
Tamil Nadu Temples Mobile Ban : तमिलनाडु के प्रमुख मंदिरों में मंगलवार, 1 सितंबर 2026 से श्रद्धालुओं के लिए मोबाइल फोन से जुड़ा नया नियम लागू हो गया है। राज्य के हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग (HR&CE) ने प्रमुख मंदिरों के अंदर मोबाइल फोन ले जाने पर रोक लगा दी है। यह फैसला मद्रास हाई कोर्ट के पहले दिए गए निर्देशों के आधार पर लागू किया गया है। मंदिर प्रशासन का कहना है कि मोबाइल फोन के जरिए फोटो खींचने, वीडियो बनाने, सेल्फी लेने और सोशल मीडिया के लिए रील्स शूट करने जैसी गतिविधियों से मंदिरों का धार्मिक और शांत वातावरण प्रभावित हो रहा था।
मंदिर के अंदर नहीं ले जा सकेंगे मोबाइल
नए नियम के तहत श्रद्धालुओं को मंदिर परिसर के भीतर मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति नहीं होगी। हालांकि, मोबाइल साथ लेकर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मंदिरों के प्रवेश द्वार के पास जमा काउंटर बनाए गए हैं।
मोबाइल जमा करने के लिए प्रति फोन 5 रुपये का शुल्क लिया जाएगा। फोन जमा करने के बाद श्रद्धालु को रसीद या टोकन दिया जाएगा। दर्शन पूरा होने के बाद इसी रसीद के आधार पर फोन वापस लिया जा सकेगा। यानी श्रद्धालुओं को मोबाइल घर पर छोड़कर आने की अनिवार्यता नहीं है, लेकिन मंदिर में प्रवेश से पहले उसे निर्धारित काउंटर पर जमा करना होगा।
कांचीपुरम के मंदिर में इस तरह हो रही फोन जमा करने की व्यवस्था
कांचीपुरम के प्रसिद्ध देवराजस्वामी-अथी वरदार मंदिर में मंगलवार सुबह 6 बजे से मोबाइल जमा करने की व्यवस्था शुरू कर दी गई। यहां मोबाइल जमा कराने के लिए दो कंप्यूटर ऑपरेटर और दो सहायक कर्मचारियों की तैनाती की गई है।
मोबाइल जमा करते समय श्रद्धालु की फोटो ली जा रही है। साथ ही फोन का मॉडल और मोबाइल नंबर भी रिकॉर्ड किया जा रहा है। इसके बाद श्रद्धालु को पावती दी जाती है। दर्शन के बाद पावती और दर्ज रिकॉर्ड का मिलान करने के बाद मोबाइल वापस किया जाता है।
श्रद्धालुओं को नए नियम की जानकारी देने के लिए मंदिर परिसर, पार्किंग और अन्य प्रमुख स्थानों पर कई भाषाओं में सूचना बोर्ड भी लगाए गए हैं।
मोबाइल पर रोक लगाने की क्या है वजह?
HR&CE के मुताबिक, मंदिरों में मोबाइल फोन का इस्तेमाल बढ़ने के कारण यह कदम उठाया गया है। श्रद्धालु मंदिर परिसर में फोटो और वीडियो बनाने के अलावा सेल्फी तथा सोशल मीडिया के लिए रील्स शूट कर रहे थे। इससे मंदिर के धार्मिक माहौल में व्यवधान पैदा होने के साथ-साथ दूसरे श्रद्धालुओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ता था।
विभाग का मानना है कि मोबाइल फोन को मंदिर के अंदर प्रतिबंधित करने से श्रद्धालु अधिक शांतिपूर्ण तरीके से पूजा और दर्शन कर सकेंगे। साथ ही मंदिर परिसर में फोटो और वीडियो बनाने जैसी गतिविधियों पर भी नियंत्रण रहेगा।
2022 के मद्रास हाई कोर्ट के आदेश से जुड़ा है फैसला
मोबाइल फोन पर यह प्रतिबंध अचानक लागू नहीं किया गया है। HR&CE के अनुसार, यह व्यवस्था 2 दिसंबर 2022 को मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच की ओर से दिए गए निर्देशों के अनुरूप लागू की जा रही है।
यह मामला तिरुचेंदूर स्थित अरुलमिगु सुब्रमणिया स्वामी मंदिर में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग से जुड़ा था। इस संबंध में सीतारामन नाम के व्यक्ति ने जनहित याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मंदिर परिसर में मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर निर्देश दिए थे। इसके बाद HR&CE ने भी मंदिरों में मोबाइल फोन के प्रवेश पर रोक लगाने और श्रद्धालुओं के फोन सुरक्षित रखने के लिए आवश्यक व्यवस्था करने के निर्देश जारी किए थे।
विधानसभा में पहले ही की गई थी घोषणा
तमिलनाडु सरकार की ओर से भी इस फैसले की घोषणा पहले की जा चुकी थी। HR&CE मंत्री रमेश ने विधानसभा में बताया था कि 1 सितंबर से राज्य के प्रमुख मंदिरों में मोबाइल फोन ले जाने पर प्रतिबंध लागू किया जाएगा। अब इस व्यवस्था को मंदिरों में लागू कर दिया गया है।
मंदिर प्रशासन को प्रवेश द्वार और परिसर के बाहर स्पष्ट सूचना बोर्ड लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा पब्लिक एड्रेस सिस्टम यानी लाउडस्पीकर के जरिए भी श्रद्धालुओं को मोबाइल प्रतिबंध की जानकारी दी जाएगी।
सिर्फ फोटो खींचने पर नहीं, फोन ले जाने पर है रोक
यह नियम केवल मंदिर के अंदर फोटो या वीडियो बनाने तक सीमित नहीं है। श्रद्धालुओं को मोबाइल फोन लेकर मंदिर परिसर में प्रवेश करने से ही रोका जाएगा। इसलिए दर्शन के लिए जाने वाले लोगों को मोबाइल पहले निर्धारित काउंटर पर जमा करना होगा।
श्रद्धालुओं को सलाह दी गई है कि वे मंदिर पहुंचने के बाद प्रवेश द्वार पर लगे सूचना बोर्ड को ध्यान से पढ़ें और अपने मोबाइल को निर्धारित काउंटर पर ही जमा करें। फोन जमा करने के बाद मिली पावती या टोकन को संभालकर रखें, क्योंकि दर्शन के बाद मोबाइल वापस लेते समय इसकी जरूरत होगी।














