UP पंचायत चुनाव पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, 3 महीने में इलेक्शन कराने का आदेश

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने राज्य सरकार के उस शासनादेश को वैध माना है, जिसके तहत ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किया गया था। साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार को तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने और इसके लिए राज्य निर्वाचन आयोग को सभी जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।

जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने पंचायत चुनाव से संबंधित 11 याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। इन याचिकाओं में छह जनहित याचिकाएं भी शामिल थीं। याचिकाकर्ताओं ने समय पर चुनाव कराने और निवर्तमान प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने के सरकार के फैसले को चुनौती दी थी।

25 मई के शासनादेश को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज

याचिकाओं में उत्तर प्रदेश सरकार के 25 मई 2026 के शासनादेश पर सवाल उठाए गए थे। इस शासनादेश के तहत कार्यकाल समाप्त होने के बाद निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मामले में राज्य सरकार, निदेशक पंचायती राज, जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और जिला पंचायती राज अधिकारी को पक्षकार बनाया गया था।

अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल के मुताबिक, हाईकोर्ट ने शासनादेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया। उन्होंने बताया कि जिन याचिकाओं में संबंधित अधिनियम की वैधता को चुनौती दी गई थी, अदालत ने उन आपत्तियों को भी स्वीकार नहीं किया।

अदालत के फैसले के अनुसार, निवर्तमान ग्राम प्रधान प्रशासक के रूप में काम करते रहेंगे। हालांकि, यह व्यवस्था पंचायत चुनाव कराने की प्रक्रिया में अनिश्चितकालीन देरी का आधार नहीं बन सकती। राज्य सरकार को तीन महीने के भीतर चुनाव संपन्न कराने के लिए जरूरी कदम उठाने होंगे।

सरकार को निर्वाचन आयोग को उपलब्ध कराने होंगे संसाधन

हाईकोर्ट ने चुनाव कराने की जिम्मेदारी को लेकर राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग की भूमिका भी स्पष्ट की। सरकार को चुनाव के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने होंगे, ताकि राज्य निर्वाचन आयोग निर्धारित समयसीमा के भीतर चुनाव प्रक्रिया पूरी करा सके।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता इम्तियाज हुसैन, अनिल कुमार, अकबर अंसारी और हेमचंद्र सहित अन्य वकीलों ने पक्ष रखा। याची अधिवक्ता इम्तियाज हुसैन के मुताबिक, अदालत ने राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग को तीन महीने के भीतर चुनाव प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है। उनके अनुसार, कोर्ट ने समयसीमा आगे बढ़ाने की गुंजाइश नहीं छोड़ी है।

ओबीसी आयोग अपना काम जारी रखेगा

पंचायत चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के आरक्षण का मुद्दा भी सुनवाई के दौरान उठा। इससे पहले हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने ओबीसी आयोग की रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया पर असंतोष जताया था। अदालत ने टिप्पणी की थी कि रिपोर्ट जमीनी स्तर पर जाकर तैयार करने के बजाय कार्यालय में बैठकर तैयार की गई प्रतीत होती है।

हालांकि, फैसले में अदालत ने स्पष्ट किया कि ओबीसी आयोग अपना काम जारी रखेगा और उसके कामकाज में बाधा नहीं डाली जाएगी। साथ ही पंचायत चुनाव की प्रक्रिया आयोग के काम पूरा होने पर निर्भर नहीं रहेगी। चुनाव मौजूदा कानूनी ढांचे के तहत कराए जाएंगे।

27 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान का भी मुद्दा

सुनवाई के दौरान पंचायत चुनाव में ओबीसी के लिए निर्धारित 27 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान का भी उल्लेख किया गया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, चुनाव मौजूदा नियमों के तहत कराने की बात कही गई है। आरक्षण से संबंधित अंतिम व्यवस्था और सीटों के निर्धारण के लिए संबंधित नियमों तथा आधिकारिक आदेशों को देखना जरूरी होगा।

हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग के सामने निर्धारित समयसीमा में चुनाव की तैयारियां पूरी करने की जिम्मेदारी है। इसमें चुनाव कार्यक्रम, मतदाता सूची, आरक्षण संबंधी प्रक्रिया और अन्य प्रशासनिक व्यवस्थाएं शामिल होंगी। पंचायत चुनाव की तारीखों और विस्तृत कार्यक्रम की पुष्टि राज्य निर्वाचन आयोग की आधिकारिक अधिसूचना से होगी।

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