नोएडा/लखनऊ। जनपद गौतम बुद्धनगर के औद्योगिक क्षेत्र में सोमवार को हुए श्रमिकों के उग्र प्रदर्शन और असंतोष की गूंज लखनऊ स्थित सत्ता के गलियारों तक पहुंच गई है। उत्तर प्रदेश सरकार ने त्वरित कदम उठाते हुए श्रमिकों के न्यूनतम वेतन (Minimum Wage) में इजाफे का ऐलान कर दिया है। सरकार द्वारा गठित उच्च अधिकार प्राप्त समूह की सिफारिशों को लागू करते हुए अकुशल, अर्धकुशल और कुशल, तीनों श्रेणियों के मजदूरों के वेतन में वृद्धि की गई है। इस नई नीति की सबसे बड़ी खास बात यह है कि नोएडा और गाजियाबाद के श्रमिकों को पूरे प्रदेश में सबसे अधिक मानदेय मिलेगा।
नोएडा और गाजियाबाद के लिए विशेष दरें: 2900 रुपये तक का इजाफा
औद्योगिक केंद्र होने के कारण नोएडा और गाजियाबाद के लिए मजदूरी की दरें सबसे ऊंची रखी गई हैं।
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अकुशल मजदूर (Unskilled): इन्हें पहले 11,313 रुपये मिलते थे, लेकिन अब 2,377 रुपये की बढ़ोतरी के साथ इनका न्यूनतम वेतन 13,690 रुपये हो गया है।
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अर्धकुशल मजदूर (Semi-Skilled): इनके वेतन में 2,614 रुपये का इजाफा किया गया है, जिसके बाद अब इन्हें 15,059 रुपये मिलेंगे।
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कुशल मजदूर (Skilled): सबसे ज्यादा लाभ कुशल श्रमिकों को मिला है। उनके वेतन में 2,908 रुपये की वृद्धि की गई है, जिससे अब उन्हें प्रति माह 16,868 रुपये प्राप्त होंगे।
अन्य जिलों और नगर निगमों के लिए अलग स्लैब
सरकार ने राज्य को तीन श्रेणियों में बांटकर वेतन तय किया है। नोएडा-गाजियाबाद के बाद नगर निगम वाले अन्य जिलों (जैसे लखनऊ, कानपुर, वाराणसी) में अकुशल मजदूरों को 13,006 रुपये और गैर-नगर निगम वाले पिछड़े जिलों में 12,356 रुपये न्यूनतम मजदूरी मिलेगी। इसी तरह अर्धकुशल और कुशल श्रमिकों के लिए भी जिलावार अलग-अलग दरें निर्धारित की गई हैं, ताकि क्षेत्र की महंगाई और जीवन स्तर के हिसाब से संतुलन बना रहे।
सावधान! ’20 हजार सैलरी’ की खबर है झूठी: जिलाधिकारी
वेतन वृद्धि की खबरों के बीच सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी (DM) मेंधा रूपम ने स्पष्ट किया कि कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह भ्रामक प्रचार किया जा रहा है कि न्यूनतम वेतन 20,000 रुपये कर दिया गया है।
डीएम ने कहा: “20 हजार रुपये न्यूनतम वेतन की खबर पूरी तरह मनगढ़ंत और आधारहीन है। नियोक्ता संगठन और श्रमिक किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें। वर्तमान में भारत सरकार ‘फ्लोर वेज’ (Floor Wage) निर्धारित करने की प्रक्रिया पर काम कर रही है, जिसके बाद ही पूरे देश में एक समान आधार रेखा तय होगी।”
लेबर कोड और भविष्य की तैयारी
प्रशासन के मुताबिक, नई श्रम संहिताओं (Labor Codes) को लेकर राज्य सरकार सभी हितधारकों, संगठनों और विशेषज्ञों से चर्चा कर रही है। सरकार का उद्देश्य एक ऐसा संतुलित निर्णय लेना है जिससे श्रमिकों को न्यायसंगत पारिश्रमिक मिले और उद्योगों पर भी अचानक भारी आर्थिक बोझ न पड़े। फिलहाल, ताजा वेतन वृद्धि को उन प्रदर्शनकारी श्रमिकों को शांत करने की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है जो लंबे समय से वेतन विसंगतियों की शिकायत कर रहे थे।














