पश्चिम एशिया में महायुद्ध की आहट! अमेरिका-ईरान की ‘सीक्रेट कूटनीति’ का खुलासा, पाकिस्तान बना मध्यस्थ

पश्चिम एशिया (Mid-East) में जारी भीषण तनाव के बीच एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। अमेरिका और ईरान के बीच पिछले काफी समय से बंद कमरों में चल रही गुप्त कूटनीति का अब पूरी तरह से भंडाफोड़ हो गया है। ईरानी मीडिया द्वारा किए गए एक सनसनीखेज खुलासे के मुताबिक, दोनों महाशक्तियों ने एक-दूसरे के सामने ऐसी सख्त और कड़े नियम-शर्तें रख दी हैं, जिससे उनके बीच का गहरा गतिरोध और खाई साफ नजर आने लगी है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरी सीक्रेट डील में पाकिस्तान दोनों देशों के बीच मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभा रहा है, जिसके जरिए खुफिया प्रस्तावों और शर्तों की अदला-बदली की गई है। मौजूदा हालातों को देखकर साफ है कि दोनों देशों के बीच कभी भी भयंकर सैन्य टकराव शुरू हो सकता है।

अमेरिका की 5 शर्तें: परमाणु कार्यक्रम पर पूर्ण सरेंडर की मांग

ईरानी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन ने बातचीत की मेज पर आगे बढ़ने के लिए ईरान के सामने पांच ऐसी शर्तें रखी हैं, जो ईरान के परमाणु व आर्थिक वजूद पर सीधी चोट करती हैं:

  • यूरेनियम सरेंडर: ईरान को अपना 400 किलोग्राम उच्च संवर्धित (Highly Enriched) यूरेनियम पूरी तरह से अमेरिका को सौंपना होगा।

  • परमाणु केंद्र बंद हों: ईरान को केवल अपना एक परमाणु केंद्र चालू रखने की इजाजत होगी, जबकि बाकी सभी सेंटर्स को तुरंत सील करना पड़ेगा।

  • कोई मुआवजा नहीं: युद्ध और तनाव के कारण हुए भारी आर्थिक नुकसान के लिए अमेरिका ईरान को फूटी कौड़ी भी मुआवजे के रूप में नहीं देगा।

  • फ्रीज फंड पर कैंची: विदेशों में फ्रीज (जब्त) की गई ईरान की कुल संपत्ति का 25 फीसदी हिस्सा अमेरिका अपने पास ही रखेगा, वह ईरान को वापस नहीं मिलेगा।

  • सीजफायर बाद में: औपचारिक बातचीत के पूरी तरह सफल होने और शर्तों को मानने के बाद ही क्षेत्र में युद्धविराम (Ceasefire) लागू किया जाएगा।

ईरान का पलटवार: होर्मुज जलडमरूमध्य पर एकाधिकार की जिद

अमेरिका के इन कड़े प्रस्तावों के आगे घुटने टेकने के बजाय ईरान ने भी अपनी पांच बेहद सख्त और रणनीतिक शर्तें सामने रख दी हैं, जिसने वॉशिंगटन के होश उड़ा दिए हैं:

  • हमलों पर तुरंत रोक: लेबनान में इजरायल द्वारा किए जा रहे हमलों समेत पश्चिम एशिया में जारी तमाम अमेरिकी व इजरायली सैन्य कार्रवाइयों को तुरंत रोका जाए।

  • प्रतिबंधों का खात्मा: ईरान की अर्थव्यवस्था को तबाह करने वाले सभी अंतरराष्ट्रीय और अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों (Sanctions) को पूरी तरह हटाया जाए।

  • नुकसान की भरपाई: युद्ध में ईरान को जो भी नुकसान हुआ है, अमेरिका उसकी पूरी भरपाई (Compensation) करे।

  • स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर संप्रभुता: दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) पर ईरान की पूर्ण संप्रभुता और एकाधिकार को वैश्विक मान्यता दी जाए।

  • कूटनीति की आड़ में धोखा: ईरान का मानना है कि अमेरिकी सरकार बातचीत का ढोंग करके वह सब हासिल करना चाहती है, जो वह जंग के मैदान में नहीं जीत सकी।

ट्रंप की आखिरी चेतावनी, ईरानी सेना बोली- ‘विनाश के लिए तैयार रहो’

इस कूटनीतिक गतिरोध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बेहद सख्त लहजे में ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि ईरान के लिए समय रेत की तरह तेजी से फिसल रहा है। उसे बहुत जल्द अमेरिका की शर्तों पर फैसला लेना होगा, वरना उसे अब तक की सबसे भीषण सैन्य कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए।

अमेरिकी राष्ट्रपति के इस बयान पर पलटवार करते हुए ईरानी सेना ने भी साफ कर दिया है कि वे किसी भी धमकी से डरने वाले नहीं हैं। ईरानी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि अमेरिकी और इजरायली आक्रामक नीतियां ही इस संकट की जिम्मेदार हैं। अगर अमेरिका ने दोबारा क्षेत्र में कोई भी हिमाकत या आक्रामक कदम उठाने की गलती की, तो इस बार ईरान का पलटवार इतना विनाशकारी होगा कि अमेरिका संभाल नहीं पाएगा।

खबरें और भी हैं...

Leave a Comment