ईरान-अमेरिका के बीच राजनयिक रिश्ते पूरी तरह टूटे: तेहरान की ‘महायुद्ध’ की चेतावनी, ट्रंप ने दूतों को वापस बुलाया

वॉशिंगटन/तेहरान। पश्चिम एशिया (Mid-East) में शांति की रही-सही उम्मीदें भी अब धुंधली पड़ती नजर आ रही हैं। ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे बेहद नाजुक राजनयिक संबंध अचानक पूरी तरह टूट गए हैं। इस घटनाक्रम ने पूरे क्षेत्र को एक भीषण युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। इस्लामाबाद में होने वाली महत्वपूर्ण शांति वार्ताओं के विफल होने के बाद दोनों देशों के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है।

इस्लामाबाद वार्ता विफल: ईरान ने बातचीत से किया इनकार

इस ताजा राजनयिक संकट की मुख्य वजह इस्लामाबाद में होने वाली बैठकों के दौरान ईरान का सख्त रुख रहा। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी वार्ताकारों के साथ आमने-सामने बैठने से साफ इनकार कर दिया। तेहरान ने अपने पुराने रुख को दोहराते हुए स्पष्ट किया कि वह अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार की सीधी बातचीत नहीं करेगा। इस अड़ियल रुख ने सुलह के अंतिम दरवाजे भी बंद कर दिए हैं।

“इतिहास का सबसे बड़ा मिसाइल हमला”: ईरान की खुली धमकी

कूटनीतिक बातचीत टूटने के साथ ही तेहरान की भाषा और भी ज्यादा आक्रामक हो गई है। दक्षिण अफ्रीका स्थित ईरानी दूतावास ने एक बेहद चिंताजनक चेतावनी जारी की है। ईरान ने दावा किया है कि उसने इस क्षेत्र में इजरायल और अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के लिए “इतिहास का सबसे बड़ा मिसाइल हमला” तैयार कर लिया है। बयान में कहा गया है कि यदि अमेरिका या इजरायल की ओर से कोई भी संदिग्ध गतिविधि देखी गई, तो ईरान बिना देरी किए इस हमले को अंजाम दे देगा।

ट्रंप का कड़ा पलटवार: “पाकिस्तान यात्रा रद्द, हमारे पास सभी विकल्प खुले”

ईरान के इस रुख पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए घोषणा की कि उन्होंने शांति वार्ता के लिए अपने दूतों की पाकिस्तान यात्रा को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। ट्रंप ने इसे “समय की भारी बर्बादी” करार देते हुए कहा कि ईरान का नेतृत्व पूरी तरह भ्रमित है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अमेरिका के पास अब “सभी विकल्प (All options on the table)” मौजूद हैं, जो सीधे तौर पर सैन्य कार्रवाई का संकेत है।

होर्मुज जलडमरूमध्य और तेल संकट की आशंका

विशेषज्ञों का मानना है कि राजनयिक संबंधों के इस तरह टूटने का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने या मिसाइल हमले की अपनी धमकी पर आगे बढ़ता है, तो कच्चे तेल की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो सकती है, जिससे भारत और चीन जैसे देशों के लिए ऊर्जा संकट खड़ा हो जाएगा।

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