
नई दिल्ली: आधुनिक युद्ध के मैदान में अब मिसाइलें ही हार और जीत तय कर रही हैं। भारत की बढ़ती सैन्य ताकत और ‘अग्नि-5’ जैसी इंटर-कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) की धमक के बीच एक बड़ी खबर रक्षा गलियारों से आ रही है। रक्षा सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत के भरोसेमंद दोस्त इजरायल ने भारतीय वायुसेना को अपनी सबसे खतरनाक ‘गोल्डन होराइजन’ (Golden Horizon) एयर लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल देने का प्रस्ताव दिया है। यह मिसाइल न केवल ब्रह्मोस से तेज है, बल्कि जमीन के सैकड़ों फीट नीचे छिपे दुश्मन के परमाणु ठिकानों को भी मलबे में तब्दील करने की क्षमता रखती है।
बंकर बस्टर: जमीन के नीचे छिपे परमाणु ठिकानों का होगा अंत
दुनिया भर के देश अब अपने संवेदनशील सैन्य अड्डों और परमाणु संयंत्रों को जमीन के अंदर गहरे बंकरों में सुरक्षित कर रहे हैं। पाकिस्तान का परमाणु ठिकाना भी किराना हिल्स की पहाड़ियों में अंडरग्राउंड स्थित है। ऐसे में भारत को एक ऐसे ‘बंकर बस्टर’ हथियार की जरूरत थी जो पहाड़ों और कंक्रीट की मोटी परतों को चीर सके। इजरायल की यह नई मिसाइल खास तौर पर गहरे और अत्यधिक सुरक्षित रणनीतिक ठिकानों को तबाह करने के लिए ही डिजाइन की गई है।
‘सिल्वर स्पैरो’ तकनीक पर आधारित है यह महाशक्तिशाली मिसाइल
गोल्डन होराइजन मिसाइल इजरायल की प्रसिद्ध ‘सिल्वर स्पैरो’ टारगेट मिसाइल पर आधारित है। लगभग आठ मीटर लंबी और तीन टन वजनी यह मिसाइल पहले केवल मिसाइल डिफेंस सिस्टम के परीक्षण के लिए इस्तेमाल की जाती थी। लेकिन अब इजरायली वैज्ञानिकों ने इसी तकनीक को एक घातक ‘डीप-स्ट्राइक’ हथियार में बदल दिया है। यह मिसाइल लड़ाकू विमानों से लॉन्च की जा सकती है, जिससे इसकी मारक क्षमता और भी बढ़ जाती है।
2000 किलोमीटर तक अचूक निशाना और ब्रह्मोस से भी ज्यादा रफ्तार
यूं तो इस मिसाइल की सटीक तकनीकी जानकारी गोपनीय रखी गई है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का अनुमान है कि इसकी रेंज 1500 से 2000 किलोमीटर के बीच हो सकती है। इसकी न्यूनतम प्रभावी रेंज भी 1000 किलोमीटर बताई जा रही है, जो वर्तमान में मौजूद एयर-लॉन्च्ड हथियारों से कहीं अधिक है। मारक क्षमता और रफ्तार के मामले में यह मिसाइल भारत की सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस को भी पीछे छोड़ती नजर आ रही है।
रैम्पेज और एयर लोरा के बाद अब ‘गोल्डन होराइजन’ की बारी
इजरायल पहले ही भारत को ‘रैम्पेज’ और ‘एयर लोरा’ जैसे उन्नत मिसाइल सिस्टम दे चुका है। जहां रैम्पेज 250 किलोमीटर और एयर लोरा 400 किलोमीटर तक रडार और कमांड सेंटर्स को निशाना बनाती हैं, वहीं गोल्डन होराइजन इनसे कई गुना ज्यादा शक्तिशाली है। यह सीधे दुश्मन के अंडरग्राउंड न्यूक्लियर फैसिलिटी और मजबूत कमांड बंकर्स को निशाना बनाएगी। अगर यह डील फाइनल होती है, तो भारतीय वायुसेना की स्ट्राइक पावर में युगान्तकारी बदलाव आएगा और दुश्मन के लिए सिर छुपाने की कोई जगह नहीं बचेगी।














