पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के एग्जिट पोल के आंकड़े सामने आने के बाद राज्य में राजनीतिक पारा अपने चरम पर पहुंच गया है। गुरुवार की रात कोलकाता का नेताजी इनडोर स्टेडियम भीषण सियासी ड्रामे का केंद्र बन गया। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कद्दावर नेता शशि पांजा और कुणाल घोष ने स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर अचानक धरना शुरू कर दिया। टीएमसी नेताओं का आरोप है कि जहां ईवीएम (EVM) रखे गए हैं, उस स्ट्रॉन्ग रूम में भारी अनियमितताएं और प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया जा रहा है। यह विरोध प्रदर्शन उन एग्जिट पोल के अनुमानों के ठीक बाद शुरू हुआ, जिनमें ममता बनर्जी के 15 साल के शासन पर ब्रेक लगने और बीजेपी की जीत की भविष्यवाणी की गई है।
‘कुछ तो गड़बड़ है’: शशि पांजा ने पारदर्शिता पर उठाए गंभीर सवाल
विरोध स्थल पर मौजूद राज्य मंत्री शशि पांजा ने चुनाव आयोग की व्यवस्था पर कड़े प्रहार किए। उन्होंने पत्रकारों से कहा, “स्ट्रान्ग रूम के अंदर कौन लोग हैं? कोई भी अनाधिकृत व्यक्ति वहां कैसे प्रवेश कर सकता है?” पांजा ने आरोप लगाया कि प्रशासन और चुनाव आयोग इस पूरी प्रक्रिया को संदिग्ध बना रहे हैं। उनका कहना था कि सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी के बिना अंदर गतिविधियां चल रही हैं, जो सीधे तौर पर नियमों की अनदेखी है। टीएमसी नेताओं ने मांग की कि उन्हें लाइव निगरानी (Live Monitoring) का पूरा एक्सेस दिया जाए ताकि धांधली की किसी भी गुंजाइश को खत्म किया जा सके।
कुणाल घोष का सीधा आरोप- ‘पोस्टल बैलेट के साथ हो रही छेड़छाड़’
TMC नेता कुणाल घोष ने इस पूरे घटनाक्रम के पीछे भारतीय जनता पार्टी (BJP) का हाथ होने का दावा किया। घोष ने आरोप लगाया कि बीजेपी अपने लोगों को स्ट्रॉन्ग रूम के अंदर भेजकर पोस्टल बैलेट के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने सीसीटीवी (CCTV) फुटेज का हवाला देते हुए कहा कि लाइव स्ट्रीमिंग में साफ दिख रहा है कि अंदर कुछ लोग काम कर रहे हैं, जबकि वहां टीएमसी का कोई प्रतिनिधि मौजूद नहीं है। घोष ने प्रशासन के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें अंदर जाने से रोका जा रहा है, जिससे संदेह और गहरा गया है।
ममता बनर्जी के आने की अटकलें और बढ़ता तनाव
देर रात तक चले इस धरने के दौरान यह चर्चा जोरों पर थी कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर पहुंच सकती हैं। हालांकि, बाद में पार्टी सूत्रों ने उनके आने से इनकार किया, लेकिन शशि पांजा और कुणाल घोष के नेतृत्व में कार्यकर्ता डटे रहे। नेताजी इनडोर स्टेडियम के बाहर भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। टीएमसी ने चेतावनी दी है कि यदि स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की गई, तो यह आंदोलन पूरे राज्य में तेज किया जाएगा। 4 मई को आने वाले नतीजों से पहले इस टकराव ने बंगाल की कानून-व्यवस्था और राजनीतिक स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या हार के डर से उपजा है यह विरोध?
राजनीतिक विशेषज्ञों का एक वर्ग इसे एग्जिट पोल के दबाव से जोड़कर देख रहा है। एग्जिट पोल के मुताबिक, इस बार बंगाल में सत्ता परिवर्तन के प्रबल आसार हैं। ऐसे में स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर टीएमसी का यह कड़ा रुख चुनावी नतीजों की शुचिता को लेकर एक नई बहस छेड़ चुका है। चुनाव आयोग ने हालांकि अभी तक इन आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन 4 मई की मतगणना से पहले बंगाल की हवा में भारी तनाव महसूस किया जा रहा है।














