
ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद सहित कई प्रमुख शहरों और रणनीतिक ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइलों से ताबड़तोड़ हमले किए हैं. हमलों की गंभीरता को देखते हुए पूरे सऊदी अरब में ‘एयर रेड अलर्ट’ (हवाई हमले की चेतावनी) जारी कर दिया गया है. मध्य पूर्व में तेजी से बिगड़ते हालात और अमेरिकी हितों पर बढ़ते खतरे को देखते हुए अमेरिका ने पश्चिमी एशियाई देशों के लिए तुरंत ‘स्टेप’ (Smart Traveler Enrollment Program) अलर्ट जारी किया है. अमेरिकी नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे इन क्षेत्रों की यात्रा पर गंभीरता से पुनर्विचार करें और सुरक्षा से जुड़ी पल-पल की अपडेट हासिल करने के लिए तुरंत रजिस्टर करें.
रियाद एयरपोर्ट के पास दिखा धुएं का गुबार, अमेरिका का बॉम्बर ब्रिटेन से रवाना
हूती विद्रोहियों का दावा है कि शनिवार को उन्होंने रियाद में कई बेहद संवेदनशील ठिकानों को अपना निशाना बनाया. हमले के तुरंत बाद रियाद के मुख्य हवाई अड्डे के समीप आग की लपटें उठती देखी गईं और आसमान में काले धुएं का घना गुबार फैल गया. उधर सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन का कहना है कि उनकी एयर डिफेंस प्रणाली ने रियाद की ओर आ रही एक घातक बैलिस्टिक मिसाइल को हवा में ही मार गिराया. इस भीषण तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कैंप डेविड का अपना दौरा समय से पहले ही खत्म कर अचानक देर रात व्हाइट हाउस लौट आए हैं. वहीं हालात से निपटने के लिए अमेरिका का बी-बॉम्बर (US Bomber) ब्रिटेन के एयरबेस से उड़ान भर चुका है.
अमेरिका का सख्त परामर्श: मिडिल ईस्ट के देशों के लिए सुरक्षा दिशा-निर्देश जारी
बढ़ते सैन्य टकराव के बीच अमेरिकी विदेश मंत्रालय और दूतावासों ने मिडिल ईस्ट के कई देशों के लिए एक साथ ट्रैवल एडवाइजरी व सिक्योरिटी अलर्ट जारी किए हैं:
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ईरान: यात्रा न करें; तुरंत देश छोड़ें.
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इराक, लेबनान, सीरिया, यमन, गाजा: किसी भी परिस्थिति में यात्रा न करें.
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सऊदी अरब: यात्रा की योजना पर पुनर्विचार करें.
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बहरीन, ओमान, कतर, कुवैत, जॉर्डन: व्यापक सुरक्षा अलर्ट जारी (सतर्कता बरतें).
सना में कार्रवाई का बदला और तेल आपूर्ति पर गहराता संकट
हूतियों ने रियाद के अलावा लाल सागर के सबसे प्रमुख तेल निर्यात केंद्र ‘यान्बू’ में स्थित सऊदी अरामको की एक रिफाइनरी व फैसिलिटी को भी निशाना बनाने की बात स्वीकार की है. समूह के प्रवक्ता ने कहा कि ये जवाबी हमले यमन की राजधानी सना पर सऊदी गठबंधन द्वारा की गई सैन्य कार्रवाई के विरोध में किए गए हैं. जुलाई से जारी नौसैनिक नाकाबंदी के बाद से हूतियों के हमले तेजी से बढ़े हैं, जिससे वैश्विक क्रूड ऑयल सप्लाई और लाल सागर से गुजरने वाले समुद्री व्यापार पर अभूतपूर्व संकट मंडरा रहा है.
ग्लोबल ठिकानों पर हमले की आशंका, संयुक्त राष्ट्र ने की निंदा
अमेरिकी अधिकारियों ने आशंका जताई है कि मिडिल ईस्ट के बाहर भी उनके राजनयिक व व्यावसायिक ठिकानों को ईरान समर्थित गुटों द्वारा निशाना बनाया जा सकता है. हालांकि, सऊदी अरब की अपीलों के बावजूद राष्ट्रपति ट्रंप ने हूतियों के खिलाफ सीधे अमेरिकी जमीनी युद्ध में उतरने से इनकार किया है. दूसरी तरफ, तुर्की ने रक्षा समझौतों का हवाला देते हुए सऊदी अरब और पाकिस्तान को सहयोग की पेशकश की है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने भी इन हमलों की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए तत्काल युद्धविराम की मांग की है.












