तमिलनाडु: थलपति विजय के सिर सजा ‘कांटों भरा ताज’, चुनावी वादों को पूरा करने के लिए चाहिए इतने लाख करोड़ का बजट; जानें कितनी बड़ी हैं चुनौतियां

चेन्नई: अभिनय की दुनिया से सियासत के शिखर तक पहुंचे थलपति विजय अब तमिलनाडु के नए ‘कैप्टन’ बन चुके हैं। चेन्नई के नेहरू स्टेडियम में भव्य शपथ ग्रहण के साथ ही प्रदेश में तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के शासन का आगाज हो गया है। हालांकि, बहुमत जुटाने के लिए राज्यपाल के दरवाजे पर चार बार दस्तक देने वाले विजय के लिए असली परीक्षा अब शुरू हुई है। 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनने वाले विजय के सामने न केवल गठबंधन की स्थिरता, बल्कि अपने भारी-भरकम चुनावी वादों को पूरा करने की भी बड़ी चुनौती है।

बहुमत का गणित और ‘विश्वासमत’ की पहली परीक्षा

विजय की राह आसान नहीं थी। तकनीकी रूप से उनके पास 107 विधायक थे (दो सीटों पर जीत के कारण)। राज्यपाल आर.वी. आर्लेकर के 118 विधायकों के लिखित समर्थन की शर्त को पूरा करने के लिए विजय को कांग्रेस (5), भाकपा (2), माकपा (2), वीसीके (2) और आईयूएमएल (2) का साथ लेना पड़ा। अब राज्यपाल के निर्देशानुसार विजय को 13 मई तक विधानसभा में विश्वासमत हासिल करना होगा। गठबंधन सहयोगियों को मंत्रिपरिषद में संतुष्ट रखना उनकी पहली बड़ी प्रशासनिक अग्निपरीक्षा होगी।

विजय के ‘पिटारे’ से जनता को बड़ी उम्मीदें (प्रमुख वादे)

विजय ने अपने घोषणापत्र में लोकलुभावन योजनाओं की झड़ी लगा दी थी, जिन्हें लागू करना अब उनके लिए अनिवार्य है:

  • महिलाओं को आर्थिक मदद: 1.57 करोड़ महिलाओं को हर महीने ₹2,500 की सहायता।

  • किसानों को सपोर्ट: 79.4 लाख किसानों को हर साल ₹15,000 की आय सहायता।

  • मुफ्त रसोई गैस: 1.85 करोड़ परिवारों को साल में 6 एलपीजी सिलेंडर मुफ्त।

  • शिक्षा और युवा: 56.25 लाख छात्रों के अभिभावकों को ₹15,000 की सब्सिडी और 5 लाख युवाओं को ₹8,000 से ₹10,000 तक की इंटर्नशिप छात्रवृत्ति।

  • बेरोजगारी भत्ता: 10 लाख युवाओं के लिए ₹4,000 प्रति माह का अनुदान।

राजकोष पर पड़ेगा 1 लाख करोड़ का भारी बोझ

विजय के इन वादों ने अर्थशास्त्रियों की चिंता बढ़ा दी है। आंकड़ों के मुताबिक:

  • बजट में उछाल: इन योजनाओं को पूरा करने के लिए राज्य को करीब 1 लाख करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी।

  • पिछली सरकार से तुलना: यह एम.के. स्टालिन सरकार (2025-26) के ₹65,000 करोड़ के कल्याणकारी खर्च से 52% अधिक है।

  • राजस्व का दबाव: तमिलनाडु के ₹3.31 लाख करोड़ के कुल राजस्व का लगभग 29.8% हिस्सा सिर्फ इन कल्याणकारी योजनाओं की भेंट चढ़ जाएगा, जो राज्य की आर्थिक सेहत के लिए बड़ा जोखिम हो सकता है।

मजबूत विपक्ष और प्रशासनिक चुनौतियां

सदन में 59 सीटों के साथ डीएमके एक बेहद मजबूत और अनुभवी विपक्ष के रूप में खड़ी है। बेरोजगारी, राजनीतिक हिंसा, कानून-व्यवस्था और केंद्र सरकार के साथ समन्वय बिठाना विजय के लिए आसान नहीं होगा। एमजीआर और जयललिता जैसी विरासत वाले राज्य में जनता अब उन्हें एक ‘रील हीरो’ नहीं, बल्कि एक ‘रियल एडमिनिस्ट्रेटर’ के रूप में देखना चाहती है।

क्या विजय अपने फैनबेस की उम्मीदों और आर्थिक दबाव के बीच संतुलन बना पाएंगे? इसका फैसला उनके कार्यकाल के शुरुआती 100 दिन करेंगे।

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