
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए भले ही करीब छह महीने का समय बाकी हो, लेकिन विपक्षी गठबंधन (INDIA ब्लॉक) के भीतर सीटों के गणित को लेकर शह-मात का खेल तेज हो चुका है। लोकसभा चुनाव 2024 की सफलता से उत्साहित कांग्रेस प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों में से 105 सीटों पर दावेदारी ठोक रही है, जबकि समाजवादी पार्टी (सपा) अपने आंतरिक सर्वे के आधार पर कांग्रेस को केवल 60 से 70 सीटें देने के पक्ष में है।
सपा की रणनीति: सीटों की संख्या नहीं, केवल ‘जीत की संभावना’ मुख्य आधार
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव स्पष्ट कर चुके हैं कि गठबंधन में सीटों की संख्या से ज्यादा महत्व प्रत्याशी और पार्टी की जीत की संभावना (Winnability) का है। सपा की अंदरूनी टीम हर विधानसभा सीट के जातीय समीकरण, पार्टी के मजबूत स्थानीय कैडर और 2022 के विधानसभा प्रदर्शन की समीक्षा कर रही है। सपा का तर्क है कि 2017 में कांग्रेस को 105 सीटें दी गई थीं, लेकिन वह सिर्फ 7 सीटें ही जीत पाई थी, इसलिए पुराने आंकड़ों के बजाय आज के धरातल को देखकर ही फैसला होगा।
कांग्रेस का दावा: 2017 का फॉर्मूला और लोकसभा का बढ़ा जनाधार
दूसरी ओर, कांग्रेस अपनी दावेदारी 2017 के गठबंधन और 2024 के लोकसभा चुनावों में मिले मजबूत समर्थन को आधार बनाकर पेश कर रही है। कांग्रेस का मानना है कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा और संविधान बचाओ अभियान के बाद राज्य में उसके कैडर और पारंपरिक दलित व मुस्लिम मतदाताओं में नया उत्साह आया है। कांग्रेस ने रायबरेली, अमेठी, कानपुर, प्रयागराज, लखनऊ, वाराणसी, सहारनपुर और गाजियाबाद समेत करीब 19 जिलों की प्रमुख सीटों पर अपनी दावेदारी पेश की है।
इन मुख्य वजहों से फंसा है सीट बंटवारे का पेच
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अमेठी और रायबरेली का गणित: कांग्रेस इन दोनों जिलों की सभी विधानसभा सीटों पर अपना स्वाभाविक हक मानती है, जबकि 2022 में सपा ने रायबरेली की 4 और अमेठी की 2 सीटों पर जीत दर्ज की थी। सपा यहां कांग्रेस को 1-1 सीट देने के मूड में है।
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शहरी सीटों पर दांव: सपा चाहती है कि कांग्रेस लखनऊ, कानपुर, आगरा, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर और मेरठ जैसी उन शहरी और अर्बन सीटों पर चुनाव लड़े, जहां भाजपा पारंपरिक रूप से मजबूत है। हालांकि कांग्रेस ग्रामीण सीटों पर भी अपना दावा नहीं छोड़ना चाहती।
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उम्मीदवारों का ब्योरा: सपा ने कांग्रेस से सभी संभावित सीटों पर दावेदारों के नाम, उनकी जमीनी पकड़ और स्थानीय संगठन का पूरा ब्योरा मांगा है, ताकि किसी भी प्रकार का भितरघात न हो।












