असम में फिर ‘हिमंता युग’: डॉ. सरमा चुने गए NDA विधायक दल के नेता, 12 मई को PM मोदी की मौजूदगी में होगा भव्य राजतिलक

गुवाहाटी: असम की राजनीति में एक बार फिर डॉ. हिमंता बिस्वा सरमा का निर्विवाद वर्चस्व स्थापित हो गया है। रविवार को गुवाहाटी में आयोजित भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की संयुक्त बैठक में डॉ. सरमा को सर्वसम्मति से विधायक दल का नेता चुन लिया गया। इस फैसले के साथ ही राज्य में उनके लगातार दूसरे कार्यकाल का रास्ता साफ हो गया है। अब आगामी 12 मई को वह दोबारा मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।

नड्डा और नायब सैनी की मौजूदगी में हुआ फैसला

रविवार सुबह 11 बजे गुवाहाटी स्थित भाजपा मुख्यालय में नवनिर्वाचित विधायकों की महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में केंद्रीय पर्यवेक्षक के तौर पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मौजूद रहे। बैठक में डॉ. सरमा के नाम का प्रस्ताव रखा गया, जिसे सभी 82 भाजपा विधायकों ने निर्विरोध स्वीकार कर लिया। गठबंधन के साथी दल—असम गण परिषद (AGP) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF)—ने भी डॉ. सरमा के नेतृत्व पर अपनी मुहर लगा दी।

राज्यपाल को सौंपा इस्तीफा, पेश किया सरकार बनाने का दावा

नेता चुने जाने के तुरंत बाद डॉ. हिमंता बिस्वा सरमा राजभवन पहुंचे और राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य से मुलाकात की। संवैधानिक प्रक्रिया के तहत उन्होंने अपना इस्तीफा सौंपा और 102 गठबंधन विधायकों के समर्थन का पत्र देते हुए नई सरकार बनाने का औपचारिक दावा पेश किया। असम भाजपा अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने पुष्टि की कि गठबंधन पूरी तरह एकजुट है और बहुमत का आंकड़ा पार कर चुका है।

12 मई को खानपारा में सजेगा भव्य मंच

नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 12 मई (मंगलवार) को गुवाहाटी के खानपारा स्थित ‘कॉलेज ऑफ वेटरनरी साइंस’ मैदान में होगा। इस समारोह की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसमें मुख्य अतिथि होंगे। उनके अलावा गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा के कई वरिष्ठ नेता और एनडीए शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी शामिल होंगे। प्रशासन एक लाख से अधिक समर्थकों के आने की तैयारी कर रहा है।

ऐतिहासिक जीत: बीजेपी ने अपने दम पर पाया बहुमत

4 मई को घोषित नतीजों में भाजपा गठबंधन ने असम की 126 सीटों में से 102 सीटों पर प्रचंड जीत हासिल की है। भाजपा ने अकेले 82 सीटें जीतकर अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ रिकॉर्ड बनाया। दूसरी ओर, कांग्रेस नीत ‘मित्रजोत’ गठबंधन मात्र 19 सीटों पर सिमट गया, जबकि AIUDF और रायजोर दल को केवल 2-2 सीटें ही मिल सकीं।

कांग्रेस से बगावत से ‘पूर्वोत्तर के चाणक्य’ तक का सफर

57 वर्षीय डॉ. हिमंता बिस्वा सरमा ने 2015 में कांग्रेस का साथ छोड़कर भाजपा का दामन थामा था। तब से उन्होंने न केवल असम में भाजपा की स्थिति मजबूत की, बल्कि पूरे पूर्वोत्तर भारत में पार्टी के विस्तार के ‘चाणक्य’ बनकर उभरे। सख्त हिंदुत्व की छवि, घुसपैठ के खिलाफ कड़े रुख और विकास कार्यों ने उन्हें जनता के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया है।

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