
बाहुबली पूर्व सांसद और माफिया अतीक अहमद की मुश्किलें थमने का नाम नहीं ले रही है। अहमदाबाद जेल में बंद अतीक अहमद की जमानत अर्जी शनिवार को एमपी-एमएलए कोर्ट ने खारिज कर दी। अतीक अहमद पर 2016 में सूबेदारगंज स्थित डिपो के पास जितेंद्र कुमार उर्फ मुन्ना की हत्या की साजिश रखने का आरोप है।
जज ने कहा- अपराध संगीन, नहीं दी जा सकती जमानत
इस मामले की सुनवाई करते हुए विशेष न्यायालय एमपी-एमएलए कोर्ट ने कहा कि साक्ष्यों और परिस्थितियों को देखते हुए अतीक अहमद को जमानत नहीं दी जा सकती। अदालत ने टिप्पणी की कि अतीक अहमद के ऊपर 47 आपराधिक मुकदमों का इतिहास है। इन मामलों में जांच चल रही है। कई मामलों में आरोप तय किया जा चुका है। मामले की परिस्थिति, अपराध की गंभीरता को देखते हुए जमानत अर्जी स्वीकार किए जाने का पर्याप्त आधार नहीं है। यह आदेश विशेष न्यायाधीश एमपी एमएलए कोटा दिनेश चंद्र शुक्ला ने सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी सुशील कुमार वैश्य व विशेष लोक अभियोजक वीरेंद्र कुमार सिंह को सुनने के बाद दिया।
जमीन के एक टुकड़े के लिए कर दी थी हत्या
दरअसल, सूरज कली की ओर से 11 जुलाई 2016 में धूमनगंज थाने में अपने बेटे जितेंद्र उर्फ मुन्ना की हत्या के आरोप में एफआईआर दर्ज कराई थी। याची ने कोर्ट को बताया कि मकान के विवाद को लेकर जयंतीपुर निवासी कृष्ण पाल उर्फ रमेश पाल से कई बार उनका झगड़ा हो चुका था। उस मकान को लेकर सिविल न्यायालय प्रयागराज में एक मुकदमा भी चल रहा था। जितेंद्र ही मुकदमे की पैरवी कर रहा था।
मुकदमे की पैरवी न करने की मिली थी धमकी, न माना तो कर दी हत्या
माफिया अतीक के गुर्गे उसे बराबर मुकदमे की पैरवी न करने की धमकी दे रहे थे। यह भी कह रहे थे कि अगर मुकदमे की पैरवी करना बंद नहीं करोगे तो जान से मार दिए जाओगे। धमकी सच साबित हुई और 11 जुलाई 2016 को जितेंद्र जब मुकदमे की पैरवी करने के बाद राजरूपपुर से होते हुए नार्दन रेलवे के मुख्यालय की ओर जा रहा था तभी सूबेदार गंज टैंक डिपो के पास कृष्ण कुमार का भाई रमेश पाल और अशरफ पुत्र मकूल हटवा निवासी ने उसकी गोली मारकर हत्या कर दी। जब इस मामले की विवेचना शुरू हुई इस हत्याकांड के पीछे माफिया अतीक अहमद का नाम भी सामने आया। बाद में पुलिस ने इस हत्याकांड में अतीक अहमद का भी नाम बढ़ा दिया।














