BRICS समिट 2026: 10 साल बाद एक मंच पर दिखेंगे मोदी-पुतिन और शी जिनपिंग, पश्चिमी देशों के लिए बढ़ रही चुनौती

10 वर्षों बाद ऐतिहासिक तिकड़ी का पुनर्मिलन

नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के मंच पर एक ऐतिहासिक दृश्य देखने को मिल रहा है। पूरे 10 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक साथ नजर आएंगे। इससे पहले यह त्रिकोण 2016 में गोवा में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान एक साथ दिखाई दिया था। इस बार सम्मेलन में 11 सदस्य देशों के अलावा 10 भागीदार देशों के शीर्ष नेता भी शिरकत कर रहे हैं।

दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति और गौतम अडाणी की मुलाकात

शिखर सम्मेलन से इतर राजनयिक और व्यापारिक वार्ताओं का दौर भी जारी है। दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने नई दिल्ली में अडाणी समूह के चेयरमैन गौतम अडाणी से मुलाकात की। दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार, इस बैठक का मुख्य उद्देश्य भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच व्यापारिक, औद्योगिक और रणनीतिक निवेश संबंधों को अधिक मजबूती प्रदान करना है।

चीन और भारत के बीच फिर शुरू होगी सीधी उड़ान

द्विपक्षीय संबंधों में सुधार के संकेतों के बीच, चाइना सदर्न एयरलाइंस लगभग 6 वर्षों के ठहराव के बाद भारत के लिए अपनी नियमित यात्री उड़ानें पुनः बहाल करने जा रही है। एयरलाइन 21 सितंबर से ग्वांगझू-दिल्ली मार्ग पर उड़ानों का संचालन शुरू करेगी। चीनी मीडिया के अनुसार, इस सेवा के शुरू होने से दक्षिण एशियाई क्षेत्र में हवाई कनेक्टिविटी को नई रफ्तार मिलेगी।

शी जिनपिंग का गलवान संघर्ष के बाद पहला भारत दौरा

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग लगभग 7 वर्षों के अंतराल के बाद भारत पहुंचे हैं। वर्ष 2020 के गलवान सैन्य संघर्ष के बाद भारतीय धरती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी यह पहली आमने-सामने की बैठक है। दोनों देशों के बीच सीमा विवाद पर एक विशेषज्ञ समूह गठित करने, सीमा पर 2 अतिरिक्त सैन्य संपर्क केंद्र और पूर्वी व मध्य सेक्टर में 2 सैन्य हॉटलाइन स्थापित करने जैसे बिंदुओं पर सहमति बनी है, जिन्हें शीर्ष नेतृत्व की मंजूरी मिलनी है। व्यापारिक आंकड़ों की बात करें तो वर्ष 2025-26 में भारत ने चीन से 11.4 लाख करोड़ रुपये का आयात किया, जिससे व्यापार घाटा 8.6 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा।

डॉलर पर निर्भरता कम करने की BRICS की बड़ी रणनीति

BRICS देश अब अपनी वैश्विक आर्थिक छाप को तेजी से मजबूत कर रहे हैं। समूह के सदस्य आपस में व्यापार करते समय अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता घटाकर अपनी-अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं में लेन-देन बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं। इसके साथ ही विभिन्न सदस्य देशों के डिजिटल भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ने की योजना पर काम चल रहा है। भारत की अध्यक्षता में हो रहे इस समिट में भी अपनी करेंसी में सुगम व्यापार और एकीकृत डिजिटल पेमेंट नेटवर्क को मुख्य एजेंडे के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है।

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