एक और बड़ा हादसा: गाजियाबाद में गिरी 5 मंजिला निर्माणाधीन इमारत, कई मजदूर दबे

नोएडा के शाहबेरी के बाद गाजियाबाद में बिल्डिंग गिरने से बड़ा हादसा हो गया है. गाजियाबाद के मिसलगढ़ी में रविवार को 5 मंजिला एक निर्माणाधीन इमारत ढह गई. निर्माणाधीन इमारत के मलबे में काम कर रहे करीब 8 से 10 मजदूरों के दबे होने की आशंका है.

बचाव टीम ने स्थानीय लोगों की मदद से हादसे के तुरंत बाद 4 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है. गाजियाबाद SSP ने कहा, इस हादसे में एफआईआर दर्ज होगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी.

घटना के बाद एनडीआरएफ और पुलिस की टीमों ने मौके पर पहुंचकर बचाव अभियान शुरू कर दिया है. बीते दो दिनों से दिल्ली-एनसीआर में लगातार बारिश हो रही है. इस वजह से बचाव कार्य में दिक्कत आ रही है.

बता दें, इससे पिछले हफ्ते नोएडा के शाहबेरी में दो बिल्डिंग गिर गईं थी. बचाव टीम ने करीब 4 दिन तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर 10 लोगों के शव बाहर निकाले थे.

चेन्नई में निर्माणाधीन इमारत गिरी

एक दिन पहले चेन्नई के कंडानचावड़ी इलाके में एक निर्माणाधीन इमारत गिर गई थी. इस हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि 17 लोगों के घायल हुए. NDRF के पर्सनल असिटेंट कमांडेंट विनोज ने बताया कि रेस्क्यू ऑपरेशन खत्म हो गया है, इसमें टीम के 61 लोग शामिल थे और मलबे से 23 लोगों को निकाला गया है. घायल लोगों को अस्पताल पहुंचा गया.

कभी भी गिर सकती है ग्रेटर नोएडा की 13 मंजिला इमारत

ग्रेटर नोएडा के पॉश सेक्टर बीटा-2 में नई बिल्डिंग बनाने के लिए की गई गहरी खुदाई और उसमें जमे पानी की वजह से पास की 13 मंजिला बिल्डिंग पर खतरा मंडराने लगा है. बिल्डिंग की दीवार में दरार आ गई हैं. 13 मंजिला बिल्डिंग कभी भी गिर सकती है.

बारिश के पानी और बिल्डर की मनमानी से 180 परिवारों की जिंदगी को खतरे में डाल दिया है. ग्रेटर नोएडा के सेक्टर बीटा-2 की स्पार्क डिवाइन में रहनेवाले लोगों की नींद सोसाइटी के ठीक बगल में खोदे गए 25 फीट गहरे गड्ढे के कारण गायब हो गई है. ऐसे में यहां के 20 परिवार अपना फ्लैट खाली कर सुरक्षित जगहों पर चले गए हैं.

बता दें कि गड्ढे से  ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी का दफ्तर महज 500 मीटर की दूरी पर है. थाना और भी पास है, लेकिन किसी ने भी इस बड़े खतरे और खुदाई की ओर ध्यान नहीं दिया. हालांकि, लोगों के विरोध के बाद ग्रेटर नोएडा प्रशासन एक्शन में आया है. पानी को निकालने के लिए पंप लाया गया. गड्ढे को भरने का काम भी शुरू हो गया. लेकिन, सवाल उठता है कि ग्रेटर नोएडा प्रशासन को ये गड्ढा और इससे पैदा होनेवाला खतरा पहले क्यों नहीं दिखा.

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