जब भी हम सुपरफास्ट बाइक या रेसिंग कारों के बारे में सोचते हैं, तो दिमाग में सबसे पहले पेट्रोल की गंध, भारी-भरकम इंजनों की गड़गड़ाहट और साइलेंसर से धुआं उड़ाती गाड़ियां ही आती हैं। लेकिन क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि सिर्फ पानी से बनने वाली भाप से भी कोई ऐसी सुपरबाइक चल सकती है, जो राइडर को फाइटर जेट वाली रोमांचक फीलिंग दिला दे? सुनने में यह किसी साइंस फिक्शन फिल्म की कहानी जैसा लग सकता है, लेकिन एक ब्रिटिश इंजीनियर ने इस नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया है। इस जीनियस इंजीनियर ने एक ऐसी ‘स्टीम पावर्ड’ यानी भाप से चलने वाली रॉकेट बाइक तैयार की है, जिसने रफ्तार के सारे पुराने रिकॉर्ड्स को मटियामेट कर दिया है। यह बाइक इतनी ज्यादा तेज है कि ड्रैग रेसिंग की दुनिया के बड़े से बड़े सूरमा भी इसे देखकर सन्न रह गए हैं।
पलक झपकते ही 310 किमी प्रति घंटा की रफ्तार, टूट गए सारे पुराने रिकॉर्ड्स
ड्रैग रेसिंग की दुनिया में ‘क्वार्टर माइल’ यानी करीब 402 मीटर की दूरी को एक बहुत बड़ा बेंचमार्क माना जाता है। दुनिया की बड़ी-बड़ी सुपरकार और मॉडिफाइड इंजन भी इस दूरी को तय करने में अच्छा-खासा वक्त ले लेते हैं। लेकिन इस ब्रिटिश इंजीनियर की बनाई ‘राक्षस बाइक’ ने इस दूरी को महज 5.5 सेकंड में पूरा करके सबको दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया। सिर्फ इतना ही नहीं, जब यह बाइक फिनिशिंग लाइन को पार करती है, तो इसकी टॉप स्पीड 310 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच जाती है। इस बेहिसाब रफ्तार की सबसे बड़ी खासियत यही है कि इसे हासिल करने के लिए बाइक में एक बूंद भी पेट्रोल या डीजल का इस्तेमाल नहीं किया गया है।
21वीं सदी के विज्ञान ने बदला भाप का इतिहास, ऐसे बनी ‘बंदूक की गोली’
हम सबने बचपन में इतिहास की किताबों में भाप से चलने वाले पुराने रेल इंजनों के बारे में जरूर पढ़ा है, जो बहुत भारी और बेहद धीमे हुआ करते थे। लेकिन इस ब्रिटिश इंजीनियर ने उसी सदियों पुरानी तकनीक को 21वीं सदी के आधुनिक विज्ञान के साथ ऐसा मिक्स किया कि एक चलता-फिरता ‘रॉकेट’ तैयार हो गया। इस सुपरबाइक के भीतर एक बेहद एडवांस और हाई-प्रेशर स्टीम जेनरेटर लगाया गया है। यह जेनरेटर पानी को बहुत ही कम समय में अत्यधिक तापमान पर गर्म करके सुपर-हीटेड भाप में बदल देता है। जब यह भारी दबाव वाली भाप एक झटके के साथ बाहर निकलती है, तो बाइक को इतनी जबरदस्त थ्रस्ट (ताकत) मिलती है कि वह किसी बंदूक की गोली की तरह आगे की तरफ भागती है।
राइडर पर लगता है फाइटर जेट जैसा 6.8G का जानलेवा दबाव
इस बाइक को चलाना किसी आम राइडर के बस की बात नहीं है। जब यह बाइक अपनी पूरी ताकत के साथ अचानक स्पीड पकड़ती है, तो इस पर बैठे राइडर को 6.8जी (6.8G) तक के गुरुत्वाकर्षण बल का सामना करना पड़ता है। सरल भाषा में कहें तो 6.8जी फोर्स का मतलब यह हुआ कि राइडर को अपने शरीर का वजन सामान्य से करीब सात गुना ज्यादा भारी महसूस होने लगता है। इतना तगड़ा दबाव आमतौर पर सिर्फ अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेस शटल लॉन्चिंग के समय या फिर लड़ाकू विमान उड़ाने वाले जांबाज पायलटों को आसमान में खतरनाक स्टंट करते समय ही महसूस होता है। अगर राइडर का दिल मजबूत न हो और उसने स्पेशल ट्रेनिंग न ली हो, तो वह इस खतरनाक दबाव के कारण पल भर में बेहोश भी हो सकता है।
साइलेंसर से निकलता है सिर्फ पानी, ऑटोमोबाइल सेक्टर में आएगी क्रांति!
आज के समय में जब पूरी दुनिया बढ़ते प्रदूषण और खत्म होते पेट्रोल-डीजल के भंडारों को लेकर परेशान है, ऐसे दौर में यह आविष्कार एक नई उम्मीद बनकर सामने आया है। यह बाइक रफ्तार के शौकीनों को रोमांच तो देती ही है, साथ ही इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाला कोई जहरीला धुआं भी नहीं निकलता। इस बाइक के साइलेंसर से सिर्फ और सिर्फ मासूम भाप बाहर आती है। भले ही अभी यह बाइक आम सड़कों पर चलने के लिए नहीं बनी है और इसका इस्तेमाल सिर्फ रेसिंग ट्रैक्स पर रिकॉर्ड तोड़ने के लिए किया जा रहा है, लेकिन इस ब्रिटिश इंजीनियर ने यह साबित कर दिया है कि अगर तकनीक सही हो, तो पानी की ताकत से भी दुनिया की सबसे तेज गाड़ियां बनाई जा सकती हैं। आने वाले समय में यह तकनीक ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री का पूरा रुख बदल सकती है।















