नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना (IAF) ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) के दौरान पाकिस्तान को ऐसा जख्म दिया है, जिसे वह कभी नहीं भूल पाएगा। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह (AP Singh) ने पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी देते हुए साफ कर दिया है कि भारतीय वायुसेना के पश्चिमी मोर्चे पर 1,200 किमी चौड़ाई और 200 किमी गहराई तक किए गए सटीक हमलों ने यह साबित कर दिया है कि दुश्मन का कोई भी ठिकाना अब हमारी पहुंच से बाहर नहीं है। एक इंटरव्यू के दौरान एयर चीफ मार्शल ने कहा कि इस ऐतिहासिक ऑपरेशन ने देश के ‘प्राइमरी रिस्पॉन्डर’ (सबसे पहले जवाब देने वाले) और ‘स्ट्रैटेजिक डेटरेंट’ (रणनीतिक रूप से रोकने वाली ताकत) के तौर पर एयर पावर की निर्णायक भूमिका को एक बार फिर सिद्ध कर दिया है।
1971 के बाद सबसे बड़ा सीमा पार हमला, स्वदेशी हथियारों ने मचाई तबाही
पिछले साल मई में हुए पहलगाम आतंकी हमले के करारे जवाब में शुरू किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आतंकी ढांचे को नेस्तनाबूद कर दिया था। यह 1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के बाद भारत की सबसे बड़ी सीमा पार सैन्य कार्रवाई थी। चार दिन तक चले इस ऑपरेशन की देखरेख करने वाले एयर स्टाफ चीफ ने बताया कि इस दौरान देश में बने स्वदेशी हथियारों और रक्षा उपकरणों ने अभूतपूर्व प्रदर्शन किया और दुश्मन के इलाके में गहराई तक जाकर भारी तबाही मचाई। उन्होंने गर्व से कहा कि इस पूरे अभियान के दौरान भारतीय वायुसेना ने ‘जीरो कोलैटरल डैमेज’ (आम नागरिकों या संपत्ति को बिना किसी नुकसान के) के अपने संकल्प को पूरी तरह निभाया।
पाकिस्तान के ड्रोन और दूर से वार करने वाले हथियार हुए पूरी तरह नाकाम
एयर चीफ मार्शल ने खुलासा किया कि भारत की स्वदेशी रूप से विकसित नेटवर्क-आधारित एयर डिफेंस प्रणाली ने पाकिस्तानी सेना द्वारा भेजे गए भारी मात्रा में ड्रोन्स और स्टैंड-ऑफ वेपन (दूर से मार करने वाले हथियार) को हवा में ही पूरी तरह नाकाम कर दिया। इससे देश ने पूरे आत्मविश्वास के साथ अपने अभियानों को अंजाम दिया। उन्होंने कहा कि वायु, थल, समुद्र, अंतरिक्ष, साइबर और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक क्षेत्रों को एक साथ एकीकृत (Integrate) करने से फैसले बहुत तेजी से लिए गए, जिससे ऑपरेशन का रणनीतिक प्रभाव कई गुना बढ़ गया।
‘हमने जो रास्ता चुना, वह बिल्कुल सही है…’
भविष्य की रणनीतियों पर बात करते हुए एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने दो टूक कहा, “ऑपरेशन सिंदूर ने साबित कर दिया है कि हमने जो रास्ता चुना है, वह बिल्कुल सही है। हम इसे और भी ज्यादा पक्के इरादे के साथ जारी रखेंगे, ताकि अगर देश हमें फिर पुकारे, तो IAF अपनी शर्तों पर, और अधिक तेजी, सटीकता और मजबूती के साथ जवाब दे सके।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि वायुसेना अब केवल अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स के बारे में सोचने के बजाय ‘क्षमता-केंद्रित’ (Capability-centric) सोच पर काम कर रही है, जहां हर विमान, सेंसर और नेटवर्क एक साथ मिलकर अभेद्य सुरक्षा चक्र बनाते हैं।
भविष्य की तैयारियों पर जोर: AI और स्वदेशी उत्पादन पर फोकस
हालांकि वायुसेना प्रमुख ने यह भी कहा कि आधुनिक युद्ध की बदलती जरूरतों को देखते हुए IAF को अपनी युद्धक क्षमता, ISR (खुफिया जानकारी, निगरानी और टोह), इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, काउंटर-यूएएस (ड्रोन-रोधी तकनीक), मजबूत नेटवर्क और AI-आधारित निर्णय लेने वाली प्रणालियों को और अधिक उन्नत करना होगा। इसके साथ ही मजबूत लॉजिस्टिक्स, बुनियादी ढांचे और स्वदेशी उत्पादन के जरिए लंबे समय तक चलने वाले गहन युद्ध अभियानों को जारी रखने की क्षमता विकसित की जा रही है, जिस पर तेजी से काम चल रहा है।



















