लखनऊ : कचहरी ब्लास्ट के दो आतंकियों को उम्रकैद

लखनऊ, । लखनऊ, बनारस व फैजाबाद की कचहरी में वर्ष 2007 में हुए बम विस्फोटों में लखनऊ कचहरी में ब्लास्ट करने के दो दोषियों तारिक काजमी और मोहम्मद अख्तर को विशेष न्यायाधीश बबिता रानी ने सोमवार को उम्रकैद और छह-छह लाख रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। इन दोनों को 23 अगस्त को कोर्ट ने राष्ट्रद्रोह, हत्या के प्रयास सम्बन्धी कई मामलों में दोषी ठहराया था। नवम्बर 2007 को दोपहर 1.30 बजे लखनऊ के दीवानी न्यायालय परिसर स्थित बरगद के पेड़ के पास बम विस्फोट हुआ था। इसी दिन वाराणसी, फैजाबाद के दीवानी न्यायालय में हुये बम धमाके में 15 लोगों की मौत हो गई थी।

हूजी और इण्डियन मुजाहिदीन के लिए काम करने वाले आतंकियों तारिक काजमी और मोहम्मद अख्तर ने लखनऊ कचहरी में वारदात को अंजाम दिया था। लखनऊ के अलावा वाराणसी और फैजाबाद में एक ही दिन बम ब्लास्ट हुए तो पूरे प्रदेश की जांच एजेंसिया अलर्ट हो गयीं। ताबड़तोड़ कार्रवाई की गयी और एटीएस और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने 22 दिसम्बर 2007 को दोनों से आतंकियों को चारबाग रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया था। इस मामले में एक अन्य आरोपी खालिद मुजाहिद की 18 मई 2013 में पुलिस अभिरक्षा में मौत हो गई थी। इस बम ब्लास्ट की सुनवाई विशेष न्यायाधीश बबिता रानी की अदालत में हुई।

सरकारी अधिवक्ता पीके श्रीवास्तव ने अदालत को बताया 

कचहरी में बम ब्लास्ट हुआ, लेकिन साइकिल स्टैण्ड पर खड़ी साइकिल में लगा बम फट नहीं सका। पुलिस ने विवेचना के बाद पहली चार्जशीट में कश्मीर निशनी सज्जादुल रहमान तथा मोहम्मद अख्तर के खिलाफ दायर की थी। दूसरी चार्जशीट खालिद मुजाहिद, तारिक काजमी, सज्जादुल रहमान तथा मो. अख्तर के खिलाफ दायर किया था। तीसरी चार्जशीट में मो. तारीक काजमी व खालिद मुजाहिद के खिलाफ दायर की थी, जबकि चौथी व पांचवी चार्जशीट में आरिफ उर्फ अब्दुल कादीर को आरोपी बनाया गया था। इस मामले में सज्जादुल रहमान, तारिक काजमी मो. अख्तर के खिलाफ मुकदमा चला था।

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