वाशिंगटन/नई दिल्ली। वैश्विक मंच से इस वक्त की सबसे बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। जिस ऐतिहासिक शांति समझौते का इंतजार पूरी दुनिया बेसब्री से कर रही थी, आखिरकार उस पर मुहर लग गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आधिकारिक ऐलान करते हुए बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर पूर्ण सहमति बन गई है। ट्रंप की इस अप्रत्याशित घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में भूचाल आ गया है और कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में जोरदार गिरावट दर्ज की गई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने न सिर्फ शांति समझौते की पुष्टि की, बल्कि सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (Hormuz Strait) को भी तुरंत खोलने का आदेश दे दिया है। इस फैसले के आते ही वैश्विक तेल बाजार के कारोबारियों में भारी बिकवाली का दौर शुरू हो गया।
ट्रंप का ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट: ‘जहाजों अपने इंजन चालू करो, तेल बहने दो’
ईरान के साथ हुए इस महासमझौते की जानकारी खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट के जरिए दी। ट्रंप ने बेहद आक्रामक और उत्साहजनक शैली में लिखा, “इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ डील अब पूरी हो गई है। सभी को बधाई! मैं होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी शुल्क के खोलने की पूरी मंजूरी देता हूं और साथ ही, अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी को तुरंत हटाने का भी आदेश देता हूं। दुनिया भर के जहाजों, अपने इंजन चालू करो। तेल का प्रवाह शुरू होने दो!” ट्रंप के इस एक बयान ने वैश्विक व्यापार जगत को बड़ी संजीवनी दे दी है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल क्रैश, ब्रेंट और WTI औंधे मुंह गिरे
ट्रंप के इस ऐतिहासिक कदम और होर्मुज स्ट्रेट को तुरंत खोलने के ऐलान का असर सीधे कच्चे तेल के बाजार पर दिखाई दिया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ताश के पत्तों की तरह बिखर गईं। सोमवार को शुरुआती कारोबार में ही वैश्विक मानक माना जाने वाला ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) 3.5 प्रतिशत से अधिक की भारी गिरावट के साथ 83.48 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड में करीब 5 प्रतिशत की बड़ी टूट देखी गई और यह लुढ़ककर 80.61 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह गिरावट और बढ़ सकती है।
युद्ध के कारण 120 डॉलर तक पहुंच गया था तेल, अब सप्लाई चेन होगी सामान्य
आपको बता दें कि इस साल फरवरी के अंत में ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल के युद्ध की शुरुआत हुई थी, जिसके बाद वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आग लग गई थी। युद्ध शुरू होने से पहले जो ब्रेंट क्रूड 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास शांति से कारोबार कर रहा था, वह तनाव बढ़ने के कारण एक समय 120 डॉलर प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर को छू गया था। पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में बढ़े इस तनाव की वजह से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ को बंद करना पड़ा था। गौरतलब है कि दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है। अब हॉर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) के पूरी तरह सामान्य होने की उम्मीद जगी है, जिससे भारत सहित तमाम एशियाई देशों को खाड़ी क्षेत्र से तेल आयात करने में बड़ी सहूलियत मिलेगी।
ओपेक का फैसला और हॉर्मुज का खुलना: दोहरे असर से बाजार में मंदी
आर्थिक विश्लेषकों के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में आई इस ऐतिहासिक गिरावट की सबसे बड़ी और मुख्य वजह हॉर्मुज स्ट्रेट का दोबारा खुलना ही है। हालांकि, इसके पीछे एक और बड़ा कारण भी काम कर रहा है। इसी महीने पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन ओपेक (OPEC) ने जुलाई से कच्चे तेल का उत्पादन कोटा बढ़ाने की घोषणा की थी। ओपेक के इस फैसले से बाजार में पहले से ही आपूर्ति बढ़ने के संकेत मिल रहे थे और अब इस शांति समझौते ने आग में घी का काम किया है, जिससे तेल की कीमतें तेजी से नीचे आ रही हैं।
आम जनता को बड़ी राहत की उम्मीद: क्या सस्ते होंगे पेट्रोल, डीजल और LPG?
पिछले लंबे समय से कच्चे तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में 100 से 115 डॉलर प्रति बैरल के बेहद ऊंचे स्तर पर टिकी हुई थीं। इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा था और दुनिया भर में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी (LPG) सहित अन्य पेट्रोलियम उत्पादों के दाम आसमान छू रहे थे। हालांकि, पिछले कुछ दिनों से कीमतों में मामूली सुधार हुआ था और यह 90 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आई थीं, लेकिन इस ताजा शांति समझौते और समुद्री मार्ग खुलने की खबर ने गिरावट की रफ्तार को चार गुना बढ़ा दिया है। इस बड़ी गिरावट के बाद अब भारत के करोड़ों मध्यमवर्गीय परिवारों और उपभोक्ताओं में यह उम्मीद जाग गई है कि आने वाले दिनों में घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस (LPG) की कीमतों में बड़ी कटौती देखने को मिल सकती है, जिससे सीधे तौर पर महंगाई से बड़ी राहत मिलेगी।















