
दिल्ली में लाल किले के पास हुए भीषण कार बम धमाके की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। एनआईए द्वारा अदालत में दाखिल आरोपपत्र के अनुसार, मुख्य आतंकी उमर-उन-नबी का पहला मकसद चांदनी चौक स्थित प्रसिद्ध लाल मंदिर को निशाना बनाना था। घटना वाले दिन उसने मंदिर के पास ही विस्फोटक से भरी कार पार्क करने की पूरी कोशिश की थी, लेकिन इलाके में भारी पुलिस बल की तैनाती और भीषण ट्रैफिक के कारण वह अपने इस नापाक मंसूबे में कामयाब नहीं हो सका। वहां हालात प्रतिकूल देखकर उसने तुरंत गाड़ी मोड़ी और लाल किले की ओर निकल गया।
सीसीटीवी फुटेज से सामने आया 13 मिनट का पूरा सच
जांच एजेंसी को मिले सीसीटीवी फुटेज से इस पूरी साजिश की कड़ियां जुड़ी हैं। फुटेज के मुताबिक 10 नवंबर की शाम 6.37 बजे उमर लाल मंदिर के पास कार खड़ी करने का प्रयास करता दिखा था। वहां से यू-टर्न लेने के ठीक 13 मिनट बाद, यानी शाम 6.50 बजे उसने लाल किले के गेट नंबर चार के समीप कार में जोरदार धमाका कर दिया। एनआईए ने अपनी रिपोर्ट में इसे राजधानी दिल्ली में हुआ पहला वाहन-आधारित आईईडी (व्हीकल-बॉर्न आईईडी) हमला करार दिया है। इस भीषण विस्फोट में 11 मासूमों की जान चली गई, जबकि 29 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। फोरेंसिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ितों की मौत का मुख्य कारण हाई-इंटेंसिटी ब्लास्ट वेव इफेक्ट था। इस हमले से आसपास की इमारतों को लगभग 17.7 लाख रुपये का भारी नुकसान पहुंचा।
जूते की एड़ी में फिट था रिमोट, कमरे को रखता था एकदम ठंडा
आरोपपत्र में हमले के तरीके को लेकर बेहद खौफनाक जानकारियां सामने आई हैं। आतंकी उमर ने आईईडी को ट्रिगर करने के लिए रिमोट कमांड सिस्टम अपने एक जूते की एड़ी में छिपा रखा था। धमाके के बाद कार के पास से मिले जूते के अवशेषों की फोरेंसिक जांच में टीएटीपी, पोटैशियम और अमोनियम नाइट्रेट की पुष्टि हुई है। इसके अलावा कार से मिले जैविक नमूनों का डीएनए उमर के माता-पिता से मैच हो गया, जिससे उसकी मौत और पहचान की आधिकारिक पुष्टि हुई। जांच में यह भी पता चला कि वह खतरनाक विस्फोटक टीएटीपी को सुरक्षित रखने के लिए बेहद सतर्कता बरतता था। वह अपने कमरे का तापमान हमेशा बहुत कम (ठंडा) रखता था और विस्फोटक मिश्रण को स्थिर बनाए रखने के लिए उसमें लगातार पानी डालता रहता था, जिसके लिए उसने विशेष वॉटर बैग भी खरीदे थे।
नूंह के ठिकाने पर अजीब हरकतें और अलकायदा का लिटरेचर
हमले के बाद जब उमर हरियाणा के नूंह में छिपा हुआ था, तब भी उसका व्यवहार बेहद संदिग्ध था। जिस मकान में उसने शरण ली थी, उसकी महिला सदस्य के अनुसार वह शौचालय जाने के बजाय कमरे के भीतर ही पॉलीथिन में पेशाब जमा करता था, जिससे पूरे मकान में असह्य दुर्गंध फैल गई थी। जांच के दौरान एनआईए को यूरिया नाइट्रेट विस्फोटक बनाने का एक दस्तावेज मिला, जिसमें यूरिया प्राप्त करने के साधन के रूप में मानव मूत्र का इस्तेमाल करने की विधि लिखी हुई थी। तलाशी के दौरान आतंकी के पास से ‘लोन मुजाहिद पॉकेट बुक’ नामक खतरनाक सामग्री भी बरामद हुई, जो अलकायदा की इंस्पायर पत्रिका से जुड़ी है। इसमें हथियार, वाहन, आगजनी और आईईडी रिमोट कंट्रोल चलाने की विस्तृत जानकारी दी गई थी। एनआईए के अनुसार, आतंकी ने 7 नवंबर को नूंह की एक दुकान से नकद पैसे देकर नई टी-शर्ट, शराबी रंग की शर्ट और हरे रंग की कार्गो पैंट खरीदी थी, जिसे उसने हमले के समय पहन रखा था।















