चुनावी महामुकाबला: 5 राज्यों के नतीजों का दिन, कहीं ममता की साख तो कहीं ‘कमल’ की उम्मीद; जानें पल-पल का अपडेट

नई दिल्ली/कोलकाता: देश की राजनीति के लिए आज का दिन ऐतिहासिक होने जा रहा है। पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में हुए विधानसभा चुनावों के लिए वोटों की गिनती सुबह 8 बजे से शुरू हो चुकी है। इन नतीजों से यह तय हो जाएगा कि अगले पांच साल तक इन राज्यों की बागडोर किसके हाथ में होगी। बंगाल की 294 सीटों से लेकर पुडुचेरी की 30 सीटों तक, हर जगह जनता का फैसला अब ईवीएम (EVM) से बाहर आने लगा है।

बीजेपी मुख्यालय में जश्न की तैयारी: बनने लगीं गरमा-गरम जलेबियां

रुझानों के आने के साथ ही दिल्ली स्थित भारतीय जनता पार्टी (BJP) के मुख्यालय में भारी उत्साह देखा जा रहा है। नतीजों की आधिकारिक घोषणा से पहले ही कार्यकर्ताओं ने जीत की तैयारी शुरू कर दी है और परिसर में जलेबियां तली जा रही हैं। न केवल पांच मुख्य राज्यों बल्कि सात सीटों पर हुए उपचुनावों के परिणामों को लेकर भी दिल्ली से लेकर राज्यों के दफ्तरों तक गहमागहमी तेज है।

पश्चिम बंगाल: भवानीपुर में ममता बनर्जी ने बनाई बढ़त, शुभेंदु से कड़ी टक्कर

पूरे देश की निगाहें पश्चिम बंगाल के रण पर टिकी हैं, जहां दो चरणों में रिकॉर्ड 93% और 90% मतदान हुआ था। हॉट सीट भवानीपुर से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी फिलहाल आगे चल रही हैं। यहां उनकी सीधी टक्कर बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी से है। बंगाल की 294 सीटों के रुझान यह साफ करेंगे कि ‘दीदी’ की सत्ता बरकरार रहेगी या ‘सोनार बांग्ला’ के नारे के साथ बीजेपी पहली बार यहाँ सरकार बनाएगी।

असम और तमिलनाडु: रुझानों में बीजेपी और डीएमके को मिली बढ़त

शुरुआती रुझानों की बात करें तो असम की 126 सीटों में से बीजेपी फिलहाल 11 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि AIUDF 1 सीट पर आगे है। दूसरी ओर, तमिलनाडु में सत्ता परिवर्तन की लहर दिखाई दे रही है। डीएमके (DMK) प्रवक्ता टी.के.एस. एलंगोवन ने बड़ा दावा करते हुए कहा है कि उनकी पार्टी 40% से ज्यादा वोट शेयर के साथ 130-140 सीटें जीतेगी और पूर्ण बहुमत की सरकार बनाएगी। फिलहाल डीएमके 5 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है।

केरल और पुडुचेरी: क्या बदलेंगे सियासी समीकरण?

केरल की 140 और पुडुचेरी की 30 सीटों पर भी मतगणना जारी है। केरल में जहां एलडीएफ (LDF) इतिहास रचने की कोशिश में है, वहीं पुडुचेरी में एनडीए गठबंधन अपनी पकड़ मजबूत करने की जुगत में है। अगले कुछ घंटों में यह साफ हो जाएगा कि दक्षिण के इन राज्यों में जनता ने विकास के दावों को चुना है या सत्ता परिवर्तन के संकल्प को।

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