बीजिंग। कूटनीति के वैश्विक मंच पर बुधवार को एक ऐतिहासिक अध्याय शुरू हुआ, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बेहद महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलन के लिए चीन पहुंचे। साल 2017 के बाद यह पहला मौका है जब कोई अमेरिकी राष्ट्रपति चीन की राजकीय यात्रा पर है। लगभग 8 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद किसी अमेरिकी राष्ट्राध्यक्ष का बीजिंग पहुंचना दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब ईरान युद्ध और वैश्विक व्यापारिक समीकरणों ने पूरी दुनिया में तनाव पैदा कर रखा है।
( @realDonaldTrump – Truth Social Post )
( Donald J. Trump – May 12 2026, 11:09 PM ET )CNBC incorrectly reported that the Great Jensen Huang, of Nvidia, was not invited to the incredible gathering of the World’s Greatest Businessmen/women proudly going to China. In actuality,… pic.twitter.com/g7tPK1KKCm
— Fan Donald J. Trump 🇺🇸 TRUTH POSTS (@TruthTrumpPosts) May 13, 2026
ईरान संकट सुलझाने में चीन की मदद चाहते हैं ट्रंप
ट्रंप की इस यात्रा के पीछे सबसे बड़ा एजेंडा ईरान युद्ध को रोकना या कम से कम होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खुलवाना है। ट्रंप पिछले कई हफ्तों से बीजिंग पर इस बात के लिए दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं कि वह तेहरान (ईरान) को युद्ध समाप्त करने के लिए राजी करे, लेकिन अब तक उन्हें इसमें सफलता नहीं मिली है। वाशिंगटन से रवाना होते समय ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वह राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ ईरान के मुद्दे पर ‘लंबी और गहन बातचीत’ करेंगे, क्योंकि चीन, ईरान के तेल का सबसे बड़ा खरीदार है।
#WATCH | Beijing: US President Donald Trump lands in China for a high-stakes summit with Chinese President Xi Jinping.
(Video Source: US Network Pool via Reuters) pic.twitter.com/L5o9iVvAQh
— ANI (@ANI) May 13, 2026
शी जिनपिंग से ट्रंप की गुजारिश: ‘चीन को खोलें’
बीजिंग पहुंचने से पहले ही ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक दिलचस्प पोस्ट साझा की। उन्होंने लिखा:
“मैं असाधारण प्रतिभा के धनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से चीन को ‘खोलने’ का अनुरोध करूंगा ताकि वहां के प्रतिभाशाली लोग अपना जादू चला सकें और पीपुल्स रिपब्लिक को और भी उच्च स्तर पर ले जा सकें। मैंने आज तक ऐसा कोई विचार नहीं देखा जो हमारे दोनों अद्भुत देशों के लिए इससे अधिक लाभकारी हो।”
ताइवान और व्यापार पर भी होगी आर-पार की बात
सिर्फ ईरान ही नहीं, बल्कि ट्रंप के झोले में ताइवान और व्यापारिक विवादों के मुद्दे भी प्रमुखता से शामिल हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन द्वारा ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री के विरोध और अमेरिका द्वारा लगाए गए व्यापारिक प्रतिबंधों पर दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस हो सकती है। यह शिखर सम्मेलन न केवल अमेरिका-चीन संबंधों की दिशा तय करेगा, बल्कि विश्व शांति और विकास की भविष्य की रूपरेखा भी तैयार करेगा।
दो महाशक्तियों के बीच ‘शक्ति प्रदर्शन’
दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ट्रंप अपनी ‘डील मेकिंग’ कला से शी जिनपिंग को ईरान के मोर्चे पर पीछे हटने या सहयोग करने के लिए मना पाएंगे। अगर यह बातचीत सफल रहती है, तो वैश्विक ऊर्जा सप्लाई में आ रही बाधाएं दूर हो सकती हैं और मिडिल ईस्ट में जारी तनाव कम हो सकता है।














