‘माइन प्लाउ’ तकनीक से लैस होंगे भारतीय सेना के टैंक, पाकिस्तान-चीन की बढ़ी परेशानी

– रक्षा मंत्रालय ने बीईएमएल से 557 करोड़ रुपये की डील फाइनल की

– अब सेना के टैंक बेधड़क युद्ध के दौरान दुश्मन के इलाकों में जा सकेंगे

नई दिल्ली । भारतीय सेना के टैंकों को दुश्मन के इलाके में भी सुरक्षित रखने केे लिए अब ‘माइन प्लाउ’ से लैस किया जाएगा। इस तकनीक से फायदा यह है कि जमीन के अंदर छिपाए गए विस्फोटक का भी भारतीय सेना के टैंक पता लगाकर उसे आसानी से बाहर निकालते हुए बेधड़क युद्ध के दौरान दुश्मन के इलाकों में घुसते चले जाएंंगे। साथ ही टैंक पर सवार सैनिकों को किसी भी तरह का नुकसान नहीं होगा। इसके लिए सोमवार को रक्षा मंत्रालय ने भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बीईएमएल) के साथ 557 करोड़ रुपये की डील फाइनल की है। इससे भारतीय सेना की युद्ध क्षमता और बढ़ जाएगी। 


इस समय पूर्वी लद्दाख सीमा पर चीन से युद्ध जैसे हालात बनने पर भारतीय सेना ने टी-90 टैंकों की तैनाती कर रखी है। इसी तरह पाकिस्तान से भी तनातनी के चलते एलओसी पर भी टैंकों की तैनाती रहती है। पाकिस्तान के साथ-साथ इस समय चीन सीमा पर माहौल गर्म है। हालांकि एक तरफ चीन भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ करने के बाद सैन्य और कूटनीतिक वार्ताओं में पीछे हटने पर सहमति जता रहा है तो दूसरी तरफ सीमा पर बड़े हथियारों और सैनिकों की संख्या भी बढ़ाता जा रहा है जिससे फिलहाल दोनों देशों के बीच तनाव कम होता नहीं दिख रहा है। 


लद्दाख में तैनात टी-90 टैंक के ऊपर ‘माइन प्लाउ’ लगाए जाएंंगे जिससे अगर जरूरत पड़ने पर टैंकों को चीन की सीमा में भी घुसना पड़े और किसी इलाके में शत्रु माइंस बिछा दे तो उसे टैंक के ऊपर रहकर ही खोदकर बाहर निकाल लिया जाए। ‘माइन प्लाउ’ एक ऐसा यंत्र है जिससे जमीन को खोदकर सावधानी से विस्फोटक को बाहर ढूंढ़ कर निकाला जा सकता है। कई बार सीमा पर लड़ाई के दौरान विरोधी जमीन के अंदर माइंस बिछा देते हैं। ऐसे में जानकारी के अभाव में उसके ऊपर से गुजरने पर विस्फोट हो जाता है और सैनिकों की जान तक चली जाती है। अभी कल ही लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) के कारगिल सेक्टर में जमीन पर बिछाए गए विस्फोटक पर जवान का पैर पड़ने से जोरदार विस्फोट हुआ, जिसमें उसकी जान चली गई। 


रक्षा मंत्रालय ने आज टैंक टी-90 एस/एसके पर ‘माइन प्लाउ’ लगाने के लिए 557 करोड़ की मंजूरी दी है। इससे 1512 माइन प्लाउ खरीदे जाएंगे। ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मंत्रालय ने मेसर्स भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बीईएमएल) के साथ यह डील फाइनल की है। इस डील के तहत सारे 1512 ‘माइन प्लाउ’ 2027 तक भारत को मिल जाएंंगेे। हालांकि इसकी आपूर्ति अगले एक दो सालों में शुरू हो सकती है। इस डील के होनेे से भारत के जवान युद्ध के मैदान में माइंस से खुद को बचाते हुए दुुश्मन का सामना कर सकेंगे। डील में ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने के लिए माइन प्लाउ के निर्माण में न्यूनतम 50% स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किए जाने की भी शर्त रखी गई है।

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