चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति इस वक्त किसी सस्पेंस फिल्म से कम नहीं लग रही है। सुपरस्टार विजय की पार्टी टीवीके (TVK) 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी तो बन गई है, लेकिन सत्ता की कुर्सी तक पहुंचने का रास्ता कांटों भरा साबित हो रहा है। बहुमत के जादुई आंकड़े (118) से दूर विजय को अब अपनों और बेगानों, दोनों की तरफ देखना पड़ रहा है। इस बीच सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि क्या विजय को रोकने के लिए सूबे के दो धुर विरोधी—डीएमके (DMK) और अन्नाद्रमुक (AIADMK)—एक साथ आ सकते हैं?
राजभवन में अटका शपथ ग्रहण, राज्यपाल नहीं हुए संतुष्ट
विजय ने बुधवार को राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मुलाकात कर 112 विधायकों का समर्थन पत्र सौंपा था। विजय को उम्मीद थी कि गुरुवार, 7 मई को सुबह 11:30 बजे उनका भव्य शपथ ग्रहण समारोह होगा, लेकिन राज्यपाल ने फिलहाल इस पर ‘ब्रेक’ लगा दिया है। सूत्रों के मुताबिक, राज्यपाल विजय के दावों से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं क्योंकि वे 118 का स्पष्ट आंकड़ा पेश करने में विफल रहे। इसी वजह से गुरुवार को होने वाला शपथ ग्रहण टाल दिया गया है।
क्या सियासी दुश्मन DMK और AIADMK मिलाएंगे हाथ?
तमिलनाडु के गलियारों में एक चौंकाने वाली थ्योरी तैर रही है कि विजय को सत्ता से बाहर रखने के लिए स्टालिन की DMK और पलानीस्वामी की AIADMK हाथ मिला सकते हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो DMK के पास 59 और AIADMK के पास 47 सीटें हैं। अगर ये दोनों ‘दुश्मन’ साथ आते हैं, तो आंकड़ा 106 तक पहुंचता है। इसमें अगर लेफ्ट, IUML और VCK के 6 विधायकों को भी जोड़ दिया जाए, तब भी संख्या 112 ही होती है। यानी गणित बताता है कि इन दोनों का साथ आना न तो मुमकिन दिख रहा है और न ही इससे सरकार बनने का रास्ता साफ हो रहा है।
विजय की जीत में ‘सीट’ और ‘इस्तीफे’ का पेच
विजय की राह में एक तकनीकी पेच भी है। टीवीके की 108 सीटों में से दो सीटें खुद विजय ने जीती हैं। नियम के मुताबिक उन्हें एक सीट छोड़नी होगी, जिससे पार्टी की संख्या 107 रह जाएगी। कांग्रेस के 5 विधायकों के साथ यह संख्या 112 पहुंचती है। अब विजय की नैया पार लगाने की चाबी लेफ्ट (2), IUML (2) और VCK (2) के पास है। इन तीनों दलों ने मौखिक समर्थन की बात तो की है, लेकिन राज्यपाल को लिखित सहमति पत्र नहीं सौंपा है।
शुक्रवार की बैठक पर टिकी हैं निगाहें
विजय की किस्मत का फैसला अब शुक्रवार को होने वाली बैठकों में होगा। VCK और लेफ्ट पार्टियों ने शुक्रवार को एक अहम मीटिंग बुलाई है, जिसमें वे आधिकारिक तौर पर विजय को समर्थन देने पर फैसला करेंगे। अगर ये 6 विधायक लिखित रूप में टीवीके के साथ खड़े हो जाते हैं, तो विजय का मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ हो जाएगा। फिलहाल तमिलनाडु की जनता और राजनीतिक पंडितों की सांसें अटकी हुई हैं कि क्या साउथ के इस सुपरस्टार का ‘राजनीतिक डेब्यू’ राज्याभिषेक के साथ होगा या अभी इंतज़ार बाकी है।















