नई दिल्ली ब्यूरो। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET UG) पेपर लीक घोटाले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने रेणुकाई करियर सेंटर (आरसीसी) के संस्थापक और मुख्य आरोपी शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर को 9 दिनों की सीबीआई हिरासत (CBI Custody) में भेज दिया है। अदालत में सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी ने इस पूरे सॉल्वर गैंग और पेपर लीक नेटवर्क की कड़ियों को आपस में जोड़ने के लिए 10 दिनों की रिमांड मांगी थी।
छापेमारी में मोबाइल से बरामद हुआ लीक प्रश्न पत्र
#WATCH | Delhi: NEET UG Exam Paper leak case | Rouse Avenue court granted 9 days' custody to Shivraj Raghunath Motegaonkar to the CBI.
The CBI sought 10 days' custody of Motegaonkar. https://t.co/gLFMSBvpRx pic.twitter.com/uQLQBGq2YF
— ANI (@ANI) May 18, 2026
सीबीआई ने यह बड़ी कार्रवाई मोटेगांवकर को महाराष्ट्र के पुणे से धर-दबोचने के बाद की है। गिरफ्तारी से पहले जांच एजेंसी ने आरोपी के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की थी। इस दौरान मोटेगांवकर के आवास से जब्त किए गए मोबाइल फोन की शुरुआती जांच में ही नीट यूजी परीक्षा का लीक प्रश्न पत्र और उत्तर बरामद हो गए। सीबीआई का आरोप है कि मोटेगांवकर देशव्यापी स्तर पर प्रश्न पत्र लीक करने और उसे मोटी रकम के बदले परीक्षार्थियों तक पहुंचाने वाले एक बेहद शातिर व संगठित गिरोह का सक्रिय सदस्य है। अदालत में पेश करने से पहले एजेंसी के मुख्यालय में उससे करीब 8 घंटे तक आमने-सामने बिठाकर कड़ी पूछताछ भी की गई थी।
23 अप्रैल को ही लीक हो चुका था पेपर, छात्रों को रटवाए गए ‘हस्तलिखित नोट्स’
सीबीआई द्वारा कोर्ट के समक्ष पेश किए गए केस डायरी के दस्तावेजों में एक बेहद चौंकाने वाला और सनसनीखेज खुलासा हुआ है। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, मोटेगांवकर और इस गिरोह के अन्य मास्टरमाइंड्स को परीक्षा शुरू होने से करीब 10 दिन पहले, यानी 23 अप्रैल को ही मुख्य प्रश्न पत्र और उसके सटीक उत्तर मिल चुके थे।
आरोप है कि सबूत मिटाने की नीयत से मोटेगांवकर ने लीक हुए प्रश्न पत्रों को सीधे बांटने के बजाय छात्रों को ‘हस्तलिखित’ (Handwritten) नोट्स के रूप में उपलब्ध कराया था। इतना ही नहीं, जैसे ही परीक्षा समाप्त हुई, योजना के तहत इन सभी हस्तलिखित नोट्स को तुरंत जलाकर नष्ट कर दिया गया ताकि जांच एजेंसियों के हाथ कोई पुख्ता सबूत न लग सके। सीबीआई अब जब्त किए गए मोबाइल फोन को फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) भेजेगी, ताकि डिलीट किए गए डेटा, व्हाट्सएप चैट्स और कॉल रिकॉर्ड्स को पूरी तरह रिकवर किया जा सके।
लेक्चरर्स का था पूरा नेटवर्क, अब तक 10 गिरफ्तार
इस हाई-प्रोफाइल मेडिकल प्रवेश परीक्षा घोटाले में सीबीआई अब तक कुल 10 मुख्य आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज चुकी है। मोटेगांवकर से पहले इस नेटवर्क से जुड़े कई नामचीन चेहरों और कोचिंग सेंटर्स के शिक्षकों को दबोचा गया है। इसमें केमिस्ट्री के लेक्चरर पीवी कुलकर्णी, बायोलॉजी के लेक्चरर मनीषा मंधारे और दोनों शिक्षकों के बीच कूरियर व मुख्य कड़ी का काम करने वाली मनीषा वाघमारे शामिल हैं।
फिलहाल मनीषा वाघमारे भी सीबीआई की सख्त कस्टडी में है। जांच में सामने आया है कि इन प्रोफेसरों और लेक्चरर्स ने वाघमारे के जरिए चुनिंदा छात्रों को परीक्षा से ठीक पहले सीक्रेट लोकेशंस पर ‘विशेष सत्रों’ (Special Sessions) में बुलाया था, जहां लीक प्रश्न पत्र को रटवाने का पूरा खेल खेला गया था। सीबीआई को उम्मीद है कि मोटेगांवकर से रिमांड के दौरान होने वाली पूछताछ में इस रैकेट के राजनीतिक और प्रशासनिक आकाओं के नामों का भी पर्दाफाश हो जाएगा।















