नई दिल्ली। देश में तंबाकू और पान मसाला के शौकीनों के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है। केंद्र सरकार अब पर्यावरण और जनस्वास्थ्य की सुरक्षा को लेकर आर-पार के मूड में है। सरकार के रडार पर अब वे छोटे प्लास्टिक पाउच (सैशे) आ गए हैं, जो अक्सर गलियों और सड़कों पर कचरे का मुख्य कारण बनते हैं। जल्द ही आपको अपने पसंदीदा पान मसाले की पैकिंग पूरी तरह बदली हुई नजर आ सकती है, क्योंकि प्लास्टिक और एल्युमिनियम फॉयल के इस्तेमाल पर पूरी तरह नकेल कसने की तैयारी हो चुकी है।
FSSAI ने जारी किया नया ड्राफ्ट, नियमों में होगा बड़ा बदलाव
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने इस दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए ‘खाद्य सुरक्षा और मानक (पैकेजिंग) संशोधन नियम, 2026’ का मसौदा जारी कर दिया है। इस नए नियम के लागू होने के बाद पान मसाला और तंबाकू उद्योग की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी। सरकार का मुख्य उद्देश्य इन उत्पादों की पैकेजिंग से प्लास्टिक को जड़ से खत्म करना है। अब छोटे सैशे पर प्रतिबंध लगने से कंपनियों को अपनी पूरी सप्लाई चेन में बदलाव करना होगा।
प्लास्टिक और चमकीली पन्नियों पर लगेगा पूर्ण प्रतिबंध
नए ड्राफ्ट के प्रावधान इतने कड़े हैं कि अब पान मसाला और गुटखा जैसे उत्पादों को किसी भी प्रकार के प्लास्टिक पैकेट में नहीं बेचा जा सकेगा। इसमें साफ तौर पर कहा गया है कि प्लास्टिक, पॉलीथिन या पीवीसी जैसे सिंथेटिक मटेरियल का उपयोग पैकेजिंग के लिए वर्जित होगा। इसके अलावा, जो उत्पाद अक्सर एल्युमिनियम फॉयल की चमक-धमक वाली पैकिंग में मिलते थे, उन पर भी पाबंदी लगाने का प्रस्ताव है। खास बात यह है कि यह प्रतिबंध केवल बिक्री तक सीमित नहीं है, बल्कि भंडारण (Storage) और वितरण (Distribution) में भी प्लास्टिक के उपयोग को अवैध माना जाएगा।
अब कागज और टिन के डिब्बों में मिलेगा गुटखा
प्लास्टिक पर बैन लगने के बाद कंपनियों को अब इको-फ्रेंडली विकल्पों की ओर मुड़ना होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि कंपनियों को पेपर, पेपर बोर्ड या सेलूलोज़ जैसी प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग करना होगा। इसके अलावा, टिन के कंटेनर और कांच की बोतलों या डिब्बों के इस्तेमाल की अनुमति दी जा सकती है। सरकार का तर्क है कि प्लास्टिक सैशे पर्यावरण के लिए ‘स्लो पॉइजन’ की तरह हैं, जिन्हें डिस्पोज करना लगभग नामुमकिन होता है, जबकि प्राकृतिक सामग्री आसानी से रिसायकल की जा सकती है।
30 दिनों के भीतर मांगे गए सुझाव, जल्द बनेगा कानून
FSSAI ने इस ड्राफ्ट को सार्वजनिक कर दिया है और इस पर आम जनता के साथ-साथ उद्योग जगत के विशेषज्ञों से सुझाव मांगे हैं। इसके लिए 30 दिनों का समय दिया गया है। इन सुझावों और आपत्तियों की समीक्षा करने के बाद सरकार इस मसौदे को कानून का रूप देगी। माना जा रहा है कि इस साल के अंत तक देश में पान मसाला और गुटखा की पैकेजिंग पूरी तरह से प्लास्टिक मुक्त हो जाएगी।














