delhi building tragedy reality narrow lanes, dilapidated buildings three children to a room ₹15,000 per bed

नई दिल्ली। दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला इमारत के ढहने से हुए दर्दनाक हादसे ने यहां रह रहे छात्रों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हादसे में छह लोगों की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हुए। जिस इमारत में हादसा हुआ, वहां बड़ी संख्या में छात्र पीजी के रूप में रह रहे थे। हादसे के बाद प्रशासन ने आसपास के कुछ पीजी भी एहतियातन खाली करा दिए, जिससे कई छात्रों के सामने अचानक रहने का संकट खड़ा हो गया।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, सत्य निकेतन में बड़ी संख्या में पुराने मकानों को पीजी में तब्दील कर दिया गया है। हादसे वाली इमारत में भी केरल, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के छात्र रह रहे थे। एक कमरे में दो से तीन छात्रों के रहने की बात सामने आई है। छात्र एक बेड के लिए 12 से 15 हजार रुपये तक किराया दे रहे थे।

बेसमेंट में चल रहा था काम, नींव कमजोर होने का दावा

स्थानीय लोगों के अनुसार हादसे वाली करीब 30 साल पुरानी इमारत के बेसमेंट में निर्माण और खुदाई का काम चल रहा था। उनका दावा है कि निर्माण कार्य के दौरान पानी भरने से इमारत की नींव कमजोर हो गई थी।

हादसे के बाद बगल की इमारत भी झुकी हुई दिखाई दी, जिससे आसपास रहने वाले लोगों में चिंता बढ़ गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऊपरी मंजिलों पर करीब 20 से 25 छात्र रह रहे थे।

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स्थानीय निवासी प्रियंका ने बताया कि वह पिछले 20-22 वर्षों से इलाके में रह रही हैं। उनके मुताबिक, हादसे वाली इमारत काफी पुरानी थी और इतने वर्षों में उन्होंने वहां नियमित रखरखाव का काम होते नहीं देखा। उन्होंने इलाके की खुली नालियों और सीवर व्यवस्था पर भी सवाल उठाए।

DU में हजारों सीटें, लेकिन हॉस्टल की क्षमता सीमित

सत्य निकेतन और आसपास के इलाकों में पीजी की मांग का एक बड़ा कारण दिल्ली विश्वविद्यालय में हॉस्टल की सीमित क्षमता भी है। दिल्ली विश्वविद्यालय में स्नातक स्तर पर करीब 70 हजार सीटें हैं, जबकि 20 हॉस्टलों में लगभग चार हजार छात्रों के रहने की क्षमता बताई जा रही है।

बड़ी संख्या में छात्र दूसरे राज्यों से दिल्ली आते हैं। हॉस्टल में जगह नहीं मिलने के कारण उन्हें निजी पीजी और किराये के कमरों पर निर्भर रहना पड़ता है। छात्रों का कहना है कि बढ़ती मांग के बीच किराया लगातार महंगा होता जा रहा है, जबकि सुरक्षा और भवन की स्थिति पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता।

हादसे के बाद मोतीबाग में भी खाली कराए गए पीजी

सत्य निकेतन में हादसे के बाद प्रशासन ने आसपास के कई पीजी को एहतियातन खाली कराया। हादसा स्थल के आसपास रहने वाले छात्रों को राहत और बचाव अभियान के दौरान सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए कहा गया।

कार्रवाई की आशंका के बीच कुछ पीजी संचालकों ने मकानों के बाहर लगे बोर्ड भी हटा दिए। अचानक कमरे खाली करने के निर्देश से कई छात्र अपना सामान लेकर सड़क पर आ गए।

छात्रों का कहना है कि वे पढ़ाई और नौकरी के सिलसिले में इलाके में रह रहे हैं। ऐसे में अचानक दूसरी जगह कमरा तलाशना उनके लिए मुश्किल हो गया है।

दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से नजदीकी कॉलेज में प्रभावित छात्रों के अस्थायी ठहरने की व्यवस्था की गई। वहीं, छात्र संगठनों ने भी सड़क पर आए छात्रों के लिए भोजन की व्यवस्था की और शाम को लंगर लगाया।

रविवार को हुआ था दर्दनाक हादसा

सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर करीब 1:33 बजे पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। इमारत में ‘हॉस्टल डेज’ नाम से पीजी हॉस्टल संचालित हो रहा था।

हादसे की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की आठ गाड़ियों के साथ कई बचाव दल मौके पर पहुंचे। स्थानीय लोगों और आसपास की इमारतों में रहने वाले छात्रों ने भी शुरुआती स्तर पर मलबा हटाने में मदद की।

राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की दो टीमें भी मौके पर पहुंचीं। करीब 70 जवानों के साथ डॉग स्क्वाड की मदद से मलबे में फंसे लोगों की तलाश की गई। देर रात तक कई लोगों को मलबे से बाहर निकाला गया। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया।

बताया गया कि हादसे के समय बेसमेंट में मजदूर खुदाई का काम कर रहे थे। इस वजह से निर्माण गतिविधियों और इमारत की संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठे हैं।

चार मंजिल से ऊपर के अवैध निर्माण सील करने के निर्देश

हादसे के बाद दिल्ली नगर निगम ने चार मंजिल से अधिक के सभी अवैध निर्माणों को तत्काल प्रभाव से सील करने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

मेयर प्रवेश वाही ने रविवार रात इसकी जानकारी देते हुए कहा कि आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। स्थानीय लोगों ने भी इलाके के पुराने और जर्जर भवनों का व्यापक सुरक्षा सर्वे कराने की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते खतरनाक इमारतों की पहचान कर उन्हें खाली कराया जाए तो भविष्य में बड़े हादसों को रोका जा सकता है।

पीएम मोदी और राहुल गांधी ने जताया दुख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर दुख जताते हुए मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि प्रशासन प्रभावित लोगों की मदद के लिए मौके पर मौजूद है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी घटना की जानकारी ली। वहीं, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हादसे को बेहद दर्दनाक और चिंताजनक बताते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताई।

सत्य निकेतन का हादसा अब सिर्फ एक इमारत गिरने की घटना नहीं रह गया है। इसने राजधानी में तेजी से बढ़ते पीजी कल्चर, किराये के कमरों की मांग, पुरानी इमारतों के रखरखाव और छात्रों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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