
दुनियाभर में गहराते भू-राजनीतिक (जियोपॉलिटिकल) तनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के अंतिम दिन ओपन सेशन को संबोधित करते हुए एक बेहद मजबूत और स्पष्ट संदेश दिया है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सीधी मौजूदगी में पीएम मोदी ने क्रिटिकल मिनरल्स और आधुनिक टेक्नोलॉजी को हथियार की तरह इस्तेमाल करने की बढ़ती रणनीति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि दुनिया में लगातार बढ़ते तनाव का सीधा और प्रतिकूल असर आम जनता की दिनचर्या पर पड़ रहा है। आज की आपस में जुड़ी दुनिया में कोई भी संकट केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, चाहे वह महामारी हो, जलवायु परिवर्तन की मार हो या फिर ग्लोबल सप्लाई चेन में आने वाली रुकावटें। ऐसे में ब्रिक्स देशों को एक साथ मिलकर इन गंभीर चुनौतियों का मुकाबला करना होगा ताकि ग्लोबल साउथ की आर्थिक प्रगति को बिना किसी बाधा के आगे बढ़ाया जा सके।
महामारी और संक्रामक बीमारियों पर लगेगा ब्रेक, बनेगा BRICS इंटीग्रेटेड अर्ली वार्निंग सिस्टम
भविष्य में आने वाले स्वास्थ्य संकटों और महामारी के खतरों से निपटने के लिए भारत की पहल पर BRICS देशों के बीच एक बड़ा समझौता हुआ है। पीएम मोदी ने जानकारी दी कि संक्रामक बीमारियों की रोकथाम और उनसे बचाव के लिए ‘BRICS इंटीग्रेटेड अर्ली वार्निंग सिस्टम’ बनाने पर सहमति बन चुकी है। इसके साथ ही समय पर सटीक जानकारी साझा करने के लिए डेटा इंटीग्रेशन मैकेनिज्म की नई गाइडलाइंस भी तैयार कर ली गई हैं। यह अत्याधुनिक सिस्टम भविष्य में किसी भी नए स्वास्थ्य खतरे की पहचान पहले ही कर लेगा, जिससे सही समय पर कड़े और प्रभावी कदम उठाए जा सकेंगे और दुनिया को किसी बड़े मानवीय संकट से बचाया जा सकेगा।
मजबूत होगी लॉजिस्टिक सप्लाई चेन, स्टार्टअप्स के लिए खुलेगा BRICS इनक्यूबेटर नेटवर्क
अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आपूर्ति में आने वाले व्यवधानों को दूर करने के लिए ‘BRICS लॉजिस्टिक सप्लाई चेन कोऑपरेशन फ्रेमवर्क’ को लागू किया जा रहा है, जिससे सदस्य देशों के बीच व्यापारिक निर्भरता अधिक भरोसेमंद और पारदर्शी बनेगी। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि दुनिया के किसी एक हिस्से में संकट आए, तो उसका प्रभाव अन्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर न पड़े। इसके अलावा इनोवेशन और तकनीक के क्षेत्र में युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए ‘BRICS इनक्यूबेटर नेटवर्क’ की शुरुआत की गई है। यह नेटवर्क विभिन्न देशों के नए स्टार्टअप्स और इनक्यूबेटर्स को एक डिजिटल मंच पर जोड़ेगा, जिससे वैश्विक स्तर पर नए बिजनेस आइडिया और उभरती तकनीकों पर साझा काम हो सकेगा।
चार मजबूत पिलर्स पर टिका भारत का दृष्टिकोण, बढ़ता ग्लोबल साउथ का अटूट विश्वास
प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान मुख्य रूप से चार स्तंभों—रेजिलिएंस (लचीलापन), इनोवेशन (नवाचार), कोऑपरेशन (सहयोग) और सस्टेनेबिलिटी (सतत विकास) पर ध्यान केंद्रित किया गया है। सदस्य देशों के एकजुट प्रयासों से इन साझा लक्ष्यों को हासिल करने में बड़ी सफलता मिली है। आज दुनिया के विकासशील और गरीब देशों (ग्लोबल साउथ) का ब्रिक्स संगठन पर विश्वास अभूतपूर्व रूप से बढ़ा है। ऐसे में ब्रिक्स की यह नैतिक और रणनीतिक जिम्मेदारी बनती है कि वह इन देशों की दैनिक समस्याओं का समाधान निकालने और समावेशी विकास को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए मिलकर काम करे।















