
चीन की चालबाजी पूरी दुनिया के सामने बेनकाब है चुकी है. उसकी विस्तारवादी नीति उस पर भारी पड़ रही है. चीन ने भारत से पंगा लिया, तो उसके बुरे दिन शुरू हो गए. भारत समेत दुनिया के तमाम देशों ने चीन पर व्यापारिक पाबंदिया लगा दी हैं. ऐसे में उससे सबसे ज्यादा प्रताड़ित देश ताइवान अब खुलकर सामने आ गया है. भारत और अमेरिका उसका साथ दे रहे हैं. चीन ताइवान को अपना हिस्सा बताता आ रहा है. जबकि ताइवान ने साफ कर दिया है कि चीन अगर उसके खिलाफ कोई कदम उठाता है तो मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा. अब चीन ने सैन्य कार्रवाई की धमकी दी है. लेकिन इस बीच खबर आई है कि चीन पानी के रास्ते जिस टैंक से ताइवान पर हमला करने की योजना बना रहा था, वो टैंक पानी में घुसते ही डूब गए. यानी टैंक की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं.
इसका एक वीडियो सामने आने से उसकी पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की पोल खुल गई है. दरअसल, सोशल मीडिया पर शेयर हो रहे वीडियो में दिखाई दे रहा है कि उसका एक amphibious टैंक जो पानी के अंदर और बाहर, दोनों जगह फंक्शन कर सकता है, वह खुद ही डूब जाता है. कहा जाता है कि पानी के रास्ते ही चीन ताइवान को निशाना बनाने की फिराक में है. ऐसे में इस वीडियो ने चीनी सामान की पोल खोल दी है.
इस amphibious टैंक का काम होता है पानी के अंदर रहकर इंतजार करना और जरूरत पड़ने पर अचानक हमला करना या किसी संदिग्ध वाहन को नदी पार करने से रोकना. इसके साथ ही ये आरोप भी लग रहे हैं कि ये टैंक ठेके के मानकों से उलट घटिया क्वॉलिटी के पतले और कमजोर स्टील से बनाए गए हैं जिसकी वजह से यह डूब गया. चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी के उपकरणों की गुणवत्ता पर सवाल खड़ा हो गया है और भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं.
बता दें कि दक्षिण चीन सागर में जिस क्षेत्र पर चीन की नजर है, वह खनिज और ऊर्जा संपदाओं का भंडार है. चीन का दूसरे देशों से टकराव भी कभी तेल, कभी गैस तो कभी मछलियों से भरे क्षेत्रों के आसपास होता है. चीन एक ‘U’ शेप की ‘नाइन डैश लाइन’ के आधार पर क्षेत्र में अपना दावा ठोकता है, इसके अंतर्गत वियतनाम का एक्सक्लूसिव इकनॉमिक जोन (EEZ), परासल टापू, स्प्रैटली टापू, ब्रूने, मलेशिया, इंडोनेशिया, फिलिपीन और ताइवान के EEZ भी आते हैं,
चीन का ताइवान के साथ क्या है विवाद
दरअसल, 1949 में माओत्से तुंग के नेतृत्व में कम्युनिस्ट पार्टी ने चियांग काई शेक के नेतृत्व वाले कॉमिंगतांग सरकार का तख्तापलट कर दिया था. जिसके बाद चियांग काई शेक ने ताइवान द्वीप में जाकर अपनी सरकार का गठन किया. उस समय कम्यूनिस्ट पार्टी के पास मजबूत नौसेना नहीं थी, इसलिए उन्होंने समुद्र पार कर इस द्वीप पर अधिकार नहीं किया. तब से ताइवान पर चीन अपना हक मानता है.














