
उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में 2007 बैच के आईएएस अधिकारी अभय सिंह का नाम एक बार फिर जबरदस्त सुर्खियों में है। इसकी मुख्य वजह गोरखपुर-फैजाबाद खंड स्नातक/शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मतगणना से ठीक पहले चुनाव आयोग द्वारा उन्हें चुनाव पर्यवेक्षक (Observer) की जिम्मेदारी से हटाया जाना है।
चुनाव आयोग ने अभय सिंह को हटाकर उनकी जगह 2009 बैच के आईएएस अधिकारी प्रकाश बिंदु को नया चुनाव पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। इस अचानक हुए प्रशासनिक फेरबदल के बाद आईएएस अभय सिंह का पुराना रिकॉर्ड और 2019 का बहुचर्चित कथित अवैध खनन घोटाला मामला फिर से चर्चा में आ गया है।
2007 बैच के IAS अभय सिंह का प्रशासनिक सफर और विवाद
आईएएस अभय सिंह 2007 बैच के यूपी कैडर के अधिकारी हैं और वर्तमान में राजस्व परिषद में सदस्य पद पर तैनात हैं। अपने प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान वह बुलंदशहर और फतेहपुर जैसे महत्वपूर्ण जिलों में बतौर जिलाधिकारी (DM) अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
वर्ष 2019 में अभय सिंह का नाम उस समय पूरे देश में चर्चा में आया था, जब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने उत्तर प्रदेश में हुए कथित अवैध खनन घोटाले की जांच के सिलसिले में कई स्थानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की थी। जिस समय सीबीआई ने बुलंदशहर में उनके तत्कालीन आधिकारिक आवास पर छापा मारा था, उस वक्त उनके घर से ₹47 लाख की नकदी बरामद होने की बात सामने आई थी।
क्या था 2012-2016 का कथित अवैध खनन घोटाला मामला?
अवैध खनन का यह पूरा मामला वर्ष 2012 से 2016 के बीच तत्कालीन समाजवादी पार्टी (SP) सरकार के कार्यकाल का है। सीबीआई ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर राज्य में हुए अवैध खनन पट्टों के आवंटन की जांच शुरू की थी। जांच के तहत लखनऊ, फतेहपुर, आजमगढ़, इलाहाबाद, नोएडा, गोरखपुर और देवरिया सहित कई जिलों में छापेमारी की गई थी।
इस जांच की जद में कई दिग्गज आईएएस अधिकारी आए थे, जिनमें बी. चंद्रकला, विवेक और अभय सिंह के नाम प्रमुख रूप से शामिल थे। अभय सिंह पर आरोप लगा था कि फतेहपुर का जिलाधिकारी रहते हुए उन्होंने खनन पट्टों के आवंटन में कथित तौर पर अनियमितताएं और गड़बड़ियां की थीं।
भाजपा के बागी MLC देवेंद्र प्रताप सिंह ने मुख्य चुनाव आयुक्त से की थी शिकायत
गोरखपुर-फैजाबाद स्नातक सीट पर आईएएस अभय सिंह को चुनाव पर्यवेक्षक बनाए जाने पर भाजपा के बागी एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने कड़ा ऐतराज जताया था। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर अभय सिंह को तुरंत इस संवेदनशील जिम्मेदारी से हटाने की मांग की थी।
एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने अपनी लिखित शिकायत में 2019 के सीबीआई छापे और खनन घोटाले का हवाला देते हुए तर्क दिया था कि चुनाव की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अभय सिंह को पर्यवेक्षक पद से हटाया जाना जरूरी है।
चुनाव आयोग का एक्शन: प्रकाश बिंदु बने नए चुनाव पर्यवेक्षक
शिकायत और प्रशासनिक हलचल के बीच चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला लेते हुए अभय सिंह को गोरखपुर-फैजाबाद सीट के चुनाव पर्यवेक्षक पद से मुक्त कर दिया और 2009 बैच के आईएएस अधिकारी प्रकाश बिंदु को यह जिम्मेदारी सौंप दी।
हालांकि, चुनाव आयोग ने यह स्पष्ट रूप से नहीं कहा है कि यह फैसला केवल एमएलसी की शिकायत के आधार पर लिया गया है या नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है। फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम ने यूपी के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में पुरानी फाइलों और विवादों को एक बार फिर से गर्मा दिया है।
















