जंग खत्म होते ही शेयर बाजार में दीवाली: सेंसेक्स 1100 अंक उछला, निफ्टी 24 हजार के करीब; कच्चा तेल टूटने से निवेशकों ने कमाए अरबों रुपये

मुंबई/नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही 107 दिनों की भीषण जंग खत्म होने की खबर ने न सिर्फ वैश्विक राजनीति, बल्कि दुनिया भर के वित्तीय बाजारों की सूरत बदल दी है। दोनों देशों के बीच हुए ऐतिहासिक शांति समझौते और कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई भारी गिरावट के बाद वैश्विक निवेशकों का भरोसा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। इस महा-राहत का सीधा और दमदार असर भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) पर देखने को मिला है। आज यानी 15 जून को सप्ताह के पहले कारोबारी दिन दलाल स्ट्रीट ने तूफानी शुरुआत की। शुरुआती कारोबार में ही बीएसई (BSE) सेंसेक्स 1100 अंकों से ज्यादा उछल गया, जबकि एनएसई (NSE) निफ्टी में भी रिकॉर्ड तोड़ तेजी देखी जा रही है। ग्लोबल मार्केट से मिल रहे मजबूत और सकारात्मक संकेतों ने भारतीय निवेशकों का जोश हाई कर दिया है।

बाजार खुलते ही सेंसेक्स-निफ्टी में आया भूचाल, निवेशकों की चांदी

अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिल रही खुशखबरी के बीच सोमवार सुबह जैसे ही घरेलू शेयर बाजार खुला, वैसे ही चारों तरफ सिर्फ और सिर्फ खरीदारी का बोलबाला रहा। सुबह करीब 9:17 बजे बीएसई सेंसेक्स 1,154.98 अंक यानी 1.53 फीसदी की भारी-भरकम तेजी के साथ 76,682.94 के ऐतिहासिक स्तर पर कारोबार करता दिखा। वहीं, कुछ ही मिनटों बाद सुबह 9:18 बजे निफ्टी 50 इंडेक्स भी 341.30 अंक यानी 1.44 फीसदी की बढ़त के साथ 23,964.20 के स्तर पर पहुंच गया। निफ्टी अब 24,000 के बेहद करीब है। बाजार में शुरुआती मिनटों से ही जारी इस चौतरफा लिवाली ने यह साफ कर दिया है कि मंदी और अनिश्चितता के बादल पूरी तरह छंट चुके हैं।

चौतरफा खरीदारी से बाजार में रौनक, सभी सेक्टर्स में छाई हरियाली

भारतीय शेयर बाजार के ब्रॉडर मार्केट्स में इस वक्त उत्सव जैसा माहौल है। बड़े शेयरों के साथ-साथ मझोले और छोटे शेयरों में भी निवेशक जमकर पैसा लगा रहे हैं। बाजार खुलने के साथ ही निफ्टी मिडकैप 100 (Nifty Midcap 100) और निफ्टी स्मॉलकैप 100 (Nifty Smallcap 100) इंडेक्स 1.3-1.3 फीसदी की शानदार बढ़त के साथ दौड़ लगा रहे हैं। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के तमाम सेक्टोरल इंडेक्स पूरी तरह हरे निशान में रंगे हुए हैं। सेंसेक्स, मिडकैप, स्मॉलकैप से लेकर बैंकिंग, आईटी और ऑटो इंडेक्स तक में 1.3% से लेकर 2% से ज्यादा का तूफानी उछाल दर्ज किया जा रहा है, जो बाजार में चौतरफा हरियाली को दर्शाता है।

अमेरिका-ईरान महासमझौते ने बदली हवा, वैश्विक तनाव हुआ कम

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि दलाल स्ट्रीट पर आई यह ऐतिहासिक तेजी पूरी तरह से अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म होने के समझौते से प्रेरित है। लंबे समय से चल रहे इस तनाव के कारण एनर्जी मार्केट (ऊर्जा बाजार) और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह चरमरा गई थी। अब दोनों देशों के बीच शांति बहाली से भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tension) खत्म हो गया है, जिससे एनर्जी मार्केट पर से दबाव पूरी तरह हट गया है। यही वजह है कि निवेशकों को अब आने वाले समय में वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़ी मजबूती की उम्मीद दिख रही है, जिसका असर हर तरफ देखने को मिल रहा है।

एशियाई बाजारों में भी दिखा जबरदस्त जोश, निक्केई और कोस्पी में बंपर उछाल

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम की खबर का असर केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरे एशिया-पैसिफिक क्षेत्र के शेयर बाजारों पर देखने को मिल रहा है। आज सुबह से ही तमाम एशियाई बाजारों में जबरदस्त तेजी का रुख है:

  • जापान का निक्केई (Nikkei): इंडेक्स 4.68 फीसदी की भारी बढ़त के साथ 69,108.03 के स्तर पर पहुंच गया।

  • दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi): 5.64 फीसदी के रिकॉर्ड तूफानी उछाल के साथ 8,581.47 पर कारोबार करता दिखा।

  • ऑस्ट्रेलिया का ASX 200: इंडेक्स भी 1.44 फीसदी चढ़कर 8,930.6 के स्तर पर पहुंच गया।

  • सिंगापुर का STI और न्यूजीलैंड का NZX 50: दोनों ही क्रमशः 0.76% और 0.28% की मजबूती के साथ हरे निशान में कारोबार कर रहे हैं।

ट्रंप के एक ऐलान से 84 डॉलर के नीचे फिसला ब्रेंट क्रूड, भारतीय इकोनॉमी को डबल फायदा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रविवार देर रात सोशल मीडिया पर शांति समझौते की पुष्टि किए जाने और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ द्वारा शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में होने वाले आधिकारिक हस्ताक्षर की बात दोहराने के बाद कमोडिटी मार्केट में बड़ा क्रैश आया है। युद्ध खत्म होने की घोषणा के बाद कच्चे तेल की कीमतें औंधे मुंह गिर गई हैं। जुलाई डिलीवरी वाले WTI क्रूड फ्यूचर्स 4.77 फीसदी गिरकर 80.83 डॉलर प्रति बैरल पर आ गए हैं। वहीं, भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाने वाला ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) करीब 4 फीसदी टूटकर 83.77 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। ब्रेंट क्रूड का 84 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए किसी बूस्टर डोज से कम नहीं है, क्योंकि इससे देश का आयात बिल घटेगा और महंगाई पर लगाम लगेगी।

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