
दिल्ली के सत्य निकेतन में 5 मंजिला पीजी इमारत ढही, 6 छात्रों की मौत; हादसे ने खड़े किए 5 तीखे सवाल
देश की राजधानी दिल्ली में दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के साउथ कैंपस से सटे सत्य निकेतन इलाके में एक 5 मंजिला पेइंग गेस्ट (PG) इमारत अचानक ढह गई। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 6 छात्रों की मौत हो चुकी है, जबकि एनडीआरएफ (NDRF) और राहत एजेंसियों ने 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। महज 55 वर्ग गज में बनी यह इमारत 1990 के दशक के अंत में निर्मित हुई थी, जिसे बाद में मल्टी-स्टोरी पीजी में तब्दील कर दिया गया। बीते 15 वर्षों में इस रिसेटलमेंट कॉलोनी में यह चौथी ऐसी घटना है, जिसने अवैध पीजी और जर्जर इमारतों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटनास्थल पर एनडीआरएफ की विशेष टीमें राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। मलबे के विशाल ढेर में फंसे लोगों का पता लगाने के लिए प्रशिक्षित स्निफर डॉग्स और आधुनिक जीवन-रक्षक उपकरणों की मदद ली जा रही है।
हादसे के बाद प्रशासन और मकान मालिकों से उठते 5 बड़े सवाल
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1. क्या बिना अनुमति अवैध रूप से बनाए गए अतिरिक्त फ्लोर? स्थानीय निवासियों के अनुसार, एमसीडी (MCD) के रिकॉर्ड में यह बिल्डिंग बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर के ऊपर 4 मंजिल तक ही सीमित थी। आरोप है कि करीब दो साल पहले इसमें बिना नगर निगम की जरूरी मंजूरी के दो और अतिरिक्त फ्लोर बना दिए गए। सवाल उठता है कि इतने घनी आबादी वाले क्षेत्र में अवैध निर्माण कैसे होता रहा और संबंधित विभाग मौन क्यों रहा?
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2. बिना स्ट्रक्चरल असेसमेंट के क्यों चल रही थी मरम्मत? हादसे से लगभग एक सप्ताह पहले से इमारत के बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर पर रिपेयरिंग का काम कराया जा रहा था। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इमारत में पहले से नमी, सीपेज और दरारें थीं। ऐसे में क्या मरम्मत शुरू करने से पहले किसी योग्य सिविल इंजीनियर से स्ट्रक्चरल असेसमेंट कराया गया था?
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3. सुरक्षा मानकों और इमरजेंसी एग्जिट की अनदेखी का जिम्मेदार कौन? बिल्डिंग में सेफ्टी चेक का कोई रिकॉर्ड नहीं था और न ही आपात स्थिति में बाहर निकलने के लिए कोई इमरजेंसी एग्जिट बनाया गया था। ‘हॉस्टल डेज’ नाम की कंपनी द्वारा लीज पर चलाए जा रहे इस पीजी में छात्रों से प्रति बेड 14,000 से 18,000 रुपये तक किराया वसूला जा रहा था, लेकिन सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम पूरी तरह नदारद थे।
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4. 15 वर्षों में 4 हादसे, पिछली त्रासदियों से क्यों नहीं लिया सबक? 299 घरों वाली इस रिसेटलमेंट कॉलोनी में पिछले 15 सालों के भीतर यह चौथी बड़ी घटना है। वर्ष 2022 में भी इसी इलाके में हुए एक इमारत हादसे में 2 लोगों की जान चली गई थी। बार-बार होती त्रास्दिधयों के बाद भी पुरानी और जर्जर इमारतों का नियमित फायर और स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट क्यों नहीं किया जाता?
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5. दिखाई दे रही दरारों और शिकायतों पर सोता रहा नगर निगम? क्षेत्रीय निवासियों का दावा है कि भवन में काफी समय से दरारें दिखाई दे रही थीं। हालांकि, एमसीडी का कहना है कि उन्हें इस संबंध में कोई लिखित आधिकारिक शिकायत नहीं मिली थी। क्या नागरिक सुरक्षा से जुड़े मामलों में कार्रवाई के लिए प्रशासन को हमेशा मौतों का इंतजार रहता है?
पुलिस जांच के दायरे में मकान मालिक और लीज एग्रीमेंट शुरुआती पुलिस जांच में सामने आया है कि यह संपत्ति गुड़गांव निवासी तीन भाइयों—हरि राम बंसल, आनंद बंसल और आजाद बंसल की है। उन्होंने पिछले साल इस प्रॉपर्टी को एक निजी कंपनी को लीज पर दिया था। फिलहाल दिल्ली पुलिस लीज एग्रीमेंट, पीजी संचालन की एनओसी, लोड-बेयरिंग पिलर्स से छेड़छाड़ और निर्माण संबंधी सभी तकनीकी खामियों की गहनता से जांच कर रही है।















