अयोध्या राम मंदिर में करोड़ों के चढ़ावे का गबन? जांच करने पहुंची SIT; 5 कर्मचारी रडार पर, सीसीटीवी फुटेज और बैंक ट्रांजैक्शन की बारीकी से जांच

अयोध्या: राम नगरी अयोध्या से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। अयोध्या राम मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाए गए दान में भारी वित्तीय अनियमितताओं और गबन के आरोपों की जांच करने के लिए सोमवार दोपहर को विशेष जांच दल (SIT) की टीम सीधे मंदिर परिसर पहुंच गई। दोपहर करीब 2:53 बजे टीम ने परिसर में एंट्री ली। जांच शुरू करने से पहले टीम के सदस्यों ने रामलला के दर्शन-पूजन किए और फिर सीधे उस जगह पहुंचे जहां से आस्था के नाम पर कथित तौर पर करोड़ों की हेरफेर की बात सामने आ रही है।

एसआईटी ने सबसे पहले उन दानपात्रों (Hundi) का मुआयना किया, जिनमें देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं। इसके बाद टीम ने दान राशि की गिनती (Money Counting Process) की पूरी प्रक्रिया की जानकारी ली और उस सुरक्षित लॉकर रूम का भी बारीकी से निरीक्षण किया जहां यह पैसा रखा जाता है।

5 कर्मचारी रडार पर: एक की करोड़ों की संपत्ति, दूसरे के घर मिला 30 लाख कैश

इस पूरे मामले में सबसे सनसनीखेज खुलासा मंदिर के ही कुछ कर्मचारियों को लेकर हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी के रडार पर इस वक्त मंदिर के 5 प्रमुख कर्मचारी हैं, जिनकी भूमिका बेहद संदिग्ध मानी जा रही है।

  • पहला संदिग्ध: दान राशि की गिनती में तैनात एक कर्मचारी के घर पर छापेमारी के दौरान ₹30 लाख कैश मिलने की बात सामने आई है। चर्चा है कि इस कर्मचारी ने हाल ही में करोड़ों की बेनामी संपत्ति खड़ी की है।

  • दूसरा संदिग्ध: मंदिर में भगवान को चढ़ने वाले सोने-चांदी और कीमती जेवरों की गिनती करने वाला एक कर्मचारी भी संदेह के घेरे में है।

  • अन्य संदिग्ध: तीन अन्य कर्मचारियों की अचानक बदली हुई आलीशान जीवनशैली (Lifestyle) ने जांच अधिकारियों के कान खड़े कर दिए हैं। टीम इन सभी के बैंक खातों और संपत्ति का ब्योरा खंगाल रही है।

सीसीटीवी फुटेज और बैंक ट्रांजैक्शन की बारीकी से जांच

एसआईटी की टीम ने अपनी जांच के पहले ही दिन एक्शन मोड में आते हुए मंदिर प्रशासन से पिछले कई महीनों के सीसीटीवी फुटेज (CCTV Footage) मांग लिए हैं। टीम ने कुछ महत्वपूर्ण फुटेज को अपने कब्जे में भी ले लिया है, जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा।

इस दौरान टीम ने वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों और कर्मचारियों से कड़ी पूछताछ की। इसके साथ ही जिलाधिकारी (DM), एसएसपी (SSP), एसपी सुरक्षा और राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा नियुक्त अधिकारियों व मंदिर मजिस्ट्रेटों के साथ एक हाई-लेवल मीटिंग की गई। जांच टीम दानपात्र से निकली कुल राशि और बैंक खातों में जमा की गई रकम के बीच के अंतर (Mismatch) को तलाशने में जुटी है।

सिविल लाइंस में बनेगा SIT का हाई-टेक कमांड ऑफिस

जांच की संवेदनशीलता और गोपनीयता को बनाए रखने के लिए एसआईटी के रहने, खाने-पीने और काम करने का पूरा इंतजाम अलग रखा गया है। सूत्रों के अनुसार, टीम के लिए सिविल लाइंस स्थित ‘अयोध्या तीर्थ क्षेत्र विकास परिषद’ के कार्यालय को अस्थायी हेडक्वार्टर (SIT Office) बनाया जा रहा है। यहां आनन-फानन में एसी, हाई-टेक कंप्यूटर, प्रिंटर और नया फर्नीचर उपलब्ध कराने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

पूर्व लेखा अधिकारी के खुलासे से हिला प्रशासन, ऐसे शुरू हुई जांच

आपको बता दें कि इस महाघोटाले का खुलासा तब हुआ जब राम मंदिर के पूर्व मुख्य लेखा अधिकारी (Ex-Account Officer) महिपाल सिंह ने कुछ दिनों पहले एक बड़ा दावा किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि मंदिर के चढ़ावे में करीब ₹7 करोड़ की भारी वित्तीय अनियमितता हुई है। यही नहीं, उन्होंने यह भी संगीन आरोप लगाया था कि सबूत मिटाने के उद्देश्य से पिछले 8 महीनों के सीसीटीवी फुटेज डिलीट कर दिए गए हैं।

इस बड़े खुलासे के बाद राम मंदिर ट्रस्ट में हड़कंप मच गया और ट्रस्ट ने खुद उत्तर प्रदेश सरकार से इस मामले की एसआईटी जांच कराने की सिफारिश की। इसके तुरंत बाद योगी सरकार ने सूबे के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल करते हुए एसआईटी का गठन किया, जिसने अब अयोध्या में डेरा डाल दिया है।

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