मां-बेटियों की लाश देखकर चीख-चीखकर रोया नजफगढ़….कोख से श्मशान तक मम्मी की गोद नहीं छूटी

– एक साथ एक आंगन से उठी मां व दो मासूम बेटियों की अर्थी
– बेटियों को जहर खिला चांदनी ने जिंदगी को अलविदा बोला
– बहन को मुखाग्नि देने के बाद भांजियों को घाट किनारे दफनाया

भास्कर ब्यूरो
सरसौल (कानपुर)। सूरज की तपिश भी नजफगढ़ के विलाप को देखकर तनिक कमजोर थी। कच्चे आंगन में मां की देह के करीब मासूम बेटियों की लाश रखी थी। शायद पायल और छोटी बहन ब्यूटी की देह अपनी मम्मी चांदनी के आंचल में सिमटना चाहती थी, लेकिन अब तो मम्मी भी दुनिया से अलविदा हो गई थीं। चांदनी शायद अकेले ही मौत को गले लगाना चाहती थी, लेकिन शराबी पति की हरकतों से परेशान चांदनी को अनजाना डर था कि, उसकी मौत के बाद आदमखोर दुनिया उसकी फूल जैसी बच्चियों को रौंदेगी। इसी खौफ ने उसने बेटियों को जहर खिलाया और खुद भी गटक लिया। बुधवार को चीरघर से हिम्मत हारने वाली मम्मी के साथ गांव की दुलारी बेटियों की देह गांव पहुंची तो चीत्कार से आसमान का कलेजा फट गया। किसी भी देहरी के अंदर चूल्हा नहीं सुलगा था। शोक में समूचा गांव भूखा था। एक-दूजे को सांत्वना और ढांढस के दौर में एक ही सवाल था कि, आखिर ऐसा क्यों किया। नजफगढ़ घाट पर बहन की चिता को मुखाग्नि देने के बाद बेटियों के मामा ने दोनों को धरती माता की गोद में सुला दिया। इस उम्मीद के साथ कि, अगले जन्म में खुशहाल जिंदगी मिलेगी।

शराब के शौक ने उजाड़ा खुशहाल परिवार
बेटियों के साथ बेरहम दुनिया को अलविदा कहने वाली चांदनी का मायका नजफगढ़ ही है। करीब 12 साल पहले मैनपुरी के करहल में नगला सीताराम निवासी मजदूर राकेश से चांदनी का ब्याह हुआ तो खुशियां और ख्वाहिश चहकने लगी थीं। परिवार में वक्त के साथ पायल और ब्यूटी की किलकारी भी गूंजी। गृहस्थी का तनिक बोझ बढ़ा तो राजेश ने मेहनत करने के बजाय शराब का सहारा लेना शुरू कर दिया। चांदनी ने सुधारने के लिए टोका तो हाथ-पैर चलाने की हरकत करने लगा। आए दिन मारपीट से बेबस होकर चांदनी तकरीबन पांच साल पहले अपनी दोनों बेटियों के साथ मायके लौट आई। राकेश पर रिश्तेदारों का दवाब पड़ा तो सुधरने के बजाय पंचायत की जिद पर अड़ गया। तीन साल पहले पंचायत हुई और चांदनी-राकेश ने रिश्ता तोड़ने के बजाय आपसी सहमति से अलग-अलग रहने का निर्णय कबूल कर लिया।

कोशिश हुई नाकामयाब तो बुझ गई चांदनी
नजफगढ़ की बिटिया चांदनी ने अपनी बेटियों की हिफाजत और परवरिश के लिए तमाम जतन किये। खेत-खलिहान में मजदूरी करने से पीछे नहीं हटी, लेकिन खर्चों के पहाड़ के नीचे उसके अरमान कुचलने लगे तो चांदनी बिलख पड़ी। बेटियों के भविष्य के लिए नए संघर्ष के साथ नई जिंदगी शुरू करने के लिए कदम बढ़ाया, लेकिन हाथ आई तो सिर्फ नाकामयाबी। ऐसे में चांदनी हिम्मत हार गई और मंगलवार को सूरज निकलते ही जिंदगी को अस्त करने का खौफनाक फैसला कर लिया। छह साल की पायल और चार साल की ब्यूटी को जहर खिलाने के बाद चांदनी ने भी जहर निगल लिया। पड़ोसियों और परिजनों ने तीनों को अचेत देखा तो सरसौल के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, जहां से हैलट रेफर कर दिया गया। वहां पहुंचने से पहले देर हो चुकी थी। अब बेबस मां के साथ मासूम बेटियों की देह हमेशा के लिए शांत थी।

गांव में नहीं सुलगे चूल्हे, मदद का भरोसा
बुधवार की दोपहर पोस्टमार्टम के बाद तीनों शव नजफगढ़ पहुंचे तो आसपास के गांवों में भी करुण-कंद्रन गूंजना सुनाई पड़ा। समूचे गांव में सन्नाटा था, किसी भी घर में चूल्हा नहीं सुलगा। नजफगढ़ घाट में चांदनी को उसके भाई ने मुखाग्नि देकर विदा किया। इसके बाद भांजियों को धरती माता की गोद में सुलाकर अपने आंसुओं को चुपके से पोछ लिया। हृदय विदारक घटना की सूचना पर जिला पंचायत की अध्यक्ष स्वनिल वरुण भी गांव पहुंची। उन्होंने दुखी परिवार को ढाढस बंधाते हुए मदद का भरोसा दिया। नरवल के एसडीएम विवेक कुमार मिश्रा ने भी सरकारी मदद का आश्वासन दिया था।

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