श्रीनगर/नई दिल्ली: 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम की खूबसूरत बैसरन घाटी (जिसे मिनी स्विट्जरलैंड भी कहा जाता है) में हुए भयावह आतंकी हमले की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। जांच से स्पष्ट हुआ है कि यह हमला न केवल सीमा पार से प्रायोजित था, बल्कि स्थानीय स्तर पर मामूली लालच और चुप्पी ने इस नरसंहार को अंजाम देने में आतंकियों की मदद की।
3000 रुपये के लिए आतंकियों को पनाह
NIA की जांच के अनुसार, पहलगाम के दो स्थानीय निवासियों— परवेज अहमद जोथड और बशीर अहमद जोथड ने महज 3000 रुपये के बदले तीन पाकिस्तानी आतंकियों को अपने घर में पनाह दी थी।
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घटनाक्रम: 21 अप्रैल 2025 की रात, हमले से ठीक पहले ये आतंकी इनके घर पर करीब 5 घंटे ठहरे और वहां खाना खाया।
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गिरफ्तारी: NIA ने इन दोनों को 22 जून 2025 को गिरफ्तार किया था, और वे फिलहाल जेल में हैं।
‘अली भाई’ और TRF का कनेक्शन
NIA की चार्जशीट में इस पूरी साजिश के मास्टरमाइंड का नाम सामने आया है, जिसे आतंकी आपस में “अली भाई” कहकर बुलाते थे।
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पहचान: ‘अली भाई’ की पहचान साजिद जट्ट के रूप में हुई है, जो लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटा संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) का शीर्ष कमांडर है और पाकिस्तान के कसूर का निवासी है।
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हमलावर: हमले में शामिल तीन आतंकी— सुलेमान शाह उर्फ फैसल जट्ट, जिब्रान और हमजा अफगानी— सुरक्षाबलों द्वारा पहले ही मारे जा चुके हैं।
वो चुप्पी जो मौत का पैगाम बनी
जांच में सबसे दुखद पहलू यह सामने आया कि इस बड़े नरसंहार को टाला जा सकता था।
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आतंकियों को देखा: 22 अप्रैल की दोपहर 12:30 बजे (हमले से कुछ देर पहले), परवेज और बशीर ने तीनों आतंकियों को एक बाड़ के पीछे हथियारबंद स्थिति में छिपे देखा था।
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लापरवाही: उन्होंने न तो पुलिस को सूचना दी और न ही वहां मौजूद पर्यटकों को आगाह किया। इसके बजाय, वे चुपचाप अपने घोड़ों के साथ वहां से निकल गए।
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परिणाम: उनकी इस चुप्पी की वजह से आतंकियों ने बेखौफ होकर पिकनिक स्पॉट पर हमला किया, जिसमें धर्म पूछकर 26 निर्दोष लोगों (पर्यटक और गाइड) की हत्या कर दी गई।
पाकिस्तानी साजिश के डिजिटल सबूत
भारतीय खुफिया एजेंसियों ने इस हमले में पाकिस्तान की भूमिका को पुख्ता करने के लिए डिजिटल साक्ष्य जुटाए हैं:
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फेसबुक पोस्ट: हमले के बाद एक पोस्ट वायरल हुई जिसमें हमलावरों को “अपना आदमी” बताया गया। फेसबुक की जांच में इस पोस्ट का लिंक रावलपिंडी और बहावलपुर के पाकिस्तानी मोबाइल नंबरों से मिला।
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ऑपरेशन सिंदूर: इस हमले के जवाब में भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाकर पाकिस्तान को कड़ा सबक सिखाया था।
NIA की कार्रवाई
दिसंबर 2025 में दाखिल चार्जशीट में NIA ने लश्कर-TRF और पाकिस्तान आधारित संचालकों को नामजद किया है। यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि कैसे सीमा पार बैठे आतंकी स्थानीय लोगों के अभाव और लालच का फायदा उठाकर भारत की शांति को भंग करने की साजिश रचते हैं।














