NEET-UG 2026 पेपर लीक: 25 लाख की डील, प्रिंटिंग प्रेस से टेलीग्राम तक का खेल और अब जुलाई में दोबारा परीक्षा की सुगबुगाहट

नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 के रद्द होने के बाद अब परत-दर-परत इस महा-घोटाले की सच्चाई सामने आ रही है। सीबीआई (CBI) की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, पेपर लीक के नेटवर्क के तार महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली समेत 10 राज्यों से जुड़ते दिख रहे हैं। जहां एक ओर छात्र सड़कों पर उतरकर न्याय की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जांच एजेंसियों के खुलासों ने पूरे देश को चौंका दिया है।

CBI का एक्शन: ब्यूटी पार्लर संचालिका से लेकर प्रिंटिंग प्रेस तक पहुंची आंच

मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई अब तक पांच मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। पुणे से गिरफ्तार मनीषा वाघमारे के बारे में खुलासा हुआ है कि वह पहले ब्यूटी पार्लर चलाती थी और पिछले तीन साल से पेपर लीक सिंडिकेट के संपर्क में थी। नासिक से पकड़े गए शुभम खैरनार ने कबूल किया है कि वह सीधे प्रिंटिंग प्रक्रिया से जुड़ा था, जहां से उसने असली पेपर की फोटोकॉपी निकालकर उसे ‘गेस पेपर’ का नाम दिया और देशभर में फैलाया।

कैसे रचा गया साजिश का जाल? 3 हफ्ते पहले शुरू हुआ खेल

जांच में सामने आया है कि यह कोई मामूली चूक नहीं बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी:

  • गेस पेपर का झांसा: असली प्रश्नपत्र के 150 सवालों को ‘महत्वपूर्ण गेस पेपर’ बताकर टेलीग्राम चैनलों पर डाला गया।

  • 25 लाख की डील: एक-एक पेपर को 25 से 30 लाख रुपए में बेचा गया।

  • ऑनलाइन क्लास की आड़: कुछ संदिग्ध ऑनलाइन क्लासेस में वही सवाल पढ़ाए गए जो लीक पेपर में मौजूद थे। इसके लिए छात्रों से अलग से 50-50 हजार रुपए वसूले गए।

  • 48 घंटे का खेल: परीक्षा से ठीक 48 घंटे पहले केमिस्ट्री और बायोलॉजी की दो अलग-अलग PDF फाइलें चुनिंदा ग्रुप्स में सर्कुलेट की गईं।

सुप्रीम कोर्ट में गुहार: ‘NTA पर अब भरोसा नहीं’

छात्र संगठनों (ABVP, NSUI) और चिकित्सा संगठनों (FAIMA) ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में मांग की गई है कि पूरी परीक्षा प्रक्रिया की निगरानी सुप्रीम कोर्ट खुद करे और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) का पुनर्गठन हो। चर्चित शिक्षक ‘खान सर’ ने भी अपनी नाराजगी जताते हुए NTA को ‘नेवर ट्रस्टेबल एजेंसी’ करार दिया है।

कब होगी दोबारा परीक्षा? साल बर्बाद होने का डर

विशेषज्ञों और विभागीय सूत्रों के अनुसार, दोबारा परीक्षा आयोजित कराना एक बड़ी चुनौती है। नया प्रश्नपत्र तैयार करने, उसे प्रिंट करने और देशव्यापी केंद्रों पर पहुंचाने में कम से कम 25 से 30 दिन का समय लगेगा। संभावना जताई जा रही है कि परीक्षा जुलाई में आयोजित हो सकती है और परिणाम अगस्त-सितंबर तक आएंगे। यदि ऐसा होता है, तो मेडिकल का नया सत्र नवंबर-दिसंबर तक खिंच सकता है, जिससे लाखों छात्रों का पूरा शैक्षणिक वर्ष प्रभावित होगा।

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