कानपुर। पांच राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। केंद्रीय चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर के प्रशासनिक अमले को चुनावी तैयारियों में जुटने का फरमान जारी कर दिया है। आयोग की तरफ से पांचों राज्यों के मुख्य सचिवों और मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को पत्र भेजकर प्रशासनिक और पुलिस मशीनरी को पारदर्शी चुनाव के लिए कसने के सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।
30 नवंबर तक हटेंगे गृह-जनपद में जमे और दागी अफसर
चुनाव आयोग के इस कड़े आदेश के बाद लंबे समय से एक ही कुर्सी से चिपके अफसरों में हड़कंप मच गया है। नए निर्देशों के अनुसार, किसी भी जिले में तीन साल या उससे अधिक समय से जमे अधिकारियों का 30 नवंबर से पहले तबादला करना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा जो अधिकारी अपने गृह-जनपद में तैनात हैं, उन्हें भी तत्काल प्रभाव से हटाया जाएगा। यह नियम उन सभी विभागों पर लागू होगा जिनका सीधा संबंध चुनाव प्रक्रिया से होता है, जिनमें पुलिस, प्रशासन, आबकारी और परिवहन विभाग प्रमुख हैं। सूत्रों का कहना है कि किसी पार्टी विशेष के प्रति झुकाव रखने वाले या विवादों में घिरे अफसरों को भी साइडलाइन किया जाएगा। कानपुर की बात करें तो ज्यादातर अफसर समय सीमा के दायरे से बाहर हैं, लेकिन शिकायतों के आधार पर कुछ गाज गिरना तय माना जा रहा है।
फरवरी में मतदान और मार्च के पहले सप्ताह में आ सकते हैं नतीजे
संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार यूपी की मौजूदा 18वीं विधानसभा का कार्यकाल 22 मई 2027 को समाप्त हो रहा है, हालांकि अन्य चार राज्यों (गोवा, मणिपुर, पंजाब और उत्तराखंड) की विधानसभाओं का कार्यकाल मार्च के मध्य में ही खत्म हो रहा है। ऐसे में चुनाव आयोग सभी पांचों राज्यों में एक साथ फरवरी के महीने में ही मतदान कराने की योजना बना रहा है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, 403 सीटों वाली यूपी विधानसभा के लिए इस बार पांच चरणों में वोट डाले जा सकते हैं। वहीं पंजाब में दो चरणों में और गोवा, उत्तराखंड तथा मणिपुर में एक ही चरण में मतदान कराने की तैयारी है। पूरी चुनावी प्रक्रिया के बाद मार्च के पहले सप्ताह में वोटों की गिनती होने की प्रबल संभावना है।
भाजपा ने बनाई ‘जॉइनिंग कमेटी’, सपा-कांग्रेस में अब भी सीट शेयरिंग पर सस्पेंस
चुनावी आहट मिलते ही भारतीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीतिक बिसात बिछाना शुरू कर दिया है। विरोधी दलों के बड़े क्षत्रपों और जिताऊ नेताओं को अपने साथ लाने के लिए भाजपा ने एक विशेष ‘जॉइनिंग कमेटी’ का खाका तैयार कर लिया है, जिसमें वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। साथ ही बूथ स्तर पर जिला कमेटियों को एक्टिव कर दिया गया है। दूसरी ओर, सपा और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे की गुत्थी अब तक नहीं सुलझ सकी है। कानपुर की बात करें तो सीसामऊ, आर्यनगर और छावनी सीट पर सपा का दावा मजबूत दिख रहा है, वहीं किदवईनगर, बिठूर और गोविंदनगर जैसी सीटों को लेकर दोनों दलों के बीच पेंच फंसा हुआ है। इसी पसोपेश के चलते विपक्ष का प्रचार अभियान फिलहाल गति नहीं पकड़ पा रहा है।


















