नई दिल्ली में ‘ब्रिक्स’ की महाबैठक: जयशंकर ने की अध्यक्षता, ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच शांति और स्थिरता पर जोर

नई दिल्ली। वैश्विक उथल-पुथल और अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच आज (14 मई) भारत की राजधानी दिल्ली ‘ब्रिक्स’ (BRICS) देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक का गवाह बनी। ‘भारत मंडपम’ में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने की। बैठक में रूस, ईरान, दक्षिण अफ्रीका, इथियोपिया और यूएई के विदेश मंत्रियों ने हिस्सा लिया। जयशंकर ने सभी प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए ब्रिक्स को दुनिया की एक ‘स्थिर और रचनात्मक’ शक्ति बताया।

चीन के विदेश मंत्री नहीं पहुंचे, राजदूत ने संभाली कमान

बैठक में एक खास बात यह रही कि चीन के विदेश मंत्री वांग यी भारत नहीं आ पाए। इसकी मुख्य वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वर्तमान चीन दौरा है। वांग यी की अनुपस्थिति में भारत में चीन के राजदूत जू फेइहोंग (Xu Feihong) ने इस बैठक में बीजिंग का प्रतिनिधित्व किया।

“अस्थिर दुनिया में ब्रिक्स की बढ़ी जिम्मेदारी” – जयशंकर

बैठक को संबोधित करते हुए एस. जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों में जारी उथल-पुथल पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया आर्थिक अनिश्चितताओं, तकनीकी चुनौतियों और युद्ध जैसे संघर्षों से जूझ रही है, तब ब्रिक्स देशों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

  • सहयोग पर जोर: जयशंकर ने कहा कि ब्रिक्स के सदस्यों के बीच करीबी संपर्क और आपसी सहमति इस जटिल दुनिया में सकारात्मक बदलाव ला सकती है।

  • वैश्विक उम्मीदें: उन्होंने रेखांकित किया कि विकासशील देशों को ब्रिक्स से बहुत उम्मीदें हैं कि यह समूह एक स्थिर शक्ति के रूप में उभरेगा।

ऊर्जा, भोजन और आर्थिक सुरक्षा प्रमुख एजेंडा

विदेश मंत्री ने विकास के मुद्दों को चर्चा के केंद्र में रखा। उन्होंने कहा कि कई देश आज ऊर्जा संकट, भोजन की कमी और उर्वरकों की उपलब्धता जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

  • आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain): उन्होंने विश्वसनीय आपूर्ति श्रृंखला और विविध बाजारों को आर्थिक मजबूती के लिए अनिवार्य बताया।

  • जलवायु परिवर्तन: जयशंकर ने जलवायु परिवर्तन को एक गंभीर चिंता बताते हुए ब्रिक्स देशों से सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया।

भारत चौथी बार कर रहा है अध्यक्षता

यह गौरव की बात है कि भारत चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है। इससे पहले भारत ने 2012, 2016 और 2021 में भी इस प्रभावशाली समूह का नेतृत्व किया था। जयशंकर ने जानकारी दी कि भारत की मौजूदा अध्यक्षता में अब तक 80 से ज्यादा बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में आपसी सहयोग को नई गति मिली है।

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