कोरोना पर भारत को मिली बड़ी सफलता, भारत ने विकसित की स्वदेशी एंटीबॉडी टेस्ट किट

भारत में कोरोना की जांच के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी ने स्वदेशी तकनीक पर आईजीजी एलिसा टेस्ट किट को विकसित किया है। इससे मानव शरीर में कोरोना वायरस के एंटीबॉडी की मौजूदगी का पता लगेगा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि यह संक्रमण के संपर्क में आने वाली आबादी के अनुपात की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

चीनी रैपिट टेस्ट किट को भारत कर चुका है प्रतिबंधित
बता दें कि देश में चीन में बने हुए रैपिड टेस्ट किट से कोरोना की जांच को प्रतिबंधित किया जा चुका है। कई राज्यों में चीनी टेस्ट किट से हुई जांच में त्रुटि पाई गई थी। जिसके बाद आईसीएमआर ने इससे राज्यों को जांच न करने की सलाह दी थी।

हैदराबाद की एक प्राइवेट कंपनी ने भी बनाई टेस्ट किट
दो दिन पहले हैदराबाद की एक कंपनी जेनोमिक्स बायोटेक ने सबसे सस्ता टेस्ट किट बनाने का दावा किया था। साथ इस रैपिड किट को लेकर ये भी कहा जा रहा था कि इससे कोई भी खुद से अपने घर पर कोरोना का टेस्ट कर सकता है। कंपनी के मुताबिक एक किट की कीमत सिर्फ 50 से 100 रुपये बीच होगी। जबकि चीन से मंगाई गई रैपिड टेस्ट किट की कीमत 400-600 रुपये थी। खास बात ये है कि आप इस किट से खुद टेस्ट कर सकते हैं।

डीआरडीओ ने नोट संक्रमणमुक्त करने के लिए प्रणाली बनाई
रक्षा मंत्रालय ने रविवार को कहा कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने इलेक्ट्रॉनिक गैजेट, नोट और कागज को सेनेटाइज करने के लिए एक स्वचालित एवं सम्पर्करहित अल्ट्रावायलेट सेनेटाइजेशन कैबिनेट विकसित किया है। डीआरडीओ ने ऐसे समय में यह कदम उठाया है जब देश कोविड-19 से निजात पाने का प्रयास कर रहा है। 


ऐसे करता है काम
डिफेंस रिसर्च अल्ट्रावायलेट सेनेटाइजर (डीआरयूवीएस) प्रणाली कैबिनेट में रखी चीजों पर 360 डिग्री से पराबैंगनी किरणें (अल्ट्रावायलेट रेज) डालता है। एक बार सेनेटाइज (संक्रमणमुक्त) हो जाने पर प्रणाली स्वयं बंद हो जाती है, इसलिए इसे संचालित करने वाले को उपकरण के पास इंतजार करने या खड़े होने की जरूरत नहीं पड़ती।

संपर्क में आए बिना काम करती है प्रणाली
मंत्रालय ने कहा कि इसे डीआरडीओ के रिसर्च सेंटर इमारत (आरसीआई) द्वारा विकसित किया गया है और यह सम्पर्क में आये बिना ही कार्य करता है जो कि इस वायरस के प्रसार के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। मंत्रालय ने कहा कि डीआरयूवीएस को मोबाइल फोन, आईपैड, लैपटॉप, नोट, चेक, चालान, पासबुक, कागज, लिफाफा आदि को संक्रमणमुक्त करने के लिए डिजाइन किया गया है।

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