गिरगिट की तरह रंग बदलने वाली कांग्रेस और सपा जन्मजात महिला विरोधी….विशेष सत्र से पहले सीएम योगी का विपक्ष पर करारा प्रहार

 

विधानसभा के विशेष सत्र से पहले मुख्यमंत्री ने पत्रकाराें से वार्ता

लखनऊ । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र से पहले कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और इंडी गठबंधन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इन दलों को महिला विरोधी बताते हुए कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम का संशोधन रोकने के उनके आचरण की निंदा के लिए यह विशेष सत्र बुलाया गया है।

मुख्यमंत्री योगी ने विधानसभा सत्र से पहले आज सुबह पत्रकारों से वार्ता की। योगी ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि ये दल जन्मजात महिला-विरोधी हैं। उनकी रग-रग में नारी का अपमान भरा हुआ है। जब भी सपा को प्रदेश में सत्ता मिली, महिलाओं पर अत्याचार और क्रूर घटनाओं ने बर्बरता की सारी हदें पार कर दीं। हर व्यक्ति जानता है कि सपा सरकार के समय ‘देख सफाई, बिटिया घबराई’ जैसे स्लोगन बन गए थे। स्टेट गेस्टहाउस कांड हो या अन्य महिला संबंधी अत्याचार, इनकी छवि जगजाहिर है।

मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर कटाक्ष किया कि इनके पास कालिख मिटाने का अच्छा अवसर था। वे नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक में सहयोग कर अपनी महिला-विरोधी छवि बदल सकते थे, लेकिन उन्होंने यह मौका भी गंवा दिया। अब ये दल लगातार इस मुहिम में लगे हैं कि यह संशोधन और अधिनियम लागू न हो पाए। विपक्ष ने ऐसे प्रयास किए जिनसे प्रदेश और देश में व्यवस्था पर सवाल खड़े हों।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरुवार को पूरे दिन इसी विषय पर चर्चा होगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया जाएगा कि उनके नेतृत्व में महिलाओं को गरिमा, सम्मानजनक स्थान, स्वावलंबन और सशक्तीकरण मिल रहा है। नीति-निर्धारण में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए भाजपा और एनडीए निरंतर आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने शाहबानो प्रकरण से लेकर अब तक के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि विपक्ष हमेशा महिलाओं के आरक्षण के मार्ग में बाधक बना रहा है। गुरुवार की चर्चा में सपा, कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी और अन्य सहयोगी दलों और उनके महिला-विरोधी चरित्र को पूरी तरह एक्सपोज किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने विधानमंडल दल के सभी सदस्यों से अपील की कि वे चर्चा में सक्रिय रूप से भाग लें। उन्होंने सपा और कांग्रेस के सदस्यों से कहा कि अगर इनमें नैतिक साहस है तो चर्चा में भाग लें और स्पष्ट बताएं कि उन्होंने नारी शक्ति वंदन संशोधन विधेयक का विरोध क्यों किया? इस विरोध के पीछे उनकी मंशा क्या थी? मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर उन्हें लगता है कि उनके नेताओं ने गलत किया है तो इनका दायित्व है कि वे माफी मांगें या निंदा प्रस्ताव को पारित करवाकर महिला-विरोधी आचरण की निंदा के भागीदार बनें। उन नेताओं की जरूर निंदा की जानी चाहिए, जिन्होंने आधी आबादी को राजनीतिक सशक्तीकरण और आरक्षण के लाभ से वंचित रखा।

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