दिल्ली में ‘कोरोना फीस’ के साथ ही बिकेगी शराब, हाई कोर्ट ने नहीं लगाई रोक

दिल्ली सरकार को इस मसले पर 19 जून तक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश

नई दिल्ली । दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली में शराब की कीमतों में स्पेशल कोरोना फीस जोड़कर लेने के फैसले पर रोक लगाने से फिलहाल इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से इस मसले पर 19 जून तक विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।

इस मामले मं दिल्ली सरकार ने कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर शराब की कीमतों में स्पेशल कोरोना फीस जोड़कर लेने के फैसले को सही और वैधानिक कदम बताया। दिल्ली सरकार ने कहा है कि किसी नागरिक को शराब का व्यवसाय करने या उसका उपभोग करने का अधिकार नहीं है। दिल्ली सरकार ने कहा है कि शराब के व्यवसाय औऱ उसके उपभोग को नियंत्रित करने के लिए अलग से फीस लगाने का उसे वैधानिक अधिकार है। दिल्ली आबकारी अधिनियम की धारा 26 और 28 के तहत उसे ये अधिकार है कि वो कोई स्पेशल फीस लगाए। दिल्ली सरकार ने कहा है कि लॉकडाउन की वजह से सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है ।

हाईकोर्ट ने पिछले 15 मई को दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया था। हाईकोर्ट ने शराब की कीमतों में स्पेशल कोरोना फीस जोड़कर लेने के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। याचिका वकील ललित वालेचा ने दायर किया है। याचिका में कहा गया है कि दिल्ली सरकार ने 4 मई को शराब की कीमतों में कोरोना फीस के रुप में 70 फीसदी और बढ़ोतरी कर दी। दिल्ली सरकार का यह आदेश मनमाना और कानूनसम्मत नहीं है। स्पेशल कोरोना फीस की घोषणा शराब की दुकानों के खुलने के पहले नहीं की गई थी। लेकिन जब शराब की दुकानों पर काफी भीड़ एकत्र हो गई तब स्पेशल कोरोना फीस लगाया गया।

याचिका में कहा गया है कि 70 फीसदी कोरोना फीस लगाना आम आदमी पर काफी बड़ा बोझ है। आम आदमी आर्थिक संकट से जूझ रहा है वैसी स्थिति में स्पेशल कोरोना फीस लगाना अन्याय है। याचिका में 4 मई के इस नोटिफिकेशन को निरस्त करने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि कोरोना फीस लगाने के पीछे शराब को बेचने से रोकने की मंशा नहीं थी बल्कि यह राजस्व प्राप्ति के लिए किया गया था। इस बात का संकेत बार-बार दिल्ली सरकार ने अपने प्रेस कांफ्रेंस में किया था।

याचिका में कहा गया है कि दिल्ली सरकार को दिल्ली एक्साईज रुल्स में बदलाव का कोई अधिकार नहीं है। दिल्ली सरकार को इस तरह स्पेशल फीस लगाने का कोई क्षेत्राधिकार प्राप्त नहीं है। ऐसा दिल्ली सरकार ने कर अधिकारों का दुरुपयोग किया गया है।

Back to top button
E-Paper