
भास्कर समाचार सेवा
किरतपुर। मौलाना मौहम्मद अली जौहर हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट, किरतपुर में मौलाना मौहम्मद अली जौहर का यौम-ए-पैदाइश मनाया गया।
प्रोग्राम की सदारत मौलाना मौहम्मद अली जौहर हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूट, किरतपुर के प्राचार्य डाॅ0 मोहित बंसल ने की। प्रोग्राम का आगाज़ मौ0 ज़ीशान बी0ए0 प्रथम वर्ष के छात्र की तिलावत-ए-कुरान और नमरा बी0एड0 प्रथम वर्ष की छात्रा की नात ए पाक से किया गया। प्रोग्राम की खूबसूरत निजामत डाॅ0 शमशाद हुसैन हिन्दी विभागाध्यक्ष ने की। इस मौके पर महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने मौलाना जौहर की जिंदगी और उनकी वतनी और अदबी खिदमात पर तकरीरे और नज्में पेश कीं। महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ0 मोहित बंसल ने अपने भाषण में कहा कि मौलाना मौहम्मद अली जौहर एक सच्चे देशभक्त, एक बड़े स्वतंत्रता सेनानी, भारत में खिलाफत आंदोलन के रुह-ए-रवाँ, एक बड़े शायर और सबसे बढ़कर अच्छे इंसान थे। उन्होंने उर्दू में हमदर्द और अंग्रेजी में कामरेड नाम के अखबार निकालकर अंग्रेजी हुकूमत को हिला कर रख दिया। हुकूमत खौफ ज़दा हो गई और मौलाना को गिरफ्तार कर लिया। मौलाना मौहम्मद अली जौहर तालीम के दिलदादा और कौम के बहुत बड़े हमदर्द थे। उन्होने तालीम के मेदान मे नुमायाँ काम किये। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की तरक्की के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की। अलीगढ़ में ही उन्होंने 1920 में जामिया मिल्लिया इस्लामिया की बुनियाद रखी। जिसे बाद में दिल्ली मुनतकिल कर दिया गया।
हमारे संवाददाता से वार्ता करते हुए डॉ मोहित बंसल ने कहा कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया भारत का एक बड़ा अल्पसंख्यक विश्वविद्यालय है। हमें मौलाना मौहम्मद अली जौहर की जिंदगी से सबक लेना चाहिए। कार्यक्रम को सफल बनाने में डाॅ0 बेगराज यादव, डाॅ0 अनुज कुमार राजपूत, डाॅ0 चारु बंसल, दानिश परवेज़, निखिल भटनागर, पंकज यादव, उज़मा परवीन, विवेक सिंह, विवेक गुप्ता, रजनी अग्रवाल, बिरेन्द्र सिंह, सायमा सैफी, मौ0 अरशद, मौ0 निशात, अतहर जावेद, शाकिर हुसैन, मौ0 जाहिद, रिज़वाना खान, शुमायला, नेहा रवि, मौ0 फारुक, अन्तिम चैधरी, गुलफ्शा समी, नज़राना, असमा बतूल, दीपक, अब्दुल शाकिर, मौ0 शाहरज़ा, निज़ामुद्दीन, प्रीतम सिंह और मुदस्सिर सुल्तान ने सहयोग किया।













