ऑपरेशन नीलमणि: 8 महीने का पीछा, चरवाहे का भेष और बारिश की रात; ड्रम के पीछे छिपा मिला 1.84 लाख का इनामी ड्रग माफिया सुनील मीणा

 

जयपुर: आठ महीने तक लगातार पीछा, 15 दिनों तक चरवाहे के भेष में घने जंगलों में गुप्त रेकी और फिर एक मूसलाधार बारिश की रात; यह किसी फिल्मी कहानी का हिस्सा नहीं, बल्कि राजस्थान एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) के ‘ऑपरेशन नीलमणि’ की वास्तविक और जांबाज दास्तान है।

राजस्थान पुलिस की इस विशेष टीम ने महीनों की खुफिया तैयारी, धैर्य और सटीक रणनीति का परिचय देते हुए राज्य के सबसे खतरनाक और मोस्ट वांटेड ड्रग माफिया सुनील मीणा को दबोचने में सफलता हासिल की है। पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती 1.84 लाख रुपये के इस इनामी अपराधी तक पहुंचना था, जो कभी अपने घर पर कदम नहीं रखता था और घने जंगलों के भीतर ही अपनी सल्तनत चला रहा था।

इस पूरे ऑपरेशन की सबसे मजबूत और अहम कड़ी एएनटीएफ का वह जांबाज जवान था, जिसने करीब 15 दिन पहले एक चरवाहे का भेष धारण किया और मवेशी चराने के बहाने जंगलों और गांव के रास्तों पर घूमना शुरू किया। इस दौरान उसने सुनील के छिपने के ठिकानों, जंगल की पगडंडियों और उसके स्थानीय नेटवर्क की एक-एक बारीकी जुटाई। रेकी के दौरान यह चौंकाने वाली बात सामने आई कि सुनील बेहद शातिर था और सीधे किसी के संपर्क में नहीं आता था।

वह गांव में रहने वाली अपनी एक महिला परिचित तक एक छोटे बच्चे के माध्यम से संदेश भिजवाता था। जब वह जंगल में होता था, तो उसके गुर्गे एक खास पेड़ पर गुप्त निशान बना देते थे, जहां उसकी पत्नी खाना छोड़ जाती थी और उसके साथी उस भोजन को आगे जंगल में सुनील तक पहुंचाते थे।

इस बेहद जटिल नेटवर्क को ध्वस्त करने का मौका 7 जुलाई की शाम को आया, जब चरवाहे के वेश में मुस्तैद जवान ने देखा कि उस दिन खाना जंगल भेजने के बजाय घर में ही किसी बड़ी दावत जैसी तैयारी चल रही थी। जवान ने तुरंत अंदाजा लगा लिया कि सुनील उस रात अपने घर आने वाला है और उसने बिना वक्त गंवाए एएनटीएफ की टीम को अलर्ट कर दिया। जैसे ही पुलिस ने इलाके की घेराबंदी शुरू की, वैसे ही तेज बारिश होने लगी।

यही आसमानी बारिश पुलिस के लिए सबसे बड़ी मददगार साबित हुई, क्योंकि बारिश के तेज शोर के कारण पुलिस की कदमों की आहट सुनील तक नहीं पहुंच पाई और टीम ने दबे पांव उसके घर में दबिश दे दी। पुलिस को देखकर परिजनों ने पहले तो सुनील के घर में होने से साफ इनकार कर दिया, लेकिन जब गहन तलाशी ली गई तो वह घर के अंदर रखे एक बड़े ड्रम के पीछे रजाई ओढ़कर छिपा हुआ मिला। उसने अपना नाम बदलकर पुलिस को गुमराह करने की आखिरी कोशिश भी की, लेकिन उसकी यह चालाकी धरी की धरी रह गई।

महज 27 वर्ष की उम्र में अपराध का पर्याय बन चुका सुनील मीणा बेहद खतरनाक प्रवृत्ति का तस्कर है। उसने मात्र 15 साल की उम्र में डोडा-चूरा तस्करों की गाड़ियों की एस्कॉर्टिंग से इस काली दुनिया में कदम रखा था और देखते ही देखते वह मध्य प्रदेश और राजस्थान के अंतरराज्यीय ड्रग नेटवर्क का मुख्य चेहरा बन गया।

उसके खिलाफ राजस्थान, मध्य प्रदेश और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) में एनडीपीएस एक्ट, आर्म्स एक्ट, हत्या के प्रयास और धोखाधड़ी जैसे गंभीर अपराधों के 19 से अधिक मामले दर्ज हैं। वह पहले भी कई बार पुलिस टीमों पर सीधी फायरिंग कर फरार हो चुका था। फिलहाल, एएनटीएफ ने उसका मोबाइल फोन जब्त कर लिया है, जिसकी फोरेंसिक जांच से राजस्थान और मध्य प्रदेश में फैले उसके पूरे ड्रग साम्राज्य, वित्तीय लेन-देन और नेटवर्क से जुड़े अन्य बड़े तस्करों के राजफाश होने की पूरी उम्मीद है।

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