
वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद में दूसरे दिन भी सर्वे चल रहा है। 52 लोगों की टीम ने सुबह 8 बजे से अब तक सर्वे का 75 फीसदी काम पूरा कर लिया है। ज्ञानवापी के नक्काशीदार गुंबद और चार कमरों का सर्वे हो चुका है। अब छतों पर वीडियोग्राफी चल रही है। मिश्रित आबादी वाले इलाकों में पुलिस फोर्स अलर्ट है। गलियों में मार्च कर शांति की अपील की जा रही है। आज सर्वे पूरा होने की उम्मीद है। पुलिस कमिश्नर ए. सतीश गणेश ने कहा कि आज सुरक्षा थोड़ी और बढ़ा दी गई है।
सर्वे के पहले दिन परिसर के बाहर 10 लेयर की सिक्योरिटी थी, जिसे आज 12 लेयर की कर दिया गया है। इन बातों का विशेष ध्यान दिया जा रहा है कि दर्शन-पूजन करने वाले श्रद्धालुओं को असुविधा न हो। आज बरामदे, छत, गुंबद, तालाब, बाहरी दीवारों आदि की भी वीडियोग्राफी होनी है। छत पर जाने के लिए सीढ़ियां मंगाई गई थीं। सभी वादी, प्रतिवादी पक्ष और एडवोकेट के साथ एडवोकेट कमिश्नर सहित 52 लोगों की टीम की मौजूदगी में सर्वे चल रहा है। बता दें कि कोर्ट के आदेश के बाद शनिवार को पहले दिन 50% एरिया में वीडियोग्राफी और सर्वे हुआ।
गोदौलिया से गेट नंबर-4 यानी ज्ञानवापी तक पुलिस कमिश्नर ए. सतीश गणेश ने पैदल मार्च किया। शांति की अपील की।
कोर्ट कमिश्नर विशाल सिंह ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से सर्वे चल रहा है। वादी और प्रतिवादी सहित 52 लोग सहयोग कर रहे हैं।
सुरक्षा को देखते हुए आज भी 500 मीटर के एरिया में पब्लिक की एंट्री बैन कर दी गई है।
ज्ञानवापी के पास वाले गेट से काशी विश्वनाथ मंदिर में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है।
ज्ञानवापी के एक किलोमीटर के दायरे में करीब 1500 पुलिस और पीएसी के जवान तैनात हैं।
ज्ञानवापी के 500 मीटर के दायरे में छतों पर भी सुरक्षा में जवान लगे हैं।
आसपास की दुकानों को बंद करा दिया गया है, यहां के घरों से भी लोगों को निकलने की अनुमति नहीं है।
दोपहर 12 बजे तक सर्वे पूरा होने की उम्मीद है, इसके बाद आसपास की दुकानें खोल दी जाएंगी।
उधर, ज्ञानवापी परिसर मामले में हिंदू पक्ष ने शनिवार को कहा कि उन्होंने जो भी दावे किए हैं, वे सभी सच होंगे। इस मस्जिद के तहखानों में हमारी सोच से भी हजार गुना ज्यादा रहस्य छिपे हैं। 17 मई को वाराणसी के सीनियर सिविल डिविजन कोर्ट में रिपोर्ट सबमिट करने के बाद असलियत दुनिया के सामने आएगी। हिंदू पक्ष का दावा है कि नंदी महाराज के सामने जो तहखाना है, उसी में अंदर मस्जिद के बीचों-बीच आज भी शिवलिंग दबा हुआ है। पन्ना पत्थर से बने इस विशालकाय शिवलिंग का रंग हरा है। वहीं अरघा भी काफी बड़ा है।
औरंगजेब हमले के डर से शिवलिंग लेकर ज्ञानवापी कूप में कूद पड़े थे महंत
तहखाने के टूटे शिखर और किताब में है अनगिनत मंदिर तोड़ने की बात
मस्जिद के तहखाने में शनिवार को मंदिर शिखर के खूब सारे अवशेष देखे गए हैं। वहीं मोतीचंद लिखित काशी का इतिहास किताब में बताया गया था कि मंडपम में छोटे-छोटे अनगिनत मंदिर बने हुए थे। इन्हें औरंगजेब ने तोड़ दिया था। यह भी कहा जाता है कि आदि विश्वेश्वर मंदिर के महंत औरंगजेब के हमले के डर से शिवलिंग लेकर ज्ञानवापी कूप में कूद पड़े थे।
वादी पक्ष और विश्व वैदिक सनातन संघ के अध्यक्ष जीतेंद्र सिंह विसेन ने अपने पहले के बयानों में माना है कि यह घटना मिथ्या है। वह शिवलिंग इतना भारी था कि कोई अकेला व्यक्ति उसे उठाकर कूप में कूद ही नहीं सकता। अगर तहखाने के भीतर जाएं, तो शिवलिंग मिलेगा। वहीं, यहां की दीवारों पर अभी भी संस्कृत में खुदे अभिलेख बचे हुए हैं। उन्हें पढ़कर काफी कुछ समझा जा सकता है। जीतेंद्र सिंह विसेन ने बताया कि हमने जितना सोचा था, सर्वे के बाद मालूम चला कि यह उससे हजार गुना ज्यादा है। दूसरे दिन के सर्वे के बाद अभी बहुत से रहस्यों के बारे में हमें जानकारी होने वाली है।
काशी का इतिहास’
मोती चंद्र की किताब ‘काशी का इतिहास’ के अनुसार, विश्वेश्वर मंदिर का आकार 125 फीट ऊंचा था। इसमें 5 मंडप थे। पूरब की ओर स्थित 5वें मंडप की माप 135 फीट लंबी और 35 फीट चौड़ी थी। इसे रंग मंडप भी कहा जाता है। यहां पर धर्म संदेश और उपदेश दिए जाते थे। मंदिर का चबूतरा 7 फीट ऊंचा था, जिसे आज भी देखा जा सकता है। अब यह मस्जिद का हिस्सा है। मंदिर चौकोर था। इसका हर साइड 124 फीट लंबा था।
मंदिर के पूरब और पश्चिम में दंडपाणि और द्वारपाल के मंदिर थे। वहीं पश्चिम में शृंगार गौरी का मंदिर है। चारों कोनों पर 12-12 फीट के चार उप-मंदिर थे। नंदी महाराज और ज्ञानवापी कूप मंदिर के बाहर हैं। मंदिर और मंडपों के शिखर की ऊंचाई 64 और 48 फीट थी। वहीं, प्रदक्षिणा पथ और मंडपम में कई छोटे मंदिर बने हुए थे।
अयोध्या से ज्ञानवापी का है ये नाता
ज्ञानवापी और काशी विश्वनाथ मंदिर का विवाद काफी कुछ अयोध्या मामले की तरह ही है। फर्क सिर्फ इतना है कि अयोध्या में केवल मस्जिद बनी थी, जबकि वाराणसी में मंदिर-मस्जिद दोनों बने हुए हैं। काशी विवाद में हिंदू पक्ष का कहना है कि 1669 में औरंगजेब ने यहां मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई थी। उधर, मुस्लिम पक्ष का दावा है कि यहां मंदिर कभी था ही नहीं, बल्कि शुरुआत से ही मस्जिद थी।
महिलाओं ने ज्ञानवापी पर दाखिल की याचिका
दिल्ली की रहने वाली राखी सिंह और बनारस की रहने वाली लक्ष्मी देवी, सीता साहू, मंजू व्यास और रेखा पाठक की ओर ने वाराणसी की सिविल जज सीनियर डिवीजन की कोर्ट में 18 अगस्त 2021 में एक याचिका दाखिल की। इसमें कहा गया कि ज्ञानवापी परिसर में हिंदू देवी-देवताओं का स्थान है। ऐसे में ज्ञानवापी परिसर में मां शृंगार गौरी के नियमित दर्शन-पूजन की अनुमति दी जाए। इसके साथ ही परिसर स्थित अन्य देवी-देवताओं की सुरक्षा के लिए सर्वे कराकर स्थिति स्पष्ट करने की बात भी याचिका में कही गई।
मां शृंगार गौरी का मंदिर ज्ञानवापी के पिछले हिस्से में है। 1992 से पहले यहां नियमित दर्शन-पूजन होता था। लेकिन, बाद में सुरक्षा व अन्य कारणों के बंद होता चला गया। अभी साल में एक दिन चैत्र नवरात्र पर शृंगार गौरी के दर्शन-पूजन की अनुमित होती है। मुस्लिम पक्ष को शृंगार गौरी के दर्शन-पूजन में आपत्ति नहीं है। उनका विरोध पूरे परिसर का सर्वे और वीडियोग्राफी कराए जाने पर हैं। इसी बात का विरोध वाराणसी कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक कर रहे हैं।














