LIVE….बंगाल में सुवेंदु युग का आगाज: ब्रिगेड परेड ग्राउंड में ऐतिहासिक शपथ ग्रहण, जब पीएम मोदी ने छुए बुजुर्ग कार्यकर्ता के पैर

 

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज एक नया अध्याय जुड़ गया है। कोलकाता का ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड उस समय जय श्री राम के नारों से गूंज उठा, जब सुवेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस भव्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह सहित एनडीए शासित राज्यों के 20 मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी ने कार्यक्रम की गरिमा को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया।

पीएम मोदी ने रवींद्रनाथ टैगोर को दी श्रद्धांजलि

समारोह की शुरुआत बेहद भावनात्मक रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंच पर पहुंचते ही सबसे पहले बंगाल की विभूति और विश्वकवि रवींद्रनाथ टैगोर को श्रद्धाजंलि अर्पित की। प्रधानमंत्री के इस कदम को बंगाल की संस्कृति और अस्मिता के प्रति उनके सम्मान के रूप में देखा जा रहा है। पूरा मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से भर गया जब पीएम ने टैगोर की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए।

मंच पर भावुक क्षण: जब पीएम ने छुए 90 वर्षीय कार्यकर्ता के पैर

शपथ ग्रहण समारोह के दौरान एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने सोशल मीडिया से लेकर जमीन तक सबका दिल जीत लिया। प्रधानमंत्री मोदी ने भाजपा के 90 वर्षीय समर्पित कार्यकर्ता माखनलाल सरकार को मंच पर विशेष सम्मान दिया। पीएम खुद चलकर माखनलाल के पास गए, उन्हें शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया और फिर झुककर उनके पैर छुए। इस भावुक पल ने वहां मौजूद हजारों लोगों की आंखें नम कर दीं। पैर छूने के बाद माखनलाल सरकार ने भी देर तक प्रधानमंत्री को गले लगाए रखा, जो पार्टी के प्रति एक कार्यकर्ता की निष्ठा और नेतृत्व के स्नेह का प्रतीक बन गया।

सुवेंदु के साथ 4 और चेहरे ले सकते हैं शपथ!

सुवेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही मंत्रिमंडल को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आज सुवेंदु के साथ चार और विधायक भी मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। हालांकि, इन नामों को फिलहाल बेहद गुप्त रखा गया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि इसमें क्षेत्रीय समीकरणों का पूरा ध्यान रखा गया है।

सुवेंदु बेहद आध्यात्मिक, घरवाले डरते थे बेटा संन्यासी न बन जाए

1970 में पूर्व मेदिनीपुर के कोंतली गांव में जन्मे सुवेंदु का बचपन से ही आस्था की ओर झुकाव है। हर शनिवार रामकृष्ण मिशन जाना उनका तय रूटीन था। वे बचपन में इतने धार्मिक थे कि घरवालों को डर लगने लगा था कहीं बेटा संन्यासी न बन जाए।

घर में जमा सिक्के भी चुपचाप मिशन में दान कर आते थे। परिवार को लगता था, कभी भी घर छोड़ सकते हैं। लेकिन सुवेंदु ने दूसरा फैसला लिया… संन्यास नहीं, राजनीति करेंगे और शादी भी नहीं करेंगे।

80 के दशक के अंत में कांथी के प्रभात कुमार कॉलेज से सुवेंदु की छात्र राजनीति शुरू हुई। धीरे-धीरे पूर्व मेदिनीपुर में अपनी अलग पहचान बना ली।

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