बिहार की राजधानी पटना में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके दिवंगत पिता को लेकर दी गई एक विवादित टिप्पणी से देश का राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। खरगे के इस बयान के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तीखा रुख अख्तियार करते हुए कड़ा विरोध जताया है। भाजपा ने खरगे से देश के सामने बिना शर्त माफी मांगने की मांग की है और इसके विरोध में आज देशभर में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन करने का एलान किया है। वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस ने इस बयान का बचाव करते हुए कहा है कि खरगे की टिप्पणी को पूरे राजनीतिक संदर्भ में समझे जाने की जरूरत है।
जानिए क्या है पटना के कार्यक्रम का पूरा विवाद?
यह पूरा विवाद बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की जयंती के अवसर पर पटना में आयोजित एक गरिमामय कार्यक्रम के दौरान खड़ा हुआ। कार्यक्रम को संबोधित करते समय खरगे के भाषण के बीच भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने कथित तौर पर नारेबाजी करते हुए टिप्पणी की कि ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहीं नहीं जाने वाले हैं’। इसी बात का सीधा जवाब देते हुए कांग्रेस अध्यक्ष खरगे के मुंह से निकला, “मोदी के बाप भी चले जाएंगे।” खरगे के इस बयान को भाजपा ने प्रधानमंत्री के स्वर्गीय पिता के प्रति अत्यंत अपमानजनक और अमर्यादित मानते हुए राजनीतिक हमले तेज कर दिए हैं।
भाजपा का देशभर में उग्र प्रदर्शन, बिना शर्त माफी की मांग
कांग्रेस अध्यक्ष की इस टिप्पणी के खिलाफ भाजपा ने देश के सभी राज्यों में अपने क्षेत्रीय और ज़िला पार्टी कार्यालयों के बाहर विरोध-प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने अपनी सभी राज्य इकाइयों को शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावी तरीके से विरोध दर्ज कराने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का स्पष्ट कहना है कि वैचारिक और राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हो सकते हैं, लेकिन देश के प्रधानमंत्री और उनके दिवंगत परिजनों के खिलाफ इस तरह की घटिया और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है।
रविशंकर प्रसाद का हमला: ‘हार से हताश होकर निचले स्तर पर उतरी कांग्रेस’
पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने खरगे के बयान पर जोरदार हमला बोलते हुए इसे ‘शर्मनाक और बेहद निचले स्तर की टिप्पणी’ करार दिया। उन्होंने कहा कि लगातार मिल रही चुनावी हार से बौखलाकर कांग्रेस पार्टी अब भाषाई मर्यादा की सभी सीमाएं लांघ चुकी है। प्रसाद ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शीर्ष नेता लगातार प्रधानमंत्री के प्रति आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करते हैं और बाद में पूरी पार्टी उनका बचाव करने में जुट जाती है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या संवैधानिक पदों पर बैठे नेताओं के लिए ऐसी भाषा सही ठहराई जा सकती है?
कांग्रेस ने पेश की सफाई: पवन खेड़ा बोले— संदर्भ को समझना जरूरी
विवाद गहराने के बाद कांग्रेस ने आधिकारिक तौर पर अपना रुख स्पष्ट किया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने खरगे का बचाव करते हुए कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। खेड़ा के मुताबिक, पटना के कार्यक्रम में एक भाजपा समर्थक ने खरगे के भाषण के बीच उकसाने वाले अंदाज में कहा था कि ‘अगर खरगे के पिता भी आ जाएं, तब भी मोदी को नहीं हरा सकते’।
खेड़ा ने दावा किया कि खरगे ने केवल उसी उकसावे भरे बयान का करारा जवाब दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि खरगे का निशाना किसी व्यक्ति विशेष के बजाय प्रधानमंत्री मोदी की राजनीतिक विचारधारा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर था।



















