
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली शहर में तीन-चार दिनों से लगातार बारिश होने के कारण लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है, क्योंकि लगातार बारिश होने से शहर में चारों तरफ जलभराव की स्थिति बनी हुई है, जिसके चलते वाहन चालकों और राहगीरों को जलभराव से होकर गुजरना पड़ रहा है। साथ ही जलभराव के कारण वाहन चालकों को जाम की समस्या से भी जूझना पड़ रहा है। दिल्ली शहर हो रही लगातार बारिश की वजह से लोगो को अपनी जान तक गंवानी पड़ रही है। बता दें कि उत्तर पूर्वी दिल्ली के मुस्तफाबाद क्षेत्र के दयाल पुर इलाके में अप्रैल 2025 में तेज आंधी और बारिश के कारण एक चार बहूमंजिला पूरी इमारत ताश के पत्तों की तरह भरभरा कर गिर गई थी। इस दर्दनाक हादसे में करीबन 11 लोगों की जान चली गई थी। इसी प्रकार बारिश ने भी फिर 3 लोगों को मौत की नींद सुला दिया है। बता दें कि दिल्ली के रोहिणी इलाके में एक चार बहूमंजिला इमारत अचानक ढह गई, इस हादसे में मकान मालिक समेत 3 लोग मलबे के नीचे दबने से मौत हो गई, जबकि 3 लोग घायल बताए जा रहे हैं। इस दौरान संबंधित एजेंसियों, एनडीआरएफ, एमसीडी, दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस और दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग द्वारा मलबा हटाने और बचाव कार्य किए जा रहा है। साथ ही घायलो को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हालाकि बारिश में भी टीमों द्वारा बचाव कार्य लगातार जारी है। इस दौरान नगर निगम रोहिणी जोन उपायुक्त अंशुल सिरोही ने बताया कि संपत्ति संख्या नंबर जी-4/152 और जी-4/153 की इमारत गिरने की सूचना मिलते ही निगम की टीम मौके पर पहुंच गई थी, जहां टीम द्वारा मलबा हटाने का कार्य शुरू किया गया। साथ ही सभी एजेंसियों के सहयोग के दबे हुए लोगों को बाहर निकालने का कार्य शुरू किया गया था। हालाकि निगम टीम द्वारा 500 ट्रक करीबन 8000 टन मलबा हटाया गया है। इसी बीच निगम अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान पाया गया कि ये इमारतें हाल ही में (SARAL) योजना के तहत बिल्डिंग प्लान के तहत मंजूरी मिलने के बाद बनाई गई थीं। हालाकि 21 मार्च 2025 और 1 अप्रैल 2025 को हर प्रॉपर्टी का प्लॉट एरिया लगभग 26 वर्ग मीटर है। उपायुक्त सिरोही ने कहा कि नगर निगम विभाग अधिकारियों द्वारा स्थानीय लोग और घटनास्थल पर मौजूद लोगों से पूछताछ की गई, तो पता चला कि इमारत में पहले से ही प्लंबिंग का काम चल रहा था। बताया गया है कि प्लंबिंग के काम के सिलसिले में कॉलम और बीम जैसे स्ट्रक्चरल हिस्सों की ड्रिलिंग और कटिंग करने की संभावना जताई जा रही है।
हालाकि दोनों इमारतें गिर चुकी हैं, जिससे उन्हें भारी नुकसान हुआ है। साथ ही निरीक्षण के दौरान मिली शुरुआती जानकारी के मुताबिक, अवलोकनों के आधार पर इमारतें गिरने का कारण स्ट्रक्चरल फेलियर (ढांचे की विफलता) और-या नींव का असमान रूप से धंसना (डिफरेंशियल सेटलमेंट) हो सकता है। इस चरण में गिरने का सटीक कारण निश्चित रूप से नहीं बताया जा सकता है। फिलहाल निर्माण की कुल देखरेख उस आर्किटेक्ट और स्ट्रक्चरल इंजीनियर की थी, जिन्होंने बिल्डिंग प्लान को मंजूरी दिलाई थी। हालाकि टीम द्वारा पूरे मामले की जांच की जा रही है, उन्होंने कहा कि नगर निगम की कंट्रोल रूम में हादसे की सूचना मिलते टीम मौके पर पहुंच गई है। निगम की टीम ने करीबन 20 घंटे सर्च अभियान चलाकर मलबे को हटाने का कार्य में जुटी रही। साथ ही मलबे में दबे लोगों को भी खोज भी लगातार रही, बता दें कि कल शाम 5 बजे से लेकर आज 11 बजे के आसपास निगम टीम द्वारा मलबे को हटाने के काम में लगी हुई थी।














