भारत में 5 और वैक्सीन करेंगी कोरोना का मुकाबला, रूस की स्पुतनिक-V को 10 दिन में मिल सकता है अप्रूवल

कई राज्यों में कोरोना की वैक्सीन की कमी के बीच केंद्र सरकार इनका प्रोडक्शन बढ़ाने पर जोर दे रही है। साथ ही नई वैक्सीन को मंजूरी देने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। सबसे पहले रूस की स्पुतनिक-V को इमरजेंसी यूज के लिए अप्रूवल मिल सकता है। अगले 10 दिन में इस पर फैसला होने की उम्मीद है। सरकार के सूत्रों के मुताबिक, इस साल अक्टूबर तक भारत में 5 नई वैक्सीन मिलने लगेंगी।

भारत में इस समय कोवीशील्ड और कोवैक्सिन का इस्तेमाल हो रहा है। एक्स्ट्रा डोज का इंतजाम करने के लिए सरकार रणनीति बदल रही है। इसके लिए नई वैक्सीन को मंजूरी दी जाएगी। इनमें डॉ. रेड्‌डीज के साथ साझीदारी वाली स्पुतनिक-V, अमेरिकी कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन, नोवावैक्स वैक्सीन (सीरम इंडिया), जाइडस कैडिला और भारत बायोटेक की इंट्रानैजल वैक्सीन शामिल हैं।

20 वैक्सीन अलग-अलग ट्रायल फेज में
देश में नई वैक्सीन को अप्रूवल देते समय सरकार सेफ्टी और एफिकेसी को प्राथमिकता दे रही है। इस समय लगभग 20 वैक्सीन अलग-अलग क्लीनिकल और प्री-क्लीनिकल स्टेज में हैं। इनमें स्पुतनिक-V को सबसे पहले मंजूरी मिल सकती है।

रशियन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट फंड ने इस वैक्सीन के प्रोडक्शन के लिए हैदराबाद की डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, हेटेरो बायोफार्मा, ग्लैंड फार्मा, स्टेलिस बायोफार्मा और विच्रो बायोटेक जैसी भारतीय कंपनियों के साथ करार किया है। देश में 8.5 करोड़ डोज की प्रोडक्शन कैपेसिटी के साथ स्पुतनिक-V कोरोना से लड़ाई में बड़ी मददगार साबित होगी।

सरकार का प्रोडक्शन बढ़ाने पर जोर
एक सूत्र ने बताया कि यह वैक्सीन जून की शुरुआत में मिलने की उम्मीद है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन अगस्त तक उपलब्ध हो जाएगी। कैडिला जाइडस भी अगस्त तक मिलने लगेगी। सितंबर तक नोवावैक्स और अक्टूबर तक नैजल वैक्सीन का इस्तेमाल शुरू हो सकता है। सरकार रिसर्च, डेवलपमेंट, और क्लीनिकल ट्रायल के फेज में किसी भी तरह की कटौती के बिना इनकी प्रोसेस में तेजी लाने के लिए सभी कोशिशें कर रही है।

भारत में वैक्सीन का प्रोडक्शन और उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार सभी कदम उठा रही है। इसके लिए हाई लेवल पर फैसला लिया गया है कि घरेलू कंपनियों को प्रोडक्शन कई गुना बढ़ाने में मदद करने के लिए सभी कदम उठाए जाएं। सूत्रों के मुताबिक, सरकार चाहती है कि भारत दुनिया की फार्मेसी बना रहे और भारतीयों तक दुनिया की अच्छी क्वालिटी वाले टीकों की समान पहुंच हो।

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