मायावती का बड़ा ऐलान- कहा-इस राज्य में होगा कांग्रेस-बसपा का साथ, गठबंधन का फॉर्मूले हुआ तैयार     

लखनऊ । छत्तीसगढ़ में आगामी चुनाव को देखते हुए कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी आपसी सीटों के बंटवारे पर काम कर रही है। राज्य में कांग्रेस और बसपा मिलकर चुनाव लड़ेंगी। मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश की सभी 90 सीटों पर दोनों दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने पर आम सहमति बन गई है। फिलहाल दोनों के बीच व्यवहारिक गठबंधन को लेकर बातचीत चल रही है। गठबंधन को लेकर सहमति केंद्रीय स्तर पर बनी है जल्द ही इसका औपचारिक ऐलान किया जाएगा।

बसपा ने मांगी ये सीटें

बसपा ने कांग्रेस से सारंगढ़, बेलतरा, तखतपुर, नवागढ़, गुंडरदेही, आरंग, पामगढ़, अकलतरा, चंद्रपुर, बिलाईगढ़, कसडोल, जांजगीर, जैजेपुर सीट मांगी है। लेकिन कांग्रेस पार्टी बीएसपी को उतनी ही सीटें देगी जितना कि बसपा की सीट शेयरिंग है। हालांकि सीटों के तालमेल पर घोषणा होनी अभी बाकी है। ऐसा माना जा रहा है कि दोनों पार्टियां जल्द ही इस विषय में घोषणा करेंगी।

राज्य में 12.8 फीसदी वोटों पर बसपा का कब्जा

राज्य में 12.8 फीसदी वोटों पर बसपा का कब्जा

कांग्रेस को आशंका है कि इन आदिवासी बहुल सीटों पर अजीत जोगी की पार्टी उनके वोट प्रतिशत को कम करेगी। ऐसे में जोगी का काट बसपा ही है, इसलिए प्रदेश संगठन पुरजोर कोशिश के साथ बसपा से गठबंधन करना चाह रहा था। प्रदेश की 12.8 प्रतिशत एससी वोटों पर बसपा का कब्जा है, ऐसे में ये सब वोट कांग्रेस के खाते में जाएंगे। कांग्रेस मानकर चल रही है कि पिछले 2013 के चुनाव में भाजपा-कांग्रेस के बीच हार-जीत का अंतर .07 प्रतिशत था। बसपा के साथ आने से कांग्रेस जीत पक्की मानकर चल रही है।

अक्टूबर में होगा राहुल गांधी का दौरा

बता दें 2019 के विधानसभा और आम चुनावों के लिए कांग्रेस और विपक्षी पार्टियों ने कमर कस ली है। इसी दिशा में राहुल गांधी ने छत्तीसगढ़ कांग्रेस की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई थी। बैठक में उन्होंने कई अहम फैसले लिए। अब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी जांजगीरचापा से अपनी यात्रा की शुरुआत करेंगे। राहुल गांधी का यह दौरा अक्टूबर के दूसरे सप्ताह से शुरू होगा। इस यात्रा में राहुल गांधी के साथ पार्टी के सभी वरिष्ठ नेता भी शामिल होंगे। कांग्रेस के साथ ही बसपा प्रमुख मायावती भी यूपी से बाहर भी अपनी पार्टी का फैलाव करने को बेताब हैं। उनको पता है कि बसपा जब किसी राजनीतिक दल के साथ तालमेल करती है, तो अपना दलित वोट काफी हद तक सहयोगी पार्टी के प्रत्याशी को दिलवाने में सफल रहती हैं। लेकिन सच्चाई यह भी है कि समझौते से खुद बसपा का भी आधार बढ़ता है।

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