समकालीन लेखन में बदलती संवेदनाएँ और आत्मकथ्य का स्वर
वर्तमान समय का साहित्य एक महत्वपूर्ण बदलाव के दौर से गुजर रहा है। पहले जहाँ लेखन में स्पष्टता, निष्कर्ष और ठोस विचारों को प्राथमिकता दी जाती थी, वहीं अब अनिश्चितता, अधूरापन और व्यक्तिगत अनुभव भी उतनी ही अहम भूमिका निभाने लगे हैं। इस बदलाव को समझने के लिए हर्षदा पाठारे जैसी लेखकीय यात्राएँ एक संदर्भ देती … Read more









