नेपाल की नई कस्टम ड्यूटी नीति से भारत-नेपाल सीमा पर व्यापार ठप: रोटी-बेटी के रिश्तों पर भी पड़ रहा असर

नई दिल्ली/काठमांडू: नेपाल की बालेंद्र शाह सरकार द्वारा लागू की गई नई कस्टम ड्यूटी नीति ने भारत-नेपाल सीमा पर दशकों से चले आ रहे सहज व्यापार और सामाजिक ताने-बाने को हिलाकर रख दिया है। नेपाल सरकार के इस सख्त फैसले के तहत, अब सीमा पार से लाए जाने वाले 100 नेपाली रुपए से अधिक मूल्य के हर सामान पर 5 से 80 प्रतिशत तक कर (Tax) लगाया जा रहा है। इस नियम ने न केवल बड़े व्यापारियों बल्कि सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले आम नागरिकों की कमर तोड़ दी है।

100 रुपए की सीमा: आम जनता और छोटे व्यापारियों में भारी आक्रोश

आज के महंगाई के दौर में 100 नेपाली रुपए की सीमा को बेहद कम और अव्यवहारिक माना जा रहा है। इस नीति का सबसे बुरा असर उन लोगों पर पड़ा है जो रोजमर्रा के राशन, दवाइयों और कपड़ों के लिए भारतीय बाजारों पर निर्भर थे।

  • प्रमुख प्रभावित क्षेत्र: भारत के सीमावर्ती शहर जैसे सोनौली, रक्सौल, जोगबनी, बनबसा, टनकपुर और धारचूला के बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है।

  • व्यापार में गिरावट: स्थानीय दुकानदारों का दावा है कि नेपाली ग्राहकों की कमी के कारण उनका कारोबार कुछ ही दिनों में 50 प्रतिशत तक गिर गया है।

  • मजदूरों पर संकट: रिक्शा चालक, कुली और छोटे पटरी दुकानदारों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा हो गया है, क्योंकि उनकी आय सीधे तौर पर सीमा पार आवाजाही पर टिकी थी।

दशकों पुरानी परंपरा और सांस्कृतिक संबंधों पर चोट

भारत और नेपाल के बीच ‘रोटी-बेटी’ का संबंध रहा है, जहां खुली सीमा के कारण लोग बिना किसी रोक-टोक के खरीदारी और मेल-मिलाप करते थे।

  • अपमानजनक जांच: सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों द्वारा सख्ती से की जा रही जांच और लंबी कतारों को आम नागरिक अपमानजनक और थकाऊ बता रहे हैं।

  • भेदभाव का आरोप: लोगों में इस बात को लेकर भी गुस्सा है कि सड़क मार्ग से आने वाले गरीबों के लिए नियम कठोर हैं, जबकि हवाई यात्रा करने वाले रसूखदारों को व्यक्तिगत सामान पर काफी छूट दी जाती है।

नीति के पीछे नेपाल सरकार का तर्क और विरोध

नेपाल सरकार का तर्क है कि इस कदम से अवैध आयात (Illegal Import) पर लगाम लगेगी और देश के घरेलू उद्योगों व स्थानीय व्यापारियों को बढ़ावा मिलेगा। हालांकि, नेपाल के भीतर ही इस नीति का तीखा विरोध शुरू हो गया है:

  • विपक्ष का रुख: विपक्षी दलों के साथ-साथ सत्तारूढ़ गठबंधन के कुछ नेताओं ने भी इसे ‘जनता विरोधी’ करार दिया है।

  • मांग: अव्यवहारिक नियमों को तुरंत वापस लेने या 100 रुपए की न्यूनतम सीमा को बढ़ाने की मांग तेज हो रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस कस्टम ड्यूटी नीति की समीक्षा नहीं की गई, तो सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ता असंतोष दोनों देशों के बीच सदियों पुराने मधुर संबंधों और रणनीतिक तालमेल को प्रभावित कर सकता है।

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